AC के साथ पंखा कितने नंबर पर चलाएं कि गर्मी के साथ बिजली का बिल भी 'कूल' हो जाए?
आप बिला-वजह 18 पर चलाकर बिजली बिल बढ़ा रहे जबकि यही काम 24 डिग्री (Why you should keep the AC at 24C ) पर भी हो सकता है. अब जो आप 18-20-22 डिग्री पर खेल रहे तो जाहिर सी बात है कि AC पर प्रेशर बढ़ रहा होगा. यही प्रेशर बिजली के मीटर पर फटता है.

गर्मी तो जमकर पड़ रही है. AC भी खूब चल रहा होगा. जल्दी ठंडा करने के लिए आपने मीटर भी 18 डिग्री पर सेट कर लिया होगा. कर लिया है ना. बढ़िया जूड़ी हवा लीजिए मगर जब बिजली बिल आएगा तो जेब मौसम से ज्यादा गर्म हो जाएगी. अरे नहीं होगी, क्योंकि हमारे पास तो नई रेटिंग वाला 5 स्टार एसी है. दोस्त फर्क AC की रेटिंग्स से नहीं बल्कि आपकी चलाने की आदतों से पड़ता है. आप बिला वजह 18 पर चलाकर बिजली बिल बढ़ा रहे जबकि यही काम 24 डिग्री पर भी हो सकता है. बताते कैसे.
शरीर का साइंस समझ लीजिएजनाब हमारा जो शरीर है, उसके तापमान को झेलने की एक सीमा है. हमारे शरीर का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है. बॉडी 23 डिग्री से 39 डिग्री तक का तापमान आसानी से झेल जाती है. मतलब 39 से ऊपर हुआ तो गर्मी का अहसास बढ़ जाता है और 23 से नीचे आया तो ठंड का पता चलता है. क्योंकि आप तो 20 या उससे कम पर चलाने की आदत पाले हुए हैं तो इस तापमान पर शरीर Hypothermic रिएक्शन देता है. बॉडी बेचारी चिंता में आ जाती है और खुद को सिकोड़ने लगती है.
ये शरीर का नेचुरल प्रोसेस है. अगर घर में पालतू जानवर हैं तो गौर कीजिएगा. वो भी तापमान कम होने पर शरीर सिकोड़ने लगते हैं. तो बात ऐसी है कि 23 डिग्री से नीचे आना तो सेहत के लिए अच्छा ही नहीं. ऊपर से ठंडी हवा नमी को सोख लेती थी. जिसकी वजह से स्किन बहुत ज्यादा ड्राई हो जाती है. हवा में नमी नहीं होना भी कोई अच्छी बात नहीं. शरीर का साइंस समझ लिया, अब पॉकेट की बात.
अब जो आप 18-20-22 डिग्री पर खेल रहे तो जाहिर सी बात है कि AC पर प्रेशर बढ़ रहा होगा. यही प्रेशर बिजली के मीटर पर फटता है. गणित के हिसाब से देखें तो अगर बिजली का खर्च 10 रुपये प्रति यूनिट है और आप 18 डिग्री पर 8 घंटे AC चलाते हैं तो हर घंटे 1.5 यूनिट लगेगी. एक रात की 12 यूनिट माने 120 रुपये. महीने के हुए 3600 रुपये.
अब जो आप 24 डिग्री पर सेटल हो गए तो हर घंटे 1 यूनिट का मीटर घूमेगा. 8 घंटे की आठ यूनिट माने रात भर के 80 रुपये. महीने के हो गए 2400 रुपये. नॉर्मल गणित में भी 50 फीसदी की बचत. 1200 के हिसाब से साल के 15 हजार बचेंगे. दिल्ली सरकार तो 24 हजार मानकर चलती है.
ये गणित सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है. Bureau of Energy Efficiency (BEE) कितनी बार ये अपील कर चुका है कि भईया 24 डिग्री पर मान जाओ. अरबों रुपये की बिजली बचेगी. अगर 50 फीसदी यूजर भी ऐसा कर लें तो साल भर में 10 हजार करोड़ की बचत हो सकती है. थोड़ा भला पर्यावरण का भी हो जाएगा. 8 घंटे 18 डिग्री मतलब 10 किलो कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) हवा में. सोचकर देखिए. कुछ डिग्री बढ़ा लेने से शरीर सही रहेगा, पॉकेट भारी रहेगी और हवा हल्की.
एक प्रो टिप और लेते जाइए. एसी के साथ पंखा फुल पर नहीं बल्कि 3 पर चलाइए. ठंडी हवा नीचे रहेगी और आपकी मौज रहेगी.
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