मालवेयर से iPhone यूजर्स को चूना लगाती है ऐप्पल? पूर्व कर्मचारी का बड़ा दावा
Apple की पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि वो पुराने आईफोन स्लो (Why do iPhones slow down after update) कर देती है. वीडियो में उनका कहना है कि कंपनी पुराने आईफोन में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए मालवेयर भेजकर उनको स्लो कर देती है ताकि यूजर्स मजबूरी में नया डिवाइस खरीदे.

Apple नया iPhone लॉन्च होते ही ‘सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए पुराने आईफोन को स्लो कर देता’ है. इतना पढ़ते ही अगर आपके मन में ‘चल-चल मुझे मत सिखा’ वाला मीम याद आ रहा तो रुक जाइए. हमें भी पता है कि ये सब बातें अब सालों पुरानी हो चली हैं. मगर अब इसमें कुछ नया आया है. दरअसल ऐप्पल की पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने वीडियो पोस्ट करके आरोप लगाया है कि ऐप्पल पुराने आईफोन में मालवेयर भेजकर उनको स्लो कर देता है, ताकि यूजर्स को मजबूरी में नए डिवाइस पर अपग्रेड करना पड़े. हमें लगा कि इस बार बात करना बनता है.
बैटरीगेट (Batterygate) से उठा धुआंसाल 2017 के जनवरी का महीना था जब कंपनी ने अपने ऑपरेटिंग्स सिस्टम का iOS 10.2.1 वर्जन रिलीज किया. इसके ठीक 3 महीने पहले कंपनी ने आईफोन 7 मार्केट में उतारा था और उसके साथ ही iOS 10 रिलीज किया था. आईओएस 10 के आते ही कई सारे आईफोन 6 यूजर्स ने उनके डिवाइस गर्म होने और बैटरी में वोल्टेज के उतार-चढ़ाव की शिकायत की.
कई सारे यूजर्स के आईफोन 6 की बैटरी 30 फीसदी तक आते ही उनके डिवाइस खुद से बंद हो जा रहे थे. iOS 10.2.1 के आते ही यूजर्स की ये दिक्कत खत्म तो हो गई, मगर ऐप्पल के लिए नई समस्या खड़ी हो गई. दुनिया भर में यूजर्स ने कंपनी पर डिवाइस में throttle के जरिए बैटरी खराब करने और डिवाइस स्लो करने के केस ठोक दिए.
ऐप्पल ने यूजर्स को 500 मिलियन डॉलर और 34 राज्यों के अटॉर्नी जनरलों को 113 मिलियन डॉलर का भुगतान किया. फ्रांस ने उस पर 25 मिलियन यूरो और इटली ने 10 मिलियन यूरो का जुर्माना ठोक दिया. गौर करने वाली बात ये है कि ये सभी जुर्माने फोन स्लो करने के लिए नहीं बल्कि जानकारी छिपाने के लिए लगाए गए थे. iOS 10.2.1 के रिलीज़ नोट्स में "पीक वर्कलोड के दौरान पावर मैनेजमेंट में सुधार" के रूप में थ्रॉटल का उल्लेख था और यूजर्स को इसके अलावा कहीं और इसकी जानकारी नहीं थी.
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इसको जरा आसान करके समझते हैं. कोई भी कंपनी जब कोई सॉफ्टवेयर अपडेट पुश करती है तो उसके साथ डिटेल में जानकारी नत्थी करती है. अपडेट में क्या है, सब बताया जाता है. एकदम जैसे होम लोन के कागज में लिखा होता है. जैसे हम लोन के कागजों को नहीं पढ़ते और साइन पर साइन करते जाते हैं, वैसे ही हम अपडेट देखकर ओके कर देते हैं. iOS 10.2.1 अपडेट में कंपनी ने माना कि थ्रॉटल का इशू था, मगर उसे हाईलाइट नहीं किया. कोर्ट ने इसे गलती माना और ठोक दिया करोड़ों का जुर्माना. 2017 से 2026 में चलेंगे, मगर पहले जरा थ्रॉटल समझ लेते हैं.
क्या होता है थ्रॉटल?एकदम देसी तरीके से समझना है तो अपनी गाड़ी को न्यूट्रल में रखकर पूरा एक्सेलरेटर घुमा दीजिए. गाड़ी की ताकत पता चल जाएगी लेकिन इंजन भी गर्म होगा और धुआं भी निकलेगा. अगर ऐसे गाड़ी को बहुत देर तक चलाएंगे तो जाहिर सी बात है गाड़ी पर असर पड़ेगा. ऐसे ही मामला आईफोन का है. फोन में होती है Lithium-ion बैटरी जो समय के साथ अपनी ताकत खो देती है. 80% तक यानी 3 साल तक तो सब ठीक रहता है. मगर फिर क्षमता कम हो जाती है. नॉर्मल इस्तेमाल में तो कुछ खास पता नहीं चलता मगर अपडेट के समय जब SoC (System on a Chip) को अचानक करंट की ज़रूरत होती है, तो वह पर्याप्त एम्पियर नहीं दे पाती. वोल्टेज कटऑफ से नीचे गिर जाता है, पावर मैनेजमेंट IC प्लग निकाल देता है, और फ़ोन 30% पर बंद हो जाता है. यही है थ्रॉटल जो तभी सक्रिय होता है जब फ़ोन पहली बार अप्रत्याशित रूप से बंद हो जाता है, जैसा आईफोन 6 के केस में हुआ.
अगर आप अपडेट के समय में गौर करेंगे तो फोन में लिखा होता है कि फोन को चार्जिंग पर लगाकर रखो ताकि पावर की कमी न हो. कंपनी खुद मानती है कि अपडेट पर थ्रॉटल होता है, मगर iPhone 6 में ये कुछ ज्यादा हुआ. उसके बाद जो हुआ वो हमने बता दिया. लेकिन तब से गाहे-बगाहे ये बात होती रहती है कि ऐप्पल, पुराने आईफोन को स्लो कर देता है. उसमें मालवेयर घुसेड़ देता है.
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लेकिन यहां एक बात जो ऐप्पल के पक्ष में लट्ठ गाड़कर खड़ी है वो उसके डिवाइस का प्रदर्शन है. आईफोन माने कम से कम पंच वर्षीय योजना. आईफोन लंबे चलते हैं और हैंग नहीं होते. वहीं एंड्रॉयड का फ्लैगशिप भी 3 साल में ठंडा पड़ जाता है. आपके आसपास में कितने ही लोग होंगे जो आईफोन 11 या 12 आज भी चला रहे होंगे. इनकी बैटरी जरूर तीन साल या उसके बाद बदलनी पड़ती है मगर फोन मक्खन चलता है. हां, जो आप पुराने आईफोन के सामने नया आईफोन चलाएंगे तो वो स्लो लगेगा ही. नया चिप, एक्स्ट्रा रैम फास्ट तो होगी ही. खुद कंपनी के सीईओ टिम कुक यूजर्स को हर साल फोन बदलने की सलाह नहीं देते क्योंकि आईफोन लंबा चलता है.
वैसे हम ऐप्पल को कोई क्लीन चिट नहीं दे रहे. हो सकता है कि कंपनी हांडी में एक्स्ट्रा चावल भरने के लिए उनको दबा-दबाकर भर देती हो. लेकिन फिर हमें अपने ऑफिस के नीरज बाबा दिख जाते हैं. 4 साल से आईफोन चला रहे. सोशल वाले परशांत भी तो हैं, चार साल बाद आईफोन बदला है. बिजनेस वाले प्रदीप जी ने तो 8 साल चलाया. खाकसार की माता जी आईफोन 11 चला रही हैं. हर साल अपडेट के बाद वार्षिक बैटरी फुर्र सीजन (Annual Battery Drain Season) पर बात होने लगती है.
क्या ही कहें, बड़ा ग्रे एरिया है.
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