WhatsApp पर जल्द देना पड़ सकता है पैसा, पता है किन-किन फीचर्स की कीमत चुकानी होगी?
WhatsApp की पेरेंट कंपनी मेटा, व्हाट्सऐप का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान (Meta premium subscriptions WhatsApp) लेकर आने वाली है. कई सारे फीचर्स के लिए आपको प्रीमियम देना पड़ेगा.

WhatsApp इस्तेमाल करने का पैसा देना पड़ेगा. ऐसी कोई लाइन पर आपको भरोसा तो होगा नहीं. ठीक बात तो ऐसे पढ़ लीजिए कि WhatsApp के सारे फीचर्स इस्तेमाल करने के लिए पैसा देना पड़ेगा. अब इसमें हो सकता है जैसा कुछ नहीं, क्योंकि यह बात कंफर्म (Meta premium subscriptions WhatsApp) हो गई है. पेरेंट कंपनी मेटा व्हाट्सऐप का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान लेकर आने वाली है. Meta AI के सारे फीचर्स के लिए आपको प्रीमियम देना पड़ेगा. अगर जो आपको लगता है कि चलो कोई दूसरा AI चला लेंगे तो दोस्त स्टीकर्स और थीम के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी.
WhatsApp को पैसा चाहिएकुछ दिनों पहले खबर आई थी कि मेटा WhatsApp और इंस्टाग्राम के लिए पेड सब्सक्रिप्शन की तैयारी कर रही है. अब यह फीचर ऐप के बीटा वर्जन Android 2.26.4.8. में नजर आया है. हालांकि अभी इस फीचर की टेस्टिंग के लिए भी लंबी वेटिंग लिस्ट है मगर देर-सवेर यह रोलआउट होगा ही. अच्छी बात यह है कि इससे ऐप के वर्तमान फीचर्स पर कोई असर नहीं होगा. माने जो फीचर्स हमें मिल रहे हैं वो मिलते रहेंगे.

बुरी बात यह है कि प्रीमियम स्टीकर्स पैक, ऐप थीम, और एक्स्ट्रा चैट पिन करने जैसे फीचर्स के लिए पैसा देना पड़ेगा. मेटा इसके साथ चैट के लिए अलग से रिंगटोन जैसे चीजें भी मुहैया करवा सकती है. इसके साथ मेटा AI का पूरा एक्सेस भी पेड सब्सक्रिप्शन में शामिल होगा. ऐप के आइकन को अपने हिसाब से बदलने का भी जुगाड़ मिलेगा. मेटा अपने AI वीडियो टूल Vibes video generation को भी प्लान के साथ जोड़ सकती है, जो एक शॉर्ट फॉर्म वीडियो टूल है. जाहिर सी बात है कि अब पैसा लेंगे तो कुछ तो देना पड़ेगा. मेटा ने अभी तक इसकी कीमत और सब्सक्रिप्शन के बारे में कुछ भी नहीं बताया है. TechCrunch के मुताबिक मेटा अपने तीनों प्रोडक्ट, फेसबुक, इंस्टा और व्हाट्सऐप के लिए पेड सब्सक्रिप्शन लाने वाली है.
क्या लाने वाली है?पैसे का चक्कर बाबू भईया. कंपनी ने पिछले कुछ सालों में AI प्रोडक्ट पर अरबों रुपये निवेश किए हैं. मसलन AI agents Manus जिसे उसने तकरीबन 18 हजार करोड़ रुपये में खरीदा है. अब इत्ता महंगा सॉफ्टवेयर आपको मुफ़्त में कैसे दे सकते हैं. तो पेड सर्विस बढ़िया उपाय है. वैसे भी कंपनी कई सालों से ऐप से कमाई के रास्ते तलाश रही है.
जैसे हाल ही में स्टेटस पर विज्ञापन का दिखना. क्या कहा, ये कब हुआ. अजी हो गया. अब तो लोकल प्रोडक्ट के विज्ञापन भी दिखने लगे हैं. हालांकि इतने सब के बाद भी मेटा का कहना है कि ऐप के असल यूजर इंटरफेस पर असर नहीं पड़ेगा. ठीक है मान लेते हैं जैसे हमने मान रखा है कि ऐप हमारे निजी डेटा का इस्तेमाल नहीं करता है. हमने मान रखा है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नहीं. 'Take it or leave it' वाला रवैया चलेगा नहीं. समझ ही गए होंगे आप. अगर नहीं समझे तो खबर यह रही.
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