The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Technology
  • What is a zero-day vulnerability? Netflix's new web series is based on this tech glitch

कंप्यूटर चलाने वाले जानें, क्या है Zero Day Vulnerabilities जिस पर नेटफ्लिक्स सीरीज तक बन गई

Netflix की हालिया रिलीज हुई वेब सीरीज Zero Day टेक कंपनियों के सामने आने वाली एक तकनीकी दिक्कत Zero Day Vulnerabilities पर बेस्ड है. Zero Day मतलब वो दिन होता है जब एक कंपनी और उसको सर्विस देने वाली कंपनी को भी पता नहीं चलता कि कुछ गड़बड़ है.

Advertisement
What is a zero-day vulnerability? Netflix's new web series is based on this tech glitch
zero-day vulnerabilities पर तगड़ी वेब सीरीज आई है (तस्वीर: नेटफ्लेक्स)
pic
सूर्यकांत मिश्रा
3 मार्च 2025 (पब्लिश्ड: 05:40 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

साइबर सिक्योरिटी की फील्ड में एक अघोषित नियम है, कि कोई भी सिस्टम फुल-प्रूफ नहीं होता. ऐसा कोई सॉफ्टवेयर बना ही नहीं जिसमें ठगों ने सेंध न लगाई हो. परफेक्ट डिफेंस जैसा कोई मैकेनिज़्म इंटरनेट की दुनिया में होता ही नहीं है. सात तालों के अंदर बंद पासवर्ड एक चाबी से खुल जाता है. अगर अभेद्य किला बना भी लिया तो भी 'Zero Day' होता है. जीरो डे, जब दुनिया की बड़ी से बड़ी टेक कंपनी को भी हवा नहीं लगती कि आखिर हुआ क्या है. शायद इतना पढ़कर आपको लगे कि हम Netflix की वेब सीरीज Zero Day की बात कर रहे हैं.

थोड़ा हां और बाकी ना, क्योंकि बात करने का कारण तो Netflix की हालिया वेब सीरीज Zero Day ही है. वेब सीरीज जो Zero Day Vulnerabilities पर बेस्ड है. आखिर क्या है इस जीरो डे में जो नेटफ्लिक्स ने पूरी वेब सीरीज ही बना डाली?

Zero Day Vulnerabilities

Robert De Niro के लीड रोल वाली इस वेब सीरीज में वो सब मिलेगा जो एक थ्रिलर सीरीज में होता है. एक दिन पूरे अमेरिका का इंटरनेट बंद हो जाता है. कई लोग मारे जाते हैं और हर किसी की स्क्रीन पर एक मैसेज नमूदार होता है- ‘ये आगे भी होगा’. इसके बाद क्या होता है वो आप चिल करते हुए देख लीजिए. अपन वापस आते हैं Zero Day Vulnerabilities पर. 

Image embed

दुनिया की तमाम कंपनियां अपने सिस्टम को सेफ रखने के लिए तमाम जतन करती हैं. फायरवॉल लगाती हैं तो तगड़े एंटी वायरस इंस्टॉल करती हैं. सिस्टम में खामी खोजने के लिए एथिकल हैकर्स को रखती हैं. साइबर हैकर सिस्टम में घुसें उसके पहले खुद सिस्टम में घुसने के हर रास्ते तलाश करती हैं. सिस्टम में बग तलाशने के लिए मोटा इनाम भी देती हैं. 

इतनी सारी मशक्कत इसलिए ताकि समय रहते खामी का पता करके उसको दुरुस्त कर दिया जाए. मसलन, अमुक दिन पर ट्रैफिक ज्यादा रहेगा तो बैक एंड पर एक्स्ट्रा बंदे बिठा दो, या फायरवॉल की एक दीवार और बना दो. आमतौर पर कंपनियां इसमें सफल भी होती हैं. उनको सिस्टम में खामी का पता चल ही जाता है. इसलिए आपने देखा होगा कि जब-तब ऐप्स और वेबसाइट के अपडेट आते रहते हैं.  

Image embed
Zero Day Vulnerabilities

लेकिन सब करने के बाद भी एक भयावह दिन आता है जिसे Zero Day कहते हैं. ये वो दिन होता है जब एक कंपनी और उसको सर्विस देने वाली कंपनी को भी पता नहीं चलता कि कुछ गड़बड़ है. आसान भाषा में कहें तो जैसे आम दिनों में हमें अंदाजा होता है कि पानी की टंकी कितनी देर में भरेगी, मगर किसी दिन जब पानी बहने की आवाज आती है, तब ही पता चलता है. आप तुरंत मोटर बंद करते हैं.

ये भी पढ़ें: ChatGPT देगा पूरे 16 लाख रुपिया, आपको बस ये काम करके दिखाना ...

कुछ ऐसा ही मामला जीरो डे का है. कंपनी को पता तब चलता है जब कांड हो जाता है. मसलन सर्वर डाउन होना या हैक हो जाना. हाल-फिलहाल के सालों में सबसे बड़ा मामला साल 2020 में कोविड के टाइम आया था. दुनिया घर से काम कर रही थी और Zoom ऐप का जमकर इस्तेमाल हो रहा था. ऐसे ही एक Zero Day वाले दिन जूम के 50 करोड़ यूजर्स को दिक्कत हुई. जैसा हमने कहा, पता चलते ही सब दुरुस्त कर लिया गया. मगर कुछ पल के लिए तो कंपनी की जान हलक में आ ही गई थी. 

वैसे जीरो डे से आजतक कोई भयंकर कांड नहीं हुआ है, क्योंकि कंपनियां हाथोहाथ सिक्योरिटी पैच इंस्टॉल करती हैं. मगर ये किसी भी कंपनी के लिए दिक्कत वाली बात होती है. एकदम वैसे ही जैसे मानो टंकी का बहता हुआ पानी कहीं छत पर पड़े गेहूं तक तो नहीं पहुंच रहा. अकेले गूगल ने साल 2024 में इस दिन को 10 बार से ज्यादा देखा. एक बार तो झोल इतना महीन था कि उसे पता ही नहीं चला. पड़ोसी माइक्रोसॉफ्ट ने गूगल को बताया कि टंकी भर गई है. माने दिक्कत तो होती है. सब बता दिया, इसलिए अब ये भी जान लीजिए कि ऐसा होता कैसे है.

Zero Day होता कैसे है?

शतरंज के उदाहरण से समझ लेते हैं. दिमाग के इस खेल में जब एक रोबोट और इंसान खेलते हैं तो लगता है जैसे कि इंसान क्या ही टिक पाएगा. रोबोट तो एक सेकंड में एक अरब चालें सोच लेगा. मगर ऐसा होता नहीं है. शतरंज के सर्वकालिक महान खिलाड़ी Garry Kasparov ने साल 1996 में Deep Blue नाम के सुपर कम्पुटर को 4-2 से पीट दिया था. इसके पीछे सिम्पल सा गणित है. तुम मशीन होकर एक अरब चालें सोच रहे, हम इंसान होकर वो चाल सोच लिए जो मशीन नहीं सोच पाई.

कुछ ऐसा ही होता है Zero Day के साथ. कंपनियां एक अरब तरीके पर काम कर लेती हैं, मगर हैकर उस एक तरीके को खोज लेते हैं जो सिस्टम में सेंध लगा सकता है. यही है Zero Day Vulnerabilities- ‘ये आगे भी होगा’.

वीडियो: छावा के एक्टर विनीत कुमार ने बताया, शाहरुख खान के बंगले Mannat के बाहर क्यों बैठते हैं?

Advertisement

Advertisement

()