नोकिया का 36 किलो का फोन, जिससे प्रेरित होकर मोटोरोला के कर्मचारी ने की थी पहली मोबाइल कॉल
पहले मोबाइल कॉल को पूरे 50 साल हो गए हैं.

अगर मैं कहूं कि आज मोटोरोला ने एक स्मार्टफोन लॉन्च किया तो शायद आपको कुछ अजीब नहीं लगेगा. अब स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी ही तो नए-नए स्मार्टफोन बाजार में उतारेगी ना. लेकिन अगर यही लाइन आज से ठीक 50 साल पहले लिखी गई होती तो लोग बोलते पागल हो गए हो, ये मोबाइल फोन/स्मार्टफोन क्या बला है. हालांकि आज इस लाइन को लिखने का एक कारण यही है. 50 साल पहले 1973 में आज ही के दिन यानी 3 अप्रैल को पहला मोबाइल कॉल हुआ था.
क्या हुआ था?उस ऐतिहासिक दिन मोटोरोला कंपनी के एक कर्मचारी मार्टिन कूपर (Martin Cooper) ने न्यूयॉर्क के अपने ऑफिस के बाहर सड़क पर खड़े होकर न्यू जर्सी में बेल लैब्स (Bell Labs) के हेडक्वॉर्टर में फोन घुमाया. दूसरी तरफ फोन उठाया जोएल एंगेल (Joel Engel) ने और एक सुनहरे अध्याय की शुरुआत हो गई. पहला कॉल तो लग गया, लेकिन इसको आम पब्लिक तक पहुंचने में और दस साल लगे.
कैसे?
वो आगे बताते हैं. पहले जरा चर्चा उस डिवाइस की जो मार्टिन के हाथ में था. आज जो स्मार्टफोन आपकी हथेली में आराम से समा जाता है उससे बिल्कुल हटकर उस समय मोटोरोला के उस डिवाइस का वजन एक किलो से भी ज्यादा था. डिवाइस बन गया, लेकिन आखिर इसकी जरूरत पड़ी क्यों.
36 किलो का कार फोन बना वजहसाल 1947. कंपनी का नाम नोकिया. उसी साल जब हम आजाद होने वाले थे, नोकिया के स्वामित्व वाली अमेरिकी कंपनी बेल लैब्स ने तार वाले फोन से पीछा छुड़ाने का मन बनाया. कंपनी के कर्मचारी इसमें सफल भी हुए और उन्होंने बनाया कार फोन. जैसा नाम वैसा काम. बस्तानुमा एक डिवाइस जो कार में फिट हो जाता था. इसके सहारे चलते-चलते भी कॉल कर सकते थे. पढ़ने में शायद ये थोड़ा आसान लगे, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल उलट. ये डिवाइस 36 किलो वजनी था और एक कॉल भी कई बार घंटों में कनेक्ट होता था. फिर भी इस डिवाइस को अमीरों ने हाथों-हाथ लिया. अमीरों का यही शौक मार्टिन कूपर की प्रेरणा बना.
पहली कॉल प्लस दस सालकूपर और उनकी टीम ने जिस डिवाइस से पहला कॉल किया उसका नाम था DYNATAC 800XI. मोटोरोला और कूपर को इस कमाल के आविष्कार को जमीन पर उतारने में अगले 10 साल और लगे. साल 1983 में सिर्फ DYNATAC के नाम से पहला डिवाइस बाजार में आया. इस बार वजन थोड़ा कम था. 790 ग्राम. आज 100-200 वॉट चार्जिंग स्पीड से स्मार्टफोन सिर्फ मिनटों में चार्ज हो जाते हैं, लेकिन DYNATAC को फुल चार्ज होने में पूरे 10 घंटे लगते थे. इतनी मशक्कत के बाद टॉकटाइम मिलता था सिर्फ 35 मिनट. असल झटका अभी बाकी है. इस डिवाइस की कीमत थी 3990 डॉलर. आज के हिसाब से 3 लाख 28 हजार रुपये. महंगाई वगैरा जोड़कर ज्यादा दिमाग खराब नहीं करते. दाम कितना भी रहा हो, इस डिवाइस को खूब लोकप्रियता मिली.
नोकिया का कहरभले पहला मोबाइल मोटोरोला ने बना लिया हो. लेकिन असल खेल शुरू हुआ अस्सी के दशक के आखिर में जब नोकिया अपने मोबाइल बाजार में लेकर आ गई. तकनीक भी नई और साइज भी छोटा. नोकिया के मोबाइल ने उसके अगले तीन दशकों तक मोबाइल बाजार में एकछत्र राज किया. बीच में साल 1994 में IBM कथित तौर पर पहला स्मार्टफोन लेकर आई और साल 1998 में सीमेंस ने पहला कलर स्क्रीन फोन लॉन्च किया. लेकिन नोकिया पर इसका रत्ती भर भी असर नहीं हुआ. नोकिया के फोन और सांप वाले गेम का जलवा अलग ही कायम रहा. साल 2000 भी मोबाइल बिजनेस के लिए बड़ा पड़ाव बना, जब शार्प ने मोबाइल में कैमरा फिट कर दिया. वैसे कुछ लोग जापानी फोन kyocera VP-210 को भी पहला कैमरा फोन मानते हैं.
मोटोरोला और नोकिया अभी कहांमोटोरोला तो अभी भी मार्केट में बना हुआ है, लेकिन नोकिया ने अपने आप को स्मार्टफोन से बिल्कुल अलग कर लिया है. 2000 के दशक में पहले ब्लैकबेरी ने अपने आप को मजबूती से पेश किया. फिर उसके कुछ साल बाद एंड्रॉयड और आईफोन बाजार में आए. नई तकनीक और प्रतियोगिता से नोकिया मुकाबला नहीं कर पाई. माइक्रोसॉफ्ट भी कंपनी को नहीं बचा पाया. वैसे नोकिया स्मार्टफोन से भले बाहर है, लेकिन टेलीकॉम सेक्टर से नहीं. कुछ सालों में हम 6G की स्पीड पर फर्राटा भरेंगे. हो सकता है उसका फीता नोकिया के हाथों से कटे.
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