पानी में गिर गया है स्मार्टफोन, निकालने के बाद ये तो कतई ना करें
स्मार्टफोन्स को व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के 'ज्ञान' से तो नहीं चलाना चाहिए.
मेरे एक दोस्त हैं. उनका फोन पानी में गिर गया. अब वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी का ज्ञान तो उनके पास भी था. इसलिए उसका पूरा इस्तेमाल करते हुए स्मार्टफोन डाल दिया चावल के डब्बे में. फोन ठीक तो नहीं हुआ, उलटे कई और दिक्कतें हो गईं. ऐसा क्यों हुआ, वो हम आपको बताएंगे. इसके साथ ऐसी और कई बातें जो आपको अपने स्मार्टफोन के साथ नहीं करनी हैं. बोले तो स्मार्टफोन से जुड़े कुछ भ्रम (Myth Busting) तोड़ेंगे.
चावल सिर्फ खाने के लिए हैंये सही है कि चावल पानी सोख लेता है, लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि स्मार्टफोन को उसमें सुखाया जाए. हो सकता है कि फोन का पानी सूख (water-resistant) भी जाए, मतलब जो थोड़ा बहुत हुआ तो. लेकिन इसके साथ फोन में धूल जाने और चावल के दानों के उसके खुले पोर्ट में चले जाने के पूरे चांस हैं. मेरे दोस्त के साथ ऐसा ही हुआ. चार्जिंग पोर्ट में चावल का एक महीन दाना चला गया. लेने के देने पड़ गए उनको.
इसलिए हमारी सलाह होगी कि अगर स्मार्टफोन में पानी चला जाए, तो उसको स्विच ऑफ करके खुले में और हो सके तो धूप में रखिए. थोड़ा बहुत पानी गया होगा तो निकल जाएगा. जो इतने से काम नहीं बने तो सीधे सर्विस सेंटर का रुख कीजिए. वैसे पानी और धूल मतलब आईपी (IP) रेटिंग का क्या गुणा-गणित है, उसके बारे में हमने विस्तार से बताया है.
ओपन ऐप्स पर सर्र-सर्र नहींकिसी भी बात का उदाहरण देते हुए हमेशा कहा जाता है जीरो से स्टार्ट होगा. कभी ये नहीं कहते की तीन से या दस से स्टार्ट होगा. कहने का मतलब, सबसे ज्यादा ताकत लगती है स्टार्ट होने में. स्मार्टफोन ऐप्स के साथ भी ऐसा होता है. जब आप उनको पहली दफा ओपन करते हैं, तब प्रोसेसर से लेकर रैम तक को खूब जोर लगाना पड़ता है. हां, उसके बाद गाड़ी सरपट दौड़ती है. इसलिए घड़ी-घड़ी ऐप्स बंद करना (Backgroud Apps) बंद कीजिए.
आजकल के स्मार्टफोन सच में इतने स्मार्ट हैं कि जब आप ऐप का इस्तेमाल नहीं करते, तब वो उसको थपकी देकर सुला देता है. बोले तो हाइबरनेशन में डाल देता है. ऐसा करने से जब आप ऐप को फिर से इस्तेमाल करते हैं, तो उसको रीस्टार्ट करने में ताकत नहीं लगानी पड़ती. प्रोसेसर और रैम तो ठीक, बैटरी पर भी असर कम पड़ता है.
भयंकर मेगापिक्सल मतलब झमाझम फोटोवैसे तो इसके बारे में काफी कुछ लिखा और बताया जा चुका है. मतलब ये जरूरी नहीं कि 100 मेगापिक्सल (megapixel) के कैमरे से शानदार, जबदस्त और जिन्दाबाद टाइप के फोटो आ ही जाएंगे. अच्छे फोटो के लिए कैमरा लेंस का साइज, अपरचर और सॉफ्टवेयर, सब एक साथ जिम्मेदार होते हैं. ये सब तो ठीक है, लेकिन अब कुछ रियल टाइम में भी पकड़ में आया है. हाल फिलहाल में 200 मेगापिक्सल के एक कैमरे से ली गई फोटो और एक 48 मेगापिक्सल के कैमरे से ली गई फोटो के साइज को चेक किया गया, तो उनमें अंतर नहीं के बराबर था. कहने का मतलब कि सिर्फ भारी भरकम मेगापिक्सल के पीछे मत जाइए. पूरी परफॉर्मेंस देखकर स्मार्टफोन लीजिए.
वीडियो: इन स्मार्टफोन में मिलेगी 5G की सुविधा

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