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1 अप्रैल से पेमेंट करने का तरीका ही बदल जाएगा, अब केवल OTP से काम नहीं चलने वाला

Online Payment: अब एक की जगह दो स्टेप में काम होगा, लेकिन ऐसा होने से आपका पेमेंट पहले से सेफ होगा. हाई वैल्यू वाले लेनदेन पर अतिरिक्त जांच होगी. एक और अच्छी बात इसमें होने वाली है, जो बड़े काम की है.

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24 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 02:01 PM IST)
RBI makes two factor authentication mandatory for all digital payments from April 1 2026
अब लेनदेन इतना आसान नहीं होगा, पूरी जांच होगी! (तस्वीर साभार: दिल्ली पुलिस एक्स)
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1 अप्रैल, 2026 से आपके डिजिटल पेमेंट का तरीका एकदम बदलने वाला है. ऑनलाइन पेमेंट करने में अब थोड़ा टाइम लगेगा. एक की जगह दो स्टेप में काम होगा लेकिन ऐसा होने से आपका पेमेंट पहले से सेफ होगा. हाई वैल्यू वाले लेनदेन पर अतिरिक्त जांच होगी. सबसे अच्छी बात, अगर इन निर्देशों का पालन न करने की वजह से कोई आर्थिक नुकसान होता है तो इश्यूअर यानी बैंक को उसका पूरा मुआवजा ग्राहक को देना होगा.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिजिटल पेमेंट्स को लेकर बनाए गए नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो जाएंगे. पेमेंट करते समय टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन Two-factor authentication (2FA) होगा.

SMS OTP से काम नहीं चलेगा

ऑनलाइन पेमेंट करते समय अभी तक हमारा सिस्टम एसएमएस पर आने वाली ओटीपी पर निर्भर है. लेकिन आगे से इसके साथ यूजर को पासवर्ड, पासफ्रेज, (Passwords or passphrases), पिन (PINs), कार्ड हार्डवेयर (Hardware tokens or cards), सॉफ्टवेयर टोकन (Software-based authentication tokens), फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक (Biometrics such as fingerprints or facial recognition) का भी इस्तेमाल करना होगा. आसान भाषा में समझें तो एसएमएस पर आने वाली ओटीपी के साथ-साथ आपको अपने मोबाइल के पासवर्ड या दूसरे किसी और तरीके से उस लेनदेन को वेरीफाई करना होगा.

अभी तक तो लेनदेन के लिए एसएमएस पर आई ओटीपी डालने से काम हो जाता था. लेकिन अब सेफ्टी की एक और लेयर लगेगी. ऐसा होने से मोबाइल चोरी होने या SIM Swap से होने वाली ठगी पर लगाम लगेगी. अगर लेनदेन हाई वैल्यू वाला है तो बैंक इसके लिए एक्स्ट्रा सेफ्टी रखेगा. माने हो सकता है कि लेनदेन के दौरान सिस्टम आपसे कॉल करके पूछे कि ये पेमेंट आप ही कर रहे हो या नहीं.

RBI ने कहा है कि रिस्क मैनेजमेंट के लिहाज से वित्तीय संस्थान, इवैल्यूएशन के लिए लेनदेन की पहचान कर सकते हैं. ऐसा ट्रांजेक्शन की लोकेशन, यूजर के व्यवहार, डिवाइस की डिटेल और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री जैसे पहलुओं के बेसिस पर किया जा सकता है. माने आपके लेनदेन के तरीकों के हिसाब से सेफ्टी का स्टैंडर्ड सेट होगा.

नया सिस्टम आने से ग्राहकों की मौज होने वाली है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि अगर इन निर्देशों का पालन न करने की वजह से किसी ग्राहक को आर्थिक नुकसान होता है तो इश्यूअर यानी बैंक या संस्थान को उसका पूरा मुआवजा ग्राहक को देना होगा.

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