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ITR में मकान के किराए वाले कागज नहीं लगाए तो 7 साल की जेल? इस वीडियो का सच पता लगा

हम आयकर रिटर्न (ITR) में HRA क्लेम को लेकर चल रहे दावों की बात कर रहे हैं. इनमें ऐसा कहा जा रहा है कि आयकर विभाग नया नियम लाया है. जिसके तहत अब कागज नहीं लगाए तो 200 फीसदी जुर्माना और 7 साल जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी.

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New Income Tax Rules for HRA that everyone you should know: real truth
इनकम टैक्स के दावों की रील का सच
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सूर्यकांत मिश्रा
28 जून 2025 (अपडेटेड: 30 जून 2025, 12:42 PM IST)
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सबसे पहले तो इंस्टाग्राम को दिल से शुक्रिया. फाउंडर Mark Zuckerberg और प्रिंसिपल Adam Mosseri का इंस्टा कॉलेज ज्ञान का बड़ा सोर्स है. हां, ये अलग बात है कि यहां मिलने वाला ज्यादातर ज्ञान अधूरा और फर्जी होता है. ऐसे ही एक ज्ञान की आजकल बाढ़ आई हुई है जिसका संबंध सीधे आपकी इनकम से है. दावों की दौड़ और रीलों की रेल में इनकम टैक्स के नए नियम की बात हो रही है. इसमें पेनाल्टी और सजा का डर दिखाया जा रहा है. अंदाजा आपने लगा ही लिया होगा कि हम बीते वित्तीय वर्ष के आयकर रिटर्न में HRA क्लेम को लेकर चल रहे दावों की बात कर रहे हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि आयकर विभाग ‘नया’ नियम लाया है. इसके तहत अब सबूत वाले कागज नहीं लगाए तो जेल में चक्की पीसिंग. आइए समझ ही लेते हैं कि क्या मामला है?

क्या है सोशल मीडिया का दावा?

सोशल मीडिया पर विशेषकर इंस्टाग्राम पर हर दूसरी फाइनेंस की रील में यही बात बताई जा रही है. कहा जा रहा है कि इनकम टैक्स विभाग इस बार आपके हर क्लेम का प्रूफ मांगेगा. जैसे बीमा पॉलिसी का कागज या मेडिक्लेम पॉलिसी का सबूत. ‘सबूत’ शब्द को थोड़ा और समझ लेते हैं. जब भी आप इनकम टैक्स की डिटेल भरते हैं तो वहां आपको नॉर्मल डिटेल्स ही देनी होती है. जैसे मेडिकल पॉलिसी का प्रीमियम या बीमा पॉलिसी का अमाउन्ट. पॉलिसी के कागजात अपलोड करने को नहीं कहा जाता है. ‘अब करना होगा’ ऐसा कई रील में बताया जा रहा है. लिस्ट भी लगाई जा रही है. यहां तक तो ठीक है मतलब चलो मान लिया. 

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सोशल मीडिया पर कागजात के दावे का स्क्रीन शॉट 

मगर HRA के नाम पर तो सीधे-सीधे डराया जा रहा है. इसमें भी कागज लगाने की बात कही जा रही है. मां के नाम पर या भाई के नाम पर HRA लिया तो ‘200 फीसदी जुर्माना’ और ‘7 साल की सजा’ की बात भी कही जा रही है. और ये सब ऐसे बताया जा रहा है जैसे ये कोई नया नियम है. अब हम बताते क्या सच है मगर मगर जरा HRA समझ लीजिए.

House Rent Allowance (HRA) मतलब किराये में छूट जो आयकर कि धारा Section 10(13A) के तहत दी जाती है. ये होम लोन में मिलने वाली छूट के जैसे ही है. इस छूट के लिए आयकर दाता को किराये के घर का पूरा पता, महीने का किराया जैसी डिटेल देनी होती है. अगर साल भर का किराया 1 लाख से ऊपर है तो किराये की रसीद के साथ मकान मालिक का पैन कार्ड भी चाहिए होगा. 

लेकिन ये सब कहां देना होता है. आपके नियोक्ता को. मतलब आप जहां नौकरी करते हैं वो आपसे ये रसीद मांगते हैं. मांगना बनता भी है. ताकि कोई फर्जीवाड़े की आशंका नहीं रहे. वहां तो आपको मेडिकल और बीमा के डिटेल्स भी देनी होती है. भाई क्यों नहीं देना होगा. सरकार के पास तो कई तरीके हैं आपकी जानकारी को जांचने के. उसके अधिकार की बात है कि वो बीमा कंपनी से पूछ सकती है कि फलां पॉलिसी सही है गलत. प्रीमियम कितना है वगैरा-वगैरा. लेकिन कंपनी के पास ऐसा कुछ नहीं. इसलिए उसे कागज चाहिए होते हैं. आपको लग रहा होगा कि ये सब तो पहले जैसा ही है, तो नया क्या है? अगर हम नौकरी नहीं करते तो क्या हमें पोर्टल पर कागज अपलोड करने हैं? क्या नियोक्ता ये कागज अपलोड करेगा. नहीं ना. हम बताते क्या है.  

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व्यू का चक्कर बाबू भईया

किसी एक ने कुछ कहा और उसकी रील पर आ गए व्यूज. बस फिर क्या. कोई ओर-छोर नहीं. रील बनाए जाओ और व्यूज गिनाए जाओ. कहीं जाने की जरूरत भी नहीं थी, जो अगर इनकम टैक्स का पोर्टल ओपन करके देख लेते. तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कहीं भी किसी भी डिटेल पर डॉक्युमेंट्स लगाने का कोई ऑप्शन है ही नहीं. मतलब कागजात वाली बात तो खत्म ही हो गई.  

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इनकम टैक्स पोर्टल  

अब रही बात HRA क्लेम में मां या भाई के होने की. ये व्यवस्था भी पुरानी है. लेकिन हमें लगा कि कहीं कुछ ऐसा तो नहीं जो हमसे रह गया तो हमने बात की CA Piyush Maheshwari से जो साल 2013 से प्रैक्टिस कर रहे और Financial Management at Vidhyoday Education में प्रोफेसर भी हैं. बकौल पीयूष,

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पीयूष ने 2013 के बजरंग प्रसाद रामधरानी केस का हवाला भी दिया जिसमें परिवार के सदस्य को किराया देने की बात हुई थी. पेनाल्टी और सजा को लेकर उन्होंने बताया,

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कहने का मतलब बेकार में चिंता करने की जरूरत नहीं. आराम से रिटर्न भरिए. तारीख भी 15 सितंबर तक बढ़ गई है. जो आप नए वाले टैक्स रिजीम में हैं तो फिर तो कोई बात ही नहीं. उधर HRA है ही नहीं.

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