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कहां गायब हो गया इतना भारी ब्लैक होल?

वैज्ञानिकों ने इस ब्लैक होल के गायब होने की क्या वजह बताई?

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14 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 14 जनवरी 2021, 06:33 PM IST)
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ब्लैक होल को हिंदी में कृष्ण विविर कहते हैं.
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गुमशुदा की तलाश. एक ब्लैक होल गायब हो गया है. ऐसा अनुमान है कि ये गुमशुदा ब्लैक होल हमारे सूर्य से करोड़ों गुना ज़्यादा भारी है. नासा के पास दो जाबड़ खोजी मशीने हैं. चंद्रा ऐक्स-रे ऑब्ज़र्वेटरी और हबल स्पेस टेलीस्कोप. ये दोनों खोजी इसे ढूंढने में लगे हैं. इसके बावजूद ब्लैक होल का कोई अता-पता नहीं है.
इस ब्लैक होल के गायब होेने से ऐस्ट्रोनॉमर्स (खगोल वैज्ञानिक) हैरान हैं. कुछ वैज्ञानिक ऐक्साइटेड भी हैं. हो सकता है ये कोई नए टाइप की खगोलीय घटना है. ये पूरा मामला क्या है, इसे आसान भाषा में समझेंगे.
बुनियादी बातें समझिए
हमारा सूरज एक तारा है. ऐसे करोड़ों तारों से बने एक मोहल्ले को गैलेक्सी (आकाशगंगा) कहते हैं. गुरुत्वाकर्षण की मदद से एक गैलेक्सी में कई तारे, धूल और गैस आपस में बंधे रहते हैं. हमारा तारा सूरज जिस मोहल्ले में आता है, उसका नाम है मिल्कीवे गैलेक्सी. इस मिल्कीवे गैलेक्सी के केंद्र में एक सुपरमैसिव (भारी-भरकम) ब्लैक होल है.
मिल्की वे गैलेक्सी की ये फोटो एक आर्टिस्ट ने बनाई है. हम इस गैलेक्सी के बाहर नहीं जा पाए. इसलिए इसकी फोटो नहीं खींच पाए.
मिल्की वे गैलेक्सी की ये फोटो एक आर्टिस्ट ने बनाई है. हम इस गैलेक्सी के बाहर नहीं जा पाए. इसलिए इसकी फोटो नहीं खींच पाए.

2020 का फिज़िक्स नोबेल प्राइज़ इसी सुपरमैसिव ब्लैक होल को खोजने के लिए दिया गया. रेनहार्ड गेंजेल और आंद्रिया गेज़ ने हमारी मिल्कीवे गैलेक्सी के केंद्र में ये सुपरमैसिव ब्लैक होल खोजा था.
ब्लैक होल यानी एक ऐसी जगह, जहां का गुरुत्वाकर्षण बहुत ज़्यादा होता है. इतना ज़्यादा कि वहां से कुछ भी बाहर नहीं आ सकता. वहां की ग्रैविटी इतनी स्ट्रॉन्ग होती है कि आसपास की सारी चीज़ें ज़रा सी जगह में सिमट कर रह जाती हैं. इतनी स्ट्रॉन्ग ग्रैविटी से प्रकाश भी नहीं निकल पाता. इसलिए ब्लैक होल्स दिखाई नहीं देते. लेकिन उन्हें डिटेक्ट करने के दूसरे तरीके होते हैं.
लगभग हर बड़ी गैलेक्सी के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है. ये ब्लैक होल हमारे सूर्य से करोड़ों गुना भारी होता है. लेकिन एक बड़ी गैलेक्सी का ब्लैक होल मिसिंग है. ये कौन सी गैलेक्सी है? इसका नाम पता क्या है?
बहती हवा सा था वो...
एबल 2261 नाम का एक गैलेक्सी क्लस्टर है. गैलेक्सी क्लस्टर यानी कई गैलेक्सियों का एक समूह. मोहल्लों से बना शहर. एबल 2261 गैलेक्सी क्लस्टर के केंद्र में एक बहुत बड़ी गैलेक्सी है. इस गैलेक्सी का नाम है A2261-BCG. इसी गैलेक्सी का ब्लैक होल नहीं मिल रहा है. ये गैलेक्सी पृथ्वी से 270 करोड़ लाइट ईयर दूर है.
ये एबल 2261 गैलेक्सी क्लस्टर है. इसमें सेंटर में जो सबसे ज़्यादा चमक रही है वो है गैलेक्सी A2261-BCG.
ये एबल 2261 गैलेक्सी क्लस्टर है. इसमें सेंटर में जो सबसे ज़्यादा चमक रही है वो है गैलेक्सी A2261-BCG.

लाइट ईयर यानी प्रकाश वर्ष. प्रकाश वर्ष में लंबी दूरी मापी जाती है. छोटी दूरी के लिए सेंटीमीटर होता है, उससे बड़ी दूरी के लिए मीटर और किलोमीटर होता है. यूनिवर्स के लेवल पर बहुत लंबी दूरी को मापने के लिए लाइट ईयर का इस्तेमाल किया जाता है. एक लाइट ईयर मतलब जितनी दूरी तय करने में लाइट को एक साल लगता है. इस ब्रह्माण्ड में लाइट की स्पीड सबसे ज़्यादा है. लाइट एक सेकंड में लगभग 3,00,000 किलोमीटर चल लेती है. सोचिए एक साल में लाइट कितनी दूरी तय करेगी? ऐसे 270 करोड़ सालों में लाइट कितनी दूरी तय करेगी? ये गैलेक्सी हमसे उतनी ही दूर है.
इस ब्लैक होल को कैसे खोज रहे हैं वैज्ञानिक? हमारी आंखों को जो दिखाई देता है, वो रोशनी के स्पेक्ट्रम का एक छोटा सा हिस्सा होता है. हमें सिर्फ विज़िबल रेंज की किरणें ही दिखाई देती हैं. एक बड़े मकबूल ‘ऐस्ट्रोशायर’ कह गए हैं - शौक ए दीदार है तो टेलिस्कोप पैदा कर.
नासा के पास एक कमाल का टेलिस्कोप है. इसका नाम है चंद्रा ऐक्सरे ऑब्ज़र्वेटरी. चंद्रा से ब्रह्माण्ड को ऐक्सरे में देखा जा सकता है. ब्रह्माण्ड के बहुत ज़्यादा गर्म इलाकों से निकलने वाली ऐक्सरे किरणें देखना चंद्रा ऑब्ज़र्वेटरी की खासियत है. ब्लैक होल्स के आसपास यही ऐक्सरे किरणें डिटेक्ट की जाती हैं.
नासा की चंद्रा ऐक्सरे ऑब्ज़र्वेटरी का आर्टिस्टिक इम्प्रेशन.
नासा की चंद्रा ऐक्सरे ऑब्ज़र्वेटरी का आर्टिस्टिक इम्प्रेशन.

1999 से 2004 के बीच चंद्रा ने गैलेक्सी A2261-BCG के केंद्र से डेटा निकाला. इस डेटा से वैज्ञानिकों ने एक सुपरमैसिव ब्लैक होल के निशान तलाशने की कोशिश की. उन्होंने एक ऐसा मटेरियल देखना चाहा, जो ब्लैक होल की तरफ गिरने से बहुत ज़्यादा गर्म हो गया हो, और एक्सरे छोड़ रहा हो. लेकिन वो ऐसे किसी सोर्स को नहीं पहचान सके.
कहां गया उसे ढूंढो...
2018 में इसी गैलेक्सी से चंद्रा ने और लंबे समय तक डेटा लिया गया. यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक टीम ने इस डेटा की मदद से वहां ब्लैक होल ढूंढने की कोशिश की. उन्हें भी वहां ब्लैक होल नहीं मिला. तब इस टीम ने ब्लैक होल न मिलने का कारण समझने की कोशिश की. और एक ऐक्सप्लेनेशन दुनिया के सामने रखा. कहा कि एक कारण ये हो सकता है कि इस गैलेक्सी से वो ब्लैक होल इजेक्ट हो गया होगा. यानी अपनी जगह से किसी दूसरी तरफ निकल गया होगा. ऐसा कैसे हो सकता है?
ऐसा तब हो सकता है, जब दो गैलेक्सी मर्ज (विलय) हो जाएं. और उनके साथ उनके ब्लैक होल भी आपस में जा भिड़ें. जब ब्लैक होल्स आपस में जुड़ जाते हैं.
दो ब्लैक होल मिलते हैं, तो ग्रैविटेशनल वेव निकलती हैं.
दो ब्लैक होल मिलते हैं, तो ग्रैविटेशनल वेव निकलती हैं.

हमारे आसपास स्पेस और टाइम का एक जाल बिछा हुआ है. आइंस्टाइन ने बताया था कि ग्रेविटी इसी स्पेसटाइम के कर्व (मुड़ने) का नतीजा है. 1916 में आइंस्टाइन ने ग्रेविटेशनल वेव्स के बारे में भी बताया था. सौ साल बाद 2016 में इन्हीं ग्रैविटेशनल वेव्स की पुष्टि भी हो गई. ये ग्रेविटेशनल वेव्स प्रकाश की गति से चलती हैं. अपने रास्ते में आने वाली किसी भी चीज़ को खींच या दबा सकती हैं.
जब दो ब्लैक होल आपस में जा मिलते हैं, तो एक बड़ा ब्लैक होल बनता है. और साथ में बनती हैं खूब सारी ग्रैविटेशनल वेव्स. अगर ये ग्रैविटेशनल वेव्स किसी एक दिशा में ज़्यादा स्ट्रॉन्ग हों, तो नया वाला ब्लैक होल उसकी उल्टी दिशा में भाग ने लगता है. इसे रीकॉइलिंग ब्लैक होल कहते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिकों को लगता है, कि ये गुमशुदा ब्लैक होल रीकॉइलिंग ब्लैक होल की अवस्था प्राप्त कर चुका है.
अब तक वैज्ञानिकों के पास रीकॉइलिंग ब्लैक होल के कोई प्रमाण नहीं हैं. और ना ही कभी सुपरमैसिव ब्लैक होल को मर्ज होते देखा गया है. अब तक सिर्फ छोटे ब्लैक होल्स के मर्ज होने की पुष्टि हुई है. ये रीकॉइलिंग ब्लैक होल वाला ऐक्सप्लेनेशन सिर्फ एक थ्योरी है.
जेम्स वेव टेलिस्कोप बहुत पहले लॉन्च होने वाला था. लेकिन ये टले ही जा रहा है.
जेम्स वेव टेलिस्कोप बहुत पहले लॉन्च होने वाला था. लेकिन ये टले ही जा रहा है.

अभी दुनिया का सबसे पावरफुल टेलिस्कोप नासा का हबल स्पेस टेलिस्कोप है. 2021 में नासा इससे भी ज़्यादा पावरफुल टेलिस्कोप लॉन्च करने वाला है. इस नए टेलिस्कोप का नाम है जेम्स वेब टेलिस्कोप. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जेम्स वेब टेलिस्कोप से उन्हें बेहतर ऑब्ज़र्वेशन मिलेंगे. और वो इस गुम हुए ब्लैक होल के बारे में कुछ और पता कर पाएंगे.

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