राजधानी एक्सप्रेस देरी से पहुंची तो छूटी फ्लाइट, अब बंदे ने रेलवे से निकलवाए 69 हजार रुपये
राजधानी एक्सप्रेस को कोटा से सुबह 6.55 बजे रवाना होकर दोपहर 12.40 बजे दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन में पहुंचना था. लेकिन लेट पहुंची, राना दंपति की फ्लाइट शाम 6.05 बजे की थी. लेकिन ट्रेन से उतरकर वे जब तक हवाई अड्डा पहुंचे, उनकी फ्लाइट जा चुकी थी. अब रेलवे को 69,000 रुपये का हर्जाना देना होगा.

इंडियन रेलवे की सबसे प्रीमियम ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस (Rajdhani Express) से सफर करें और वो चार घंटे की देरी से अपने गंतव्य पर पहुंचे और उसकी वजह से आपकी फ्लाइट (Missed flight due to Rajdhani delay) भी छूट जाए तो क्या करेंगे. आमतौर पर कुछ भी नहीं क्योंकि मामला तो ‘अब तो आदत सी है मुझको’ वाला हो चुका है. लेकिन कोटा के एक दंपत्ति ने ट्रेन की देरी को और उसकी वजह से हुई आर्थिक और मानसिक परेशानी को गंभीरता से लिया और जिला उपभोक्ता फोरम (Consumer Court) का दरवाजा खटखटाया.
उपभोक्ता फोरम के फैसले के बाद अब रेलवे को 69,000 रुपये का हर्जाना देना होगा. रेलवे ने फैसले के खिलाफ स्टेट कंज्यूमर फोरम में भी अपील की. वहां से भी रेलवे को हार मिली है. पूरा केस जान लीजिए. आपके भी काम आएगा.
रेलवे ने फ्लाइट छुड़वा दीकोटा में रहने वाले अनिल कुमार राना और उनकी पत्नी अनीता राना ने 17 दिसंबर 2017 के लिए दिल्ली से त्रिवेंद्रम रूट पर एयर इंडिया की फ्लाइट बुक करायी थी. यह टिकट 9 नवंबर 2017 को ही बुक किया गया था जिसके लिए उन्होंने 33,929 रुपये का भुगतान किया था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट पकड़ने के लिए दंपति ने 17 दिसंबर की सुबह कोटा से दिल्ली आने के लिए रेलवे की प्रीमियम ट्रेन नंबर 12431,राजधानी एक्सप्रेस में टिकट बुक कराया.
राजधानी एक्सप्रेस को कोटा से सुबह 6.55 बजे रवाना होकर दोपहर 12.40 बजे दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन में पहुंचना था. राना दंपति की फ्लाइट शाम 6.05 बजे की थी. माने उनके पास पर्याप्त समय था. लेकिन यह ट्रेन चार घंटे से भी ज्यादा देरी से, शाम में 4.50 बजे निजामुद्दीन पहुंची. ट्रेन से उतर कर वे जब तक हवाई अड्डा पहुंचे, उनकी फ्लाइट जा चुकी थी.
दोगुना लगान देकर पहुंचे केरलफ्लाइट छूटने पर दंपति को रात होटल में गुजारनी पड़ी. अगले दिन टिकट बुक कराया जो कि 72,930 रुपये का पड़ा. दोगुने से भी ज्यादा. दिमाग खराब हुआ सो अलग. कोटा वापस आने के बाद राना ने रेलवे को मार्च और सितंबर 2018 में लिखित में नुकसान की भरपाई की मांग की लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली. आजिज आकर उन्होंने रेलवे को दिसंबर 2018 में लीगल नोटिस भेजा. इसके बाद कोटा के कंज्यूमर फोरम (District consumer commission) में केस दर्ज किया.
रेलवे ने कहा देर करता नहीं देर हो जाती हैरेलवे ने इस केस का विरोध किया. उसका कहना था कि ऑपरेशनल, टेक्निकल और सेफ्टी कारणों से ट्रेन लेट हो जाती है. रेलवे के मुताबिक इसमें 'सेवा में कमी' का कोई मामला नहीं है. लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना. कोर्ट ने अगस्त 2023 में रेलवे को एयर टिकट पर किए गए 39,001 रुपये के अतिरिक्त खर्च की भरपायी करने को कहा. इसके अलावा उत्पीड़न और मानसिक अशांति के लिए 20,000 रुपये, होटल खर्च के लिए 5,000 रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 5,000 रुपये के भुगतान का आदेश दिया. कुल हुआ 69,001 रुपये का फटका लगा.
रेलवे ने इसकी अपील राज्य उपभोक्ता फोरम में की लेकिन न्यायिक सदस्य निर्मल सिंह मेडवाल और सदस्य करुणा जैन ने पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) की अपील को खारिज कर दिया. अब रेलवे 69 हजार का हर्जाना भरेगा.
वीडियो: राजधानी: अमित शाह का प्लान '362' क्या है?

