घर बैठे फोन में मिलेगा बैटरी बदलने का जुगाड़, सालों तक स्पेयर पार्ट्स की भी रहेगी व्यवस्था
2027 से (European Union) यूरोपीय संघ में बेचे जाने वाले स्मार्टफोन में यूजर द्वारा बदली (replaceable batteries by 2027 ) जा सकने वाली बैटरी होना अनिवार्य होगा. इसके साथ मेकर्स को मॉडल जारी होने के बाद कम से कम 7 वर्षों तक स्पेयर पार्ट्स और रिपेयर मैनुअल भी उपलब्ध कराने होंगे.

कई स्मार्टफोन की बैटरी थोड़े दिनों में खराब हो जाती है. यह एक नॉर्मल प्रोसेस है. समय के साथ बैटरी का दम निकल जाता है मगर इस बैटरी को बदलवाने में स्मार्टफोन यूजर्स भी बेदम हो जाते हैं. ऐसा अक्सर इसलिए होता है, क्योंकि आजकल के फोन का बैक पैनल ओपन नहीं होता. बैटरी रिप्लेस करवाने के लिए सर्विस सेंटर जाना ही पड़ता है. लेकिन 2027 से ऐसा नहीं होगा क्योंकि आपको फोन में रिप्लेसबल बैटरी (replaceable batteries by 2027) का ऑप्शन मिलेगा. एकदम पहले के जैसे. ढक्कन खोलो और बैटरी बदल लो फिर वो फोन Apple का हो या Samsung का. OnePlus का हो या vivo.
2027 से (European Union) यूरोपीय संघ में बेचे जाने वाले स्मार्टफोन में यूजर्स खुद बैटरी बदल सकेंगे. कंपनियों के लिए उपभोक्ताओं को यह फीचर देना अनिवार्य होगा. इसके साथ मेकर्स को मॉडल जारी होने के बाद कम से कम 7 वर्षों तक स्पेयर पार्ट्स और रिपेयर मैनुअल भी उपलब्ध कराने होंगे.
यूरोपीय संघ से हमें क्या फायदाअजी फायदा ही फायदा ही है. आज की तारीख में फोन से लेकर लैपटॉप और हेडफोन्स में जो टाइप-सी चार्जर मिलता है, वो इसी यूरोपियन यूनियन की देन है. इनके दवाब में आकर ऐप्पल जैसी कंपनी को भी झुकना पड़ा वरना iPhone में लाइटनिंग केबल ही मिलती रहती. यही यूनियन अब नया नियम लेकर आया है जिसके बाद कंपनियों को फोन का ढक्कन खोलना पड़ेगा.
फोन में आसानी से बदली जाने वाली बैटरी देना होगी. इसके साथ डिवाइस के लिए 7 साल तक स्पेयर पार्ट्स और रिपेयर मैनुअल की सुविधा भी देनी होगी. जाहिर सी बात है ऐसा होने से आप फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल कर पाएंगे. पुराना फोन है इसलिए स्पेयर पार्ट्स नहीं है, ऐसा बोलकर कंपनियां अपना पल्ला नहीं झाड़ पाएंगी. रिपेयर मैनुअल देने का मतलब है कि कंपनियों को बताना होगा कि फोन को घर पर कैसे रिपेयर किया जा सकता है.
यूरोपीय यूनियन के नए नियम का फायदा दुनिया के बाकी देशों को भी होगा क्योंकि ज्यादातर कंपनियों का प्रोडक्शन कुछ सीमित जगहों पर ही होता है. हर देश के हिसाब से प्रोडक्ट बनाना बड़ी चुनौती है. ऐसे में जब खुले बैक पैनल वाला फोन यूरोप के लिए बनेगा तो वो दूसरे देशों में भी जाएगा. साल 2025 से इस नियम का पहला फेज स्टार्ट हो चुका है. 2027 से इसका दूसरा फेज स्टार्ट होगा. माने जल्द ही फोन रिपेयर की सबसे बड़ी दिक्कत दूर हो जाएगी.
धूल-पानी का क्या करेंगेफोन के बैक पैनल को सील-बंद करने के पीछे आईपी रेटिंग्स का हवाला दिया जाता है. अब पैनल ओपन होगा तो क्या फोन वाटर रजिसटेंट नहीं रहेंगे. एकदम रहेंगे. कंपनियां अपने मैकेनिज़्म में बदलाव करेंगी. दो साल से CMF फोन ऐसा करके दिखा रहा है. बैक पैनल ओपन है, बैटरी दिखती है मगर धूल-पानी से बचने का प्रबंध किया गया है.
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