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  • India to ban Chinese internet-connected CCTV cameras from April 2026, domestic brands set to gain

TP-Link, Hikvision जैसी चीनी कंपनियों के कैमरे हो सकते हैं बैन, डेटा चीन पहुंचा रहे?

केंद्र सरकार कैमरा और सर्विलांस इंडस्ट्री (CCTV) से चीन को बाहर कर सकती (Chinese CCTV ban) है. सरकार इंटरनेट कनेक्टेड सर्विलांस सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त है. अधिकारी इन कंपनियों के प्रोडक्ट के साथ-साथ चीनी चिपसेट का इस्तेमाल करने वाले किसी भी उपकरण को मंजूरी देने से इनकार कर रहे हैं.

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30 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 02:21 PM IST)
Chinese CCTV ban
चीनी CCTV पर बैन?
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Hikvision, Dahua, और TP-Link जैसी कंपनियों के कैमरों पर 1 अप्रैल 2026 से बैन लग (Chinese CCTV ban) सकता है. सरकार चायनीज CCTV कंपनियों के इंटरनेट कनेक्टेड कैमरा डिवाइस और हार्डवेयर को बैन कर सकती है. 1 अप्रैल से मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन (STQC) नियम लागू होने जा रहा है, जिसके तहत भारत में सीसीटीवी उत्पादों की बिक्री से पहले अनिवार्य अप्रूवल जरूरी होगा.

सरकार इंटरनेट कनेक्टेड सर्विलांस सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त है. Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी इन कंपनियों के प्रोडक्ट के साथ-साथ चीनी चिपसेट का इस्तेमाल करने वाले किसी भी उपकरण को मंजूरी देने से इनकार कर रहे हैं.

चीनी कंपनियों का दबदबा खत्म होगा

इस प्रतिबंध से चीनी कंपनियों को बड़ा झटका लगेगा, जिन्होंने कभी देश में इस क्षेत्र पर अपना दबदबा बनाए रखा था. पिछले साल तक, देश में सीसीटीवी की कुल बिक्री में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई थी. लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के 2024 के नियमों के लागू होने से इनका खेल खराब हो गया है.

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने अप्रैल 2024 में सीटीवी कैमरों के Essential Requirements (ER) नियमों में बदलाव किया था. इन नियमों के तहत निर्माताओं को डिवाइस में लगे चिपसेट (SoC) के असली देश की जानकारी देना अनिवार्य है. कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उपकरणों का परीक्षण उन सभी खामियों (vulnerabilities) के लिए किया गया हो जिनकी वजह से ऐसे डिवाइस का रिमोट एक्सेस किसी को भी मिल सकता है.

सरकार की सबसे बड़ी चिंता डाटा की सुरक्षा है. कैमरे संवेदनशील स्थानों पर लगाए जाते हैं, और सरकार नहीं चाहती कि ऐसे उपकरण उपयोग में आएं, जिनसे डेटा लीक हो या गलत हाथों में चला जाए. सरकार डेटा लीक के सारे बैकडोर’ (गुप्त रास्तों) को बंद करना चाहती है. Essential Requirements (ER) नियमों को लागू करने के लिए सरकार ने 2 साल का टाइम दिया था जिसकी टाइम लिमिट 31 मार्च 2026 को खत्म हो रही है.

ऐसे में चीनी कंपनियों की आंख बंद हो सकती है. हालांकि इससे ग्राहकों को कोई बड़ी दिक्कत नहीं आने वाली क्योंकि घरेलू प्लेयर भी तेजी से इस मार्केट में अपनी जगह बना रहे हैं. भारतीय ब्रांड जैसे CP Plus, Qubo, Prama, Matrix, Sparsh ने बीते कुछ सालों में अपनी सप्लाई चैन को बड़ा किया है.

इन कंपनियों ने चीनी हार्डवेयर और चिपसेट पर अपनी निर्भरता एकदम कम कर दी है. ये सभी ब्रांड चिपसेट के लिए ताइवान का रुख कर रहे हैं और डिवाइस के firmware माने सॉफ्टवेयर सिस्टम को भी इंडिया में ही सेट किया है. प्रीमियम सेगमेंट में भी Bosch और Honeywell जैसी कंपनियों का कब्जा है. 

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