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Where is my Train ऐप गाड़ी का सटीक स्टेटस कैसे बताता है? न इंटरनेट होता है न GPS

आप स्टेशन पर हैं या फिर आपको अपनी ट्रेन की पल-पल की जानकारी चाहिए तो फिर दूसरे ऐप्स, मसलन ‘Where is my train’ का इस्तेमाल करना ही पड़ता है. लेकिन कभी आपके दिमाग में ये सवाल आया कि ‘रेल’ चलते ही इस ऐप को कैसे पता चल जाता है कि ट्रेन है किधर.

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8 मई 2026 (अपडेटेड: 8 मई 2026, 06:27 PM IST)
Where is my train
Where is my train काम कैसे करता है. (तस्वीर- Unsplash.com)
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Apple के iOS और गूगल के प्ले स्टोर में करोड़ों ऐप्स हैं. कई ऐप्स से आपको लव होगा तो कई से हेट भी. कई से लव-हेट वाला रिलेशन भी होगा. मगर एक ऐप ऐसा है जिससे हर किसी को प्रेम ही होगा. आप चाहे आईफोन यूजर हों या एंड्रॉयड चलाते हों, इस ऐप को आप चलाते होंगे और इससे कोई गिला-शिकवा भी नहीं रखते होंगे. ऐप का नाम- Where is my Train. क्यों ठीक कहा ना! प्ले स्टोर पर इसके 50 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हैं. iPhone के लिए भी. लेकिन आज हम इसकी बात क्यों कर रहे?

बात ऐप की नहीं बल्कि इसके काम करने की तकनीक पर करेंगे. आखिर कैसे बिना इंटरनेट, नेटवर्क और जीपीएस के Where is my Train आपकी ट्रेन को ढूंढ लेता है. इस ऐप को कैसे पता चल जाता है कि ट्रेन है किधर? हम बताते.

Where is my Train और गूगल कनेक्शन  

इसके पीछे की तकनीक बताएंगे, मगर पहले इसके डेवलपर्स और गूगल कनेक्शन से रूबरू हो लेते हैं. अहमद निजाम मोहउद्दीन और अरुण कुमार नागराजन ने इस ऐप को बनाया था. दोनों Sigmoid lab के फाउंडर हैं. इन्होंने साल 2016 में इस ऐप को बनाया जिसे 2018 में गूगल ने 300 करोड़ रुपये में खरीद लिया. बताने का मकसद इतना कि ऐप भारतीय इंजीनियरों ने बनाया है.

काम कैसे करता है?

Where is my Train आपके और दूसरे मोबाइल के नेटवर्क, इंटरनेट और जीपीएस से ज्यादा मोबाइल टावर की लोकेशन पर काम करता है. जंगल से या टनल में से गुजरते समय आपके मोबाइल में सिग्नल भले नहीं आए, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वहां टावर नहीं होगा. एक की जगह थोड़ी-थोड़ी दूर पर कई टावर होते हैं और ऐसे हर टावर का एक यूनीक आईडी होता है. टावर की यूनीक आईडी को ऐप के सिस्टम में फिट किया गया है. ऐप इसकी लोकेशन के बेस पर ट्रेन की लोकेशन आपको बताता है.

Indian Rail Navigator (IRN) से दोस्ती

Indian Rail Navigator (IRN) या कहें Real Time Train Information System एक डिवाइस है जो लोको पायलट के केबिन में लगा होता है. ये छोटा सा डिवाइस terrestrial network से जुड़ा होता है. ये रेलवे का खुद का नेटवर्क है जो रेडियो सिग्नल का इस्तेमाल करके संपर्क बनाता है. बताने की जरूरत नहीं कि इस डिवाइस का एक्सेस सिर्फ लोको पायलट के पास ही होता है. 

वैसे तो IRN का असल काम रेलवे को ट्रेन की रियल टाइम लोकेशन बताना है, मगर इसी का एक एक्सेस Where is my train से लेकर National Train Enquiry System के पास होता है. ये एक्सेस बाकायदा प्रोसेस फॉलो करके मिलता है. तब जाकर हमें अपनी ट्रेन की रियल टाइम लोकेशन मिलती है.

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