मर्डर केस में मिले एक सिम कार्ड ने किसान की जिंदगी 'नरक' बना दी, निर्दोष साबित होने में 2 साल लग गए
कर्नाटक का ये केस ऐसे कई केसों की बानगी है जिसमें फर्जी दस्तावेज बनाकर सिम खरीदा जाता है और उसका इस्तेमाल हर किस्म के अपराध में होता है. आपके साथ ऐसा नहीं हो उसके लिए आपको इस केस को समझना चाहिए.

कर्नाटक के बेंगलुरू में 18 सितंबर, 2024 को एक मर्डर होता है. 23 साल के रेवंत कुमार (Revant Kumar) का शव बागुलूर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में मिला था. शव पर चाकू के कई घाव थे. पुलिस को जांच में एक मोबाइल नंबर मिलता है जिसके बाद होसाकोटे शहर के एक 36 वर्षीय किसान एलएस पुनीत पर इस हत्या का शक होता है, उन्हें संदिग्ध मानकर जांच शुरू हो जाती है. लेकिन किसान ऐसे किसी मोबाइल नंबर के अपने पास होने से इनकार करता है. जांच में पता चलता है कि मोबाइल नंबर लगभग एक दशक पहले उसके नाम पर जाली पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके लिया गया था.
स्टोरी तो यहीं खत्म हुई सी लगती है मगर ऐसा है नहीं. कर्नाटक का ये केस ऐसे कई केसों की बानगी है जिसमें फर्जी दस्तावेज बनाकर सिम खरीदा जाता है और उसका इस्तेमाल हर किस्म के अपराध में होता है. आपके साथ ऐसा नहीं हो उसके लिए आपको इस केस को समझना चाहिए.
वोटर आईडी से छेड़छाड़पुलिस ने पुनीत को आगे की जांच के लिए 2 मई को असिस्टेंट कमिश्नर कार्यालय में फिर से तलब किया. रिकॉर्ड की जांच और उससे पूछताछ के बाद, जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर यह निष्कर्ष निकाला कि उसका सिम कार्ड या हत्या के मामले से कोई संबंध नहीं है और उसे क्लीन चिट दे दी. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इसके बाद किसान एलएस पुनीत ने वर्थुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनके मतदाता पहचान पत्र का दुरुपयोग करके धोखाधड़ी से सिम कार्ड प्राप्त किया, जिससे जांचकर्ताओं को गलती से इस मामले में उनकी संलिप्तता का संदेह हुआ.
पुलिस के मुताबिक पुनीत के वोटर आईडी कार्ड में दूसरा फोटो लगाकर जनवरी 2015 में सरजापुरा की एक मोबाइल शॉप से सिम खरीदा गया था. पुनीत को क्लीन चिट मिल गई है लेकिन मर्डर के केस में नाम आने के बाद उनके ऊपर क्या बीती होगी, उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. लेकिन ऐसा कुछ आपके साथ नहीं हो उसके लिए सावधानी बरतना बहुत जरूरी है.
# बेसिक सी बात है कि अपने दस्तावेज सुरक्षित रखें. आजकल पहचान के लिए आधार का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है इसलिए अपने बायोमेट्रिक लॉक करके रखें. न्यू आधार ऐप में इसका ऑप्शन होम पेज पर मिल जाता है.
# रोड पर टेंट लगाकर सिम बेचने वालों से दूर रहें. गली के कोने में जहां किसी की नजर नहीं पड़ती, वहां की शॉप से भी सिम नहीं खरीदना है. ऐसी जगहों पर जानबूझकर आपके आधार को बार-बार इस्तेमाल करके सिम रिलीज करवा लिया जाता है और फिर उसे अपराधियों को बेचा जाता है.
# आपके नाम पर कितने सिम हैं, इसका भी पता होना बहुत जरूरी है. इसके लिए आपको संचार साथी ऐप का इस्तेमाल करना होगा. आप इस ऐप की मदद से ऐसा सिम बंद भी करवा सकते हैं जो आप इस्तेमाल नहीं करते लेकिन वो आपके नाम पर रजिस्टर हैं. सिम चेक करने की प्रोसेस ये रही.

# संचार साथी ऐप में आपको होम पेज पर ही Know Mobile Connections in Your Name का ऑप्शन नजर आएगा.
# यहां अपना मोबाइल नंबर और ओटीपी डालते ही आपको स्क्रीन पर आपके नाम के सारे मोबाइल नंबर नजर आ जाएंगे.
# ध्यान से देख लीजिए, अगर कोई नंबर आप इस्तेमाल नहीं करते तो यहीं से उसे बंद करने का प्रोसेस तत्काल स्टार्ट कर दीजिए.
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