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यूपी के आसमान में फैली 'दहशत', एलन मस्क का कनेक्शन निकला

दिन में कैसी दिखती है ये उड़ती हुई लाइट!

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elon musk star link satellite behind light in utter pradesh sky
स्टारलिंक सैटलाइट आसमान से नजर आते हैं. (image-india today)
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सूर्यकांत मिश्रा
13 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 13 सितंबर 2022, 08:48 PM IST)
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यूपी से  एक वीडियो वायरल हुआ. लखनऊ के आसपास शूट हुआ था 12 सितंबर 2022 की रात. आसमान में एक लाइन से बत्तियां जलती दिखाई दे रही थीं. लोगों ने शूट किया. इंटरनेट पर वायरल कराने का काम कराया गया. 

फिर ऐसा ही एक वीडियो आया लखीमपुर खीरी से. सेम. आसमान में बत्ती जल रही थी. लग रहा था किसी ने झालर टांक दिया हो. लोगों ने अंदाज लगाया. कोई अपने कयास में मुंहनोचवा भी कह गया. लेकिन ये था एलन मस्क का सैटलाइट स्टारलिंक. सीधे अंतरिक्ष से इंटरनेट कनेक्शन देने वाला उपग्रह.

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क्या है आखिर ये स्टारलिंक?

आसमान से कैसे मिलेगा इंटरनेट? 

स्टार लिंक सैटलाइट के एक बड़े नेटवर्क की मदद से इंटरनेट सेवा देता है, मकसद है दूर-दराज़ के इलाकों को तेज़ इंटरनेट से जोड़ना. सैटलाइट इंटरनेट मतलब आसमान में किसी बड़े से गुब्बारे से या किसी बहुत बड़े टावर से एक बड़े एरिया को इंटरनेट प्रदान करना. सैटलाइट क्या चीज है तो अंतरिक्ष में चक्कर लगाने वाले वो डिवाइस जो मौसम की जानकारी से लेकर लाइव प्रसारण तक के काम आते हैं. 

अब मिलेगा कैसे इंटरनेट? सर्विस प्रोवायडर (ISP) जो होता है, वो सिग्नल भेजता है सैटलाइट को. और वहां से डिश एंटीना के जरिए वो आप तक पहुंच जाता है. एंटीना जुड़ा होता है राउटर से. राउटर जुड़ा होता है बिजली से और फेंकता है वाईफ़ाई. 

क्या फायदा है?

सुदूर गांवों में इंटरनेट पहुंच सकेगा आसानी से. सैटलाइट के इस्तेमाल से आप पहाड़ों और रेगिस्तानों तक इंटरनेट पहुंचा सकते हैं. झरने के कोने से लेकर घाटी की गहराई में भी कच्चा बादाम देखकर मूड जम जाएगा. ये ज़मीन पर एक बड़े इन्फ़्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत को ख़त्म कर देगा, हमें केबल और लंबे पोल की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. इनके सिग्नल को जाम नहीं किया जा सकता है. खबर बताती है कि इससे इंटरनेट कनेक्शन को सेट करने में लगता है बस 15 मिनट. यो.

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स्टार लिंक एंटीना (image-starlink)
कैसा दिखता है दिन में?

पतंग देखे हैं उड़ता हुआ? कई लोग पतंग में बहुत चमकदार पूंछ लगा देते हैं. झलरी-चमकी युक्त. ये थोड़ा थोड़ा वैसा ही दिखता है.

ये वीडियो देखिए थोड़ा. 

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अब आप सोच रहे हैं कि उपग्रह है तो बहुत ऊंचा उड़ता होगा, इतना नीचे कैसे दिख रहा है? 

तो जो ऑर्बिट होता है, यानी कक्षा, यानी वो परिधि, यानी वो चक्कर जिसमें ये सैटेलाइट पृथ्वी का चक्कर काटते हैं, तो इस उपग्रह का ऑर्बिट बहुत कम है.  धरती से सिर्फ  550 से 570 किलोमीटर की ऊंचाई पर. आम तौर पर सैटेलाइट कितने ऊपर उड़ते हैं? जमीन से करीब 22000 मील की ऊंचाई पर. मतलब एलन मस्क वाला एकदम बादल के नीचे उड़ रहा है.

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स्टारलिंक आसमान में नजर आते हैं (image-starlink)

अब रात में धरती की दूसरी ओर से सूरज का रोशनी पड़ती है तो चमकते हैं, इसलिए जलते हुए बल्ब की तरह भी दिखते हैं.

भारत में कैसे मिलेगा कनेक्शन?

नहीं मिलेगा कनेक्शन. एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने तो इंडिया में इसी सर्विस के लिए बुकिंग भी ले ली थी, लेकिन परमिशन नहीं मिलने के कारण प्लान पर ब्रेक लग गया. 

हालांकि कंपनी का कहना है 36 देशों में कि उनके 4 लाख से ज्यादा यूजर हैं. इसमें ज़्यादातर नॉर्थ अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया और एशिया में हैं. रूस-यूक्रेन वार के दौरान एलन मस्क ने रूसी आक्रमण के तुरंत बाद स्टारलिंक की सुविधा यूक्रेन में पहुंचाई. 

क़रीब 15 हजार स्टारलिंक के डिश और राउटर यूक्रेन में रातों-रात सेट किए गए. Google, Facebook, Amazon और Jio भी इसमें बड़ा भविष्य देख रही हैं. 

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