iPhone को एंड्रॉयड केबल से चार्ज किया तो फोन का खेल खत्म? सच ये है
iPhone को एंड्रॉयड वाली केबल से चार्ज किया तो फोन खराब (iPhone charging throug android cable) हो जाएगा. एंड्रॉयड वाली केबल में पिन होती हैं जो आईफोन को खराब कर देती हैं. ऐसा वाला ज्ञान आजकल रीलबाजी में खूब बंट रहा है. बड़ी मुश्किल से तो Apple ने आईफोन में टाइप-सी पोर्ट दिया. अब यह ज्ञान आ गया. क्या करें?

Android वाली केबल से iPhone चार्ज मत करना, फोन खराब (iPhone charging throug android cable) हो जाएगा. एंड्रॉयड वाली केबल में पिन होती हैं जबकि आईफोन वाली केबल प्लेन होती है. एंड्रॉयड वाली केबल आईफोन में खोंसी तो ये पिन उसे खराब कर देगी.
ऐसा वाला ज्ञान आजकल रीलबाजी में खूब बंट रहा है. एंड्रॉयड वाली Type-C केबल को आईफोन के लिए खराब बताया जा रहा है. अब इसके आगे जो लिखना है, वो तो अपन लिखेंगे ही. मगर पहले वो लिखेंगे जो सबसे जरूरी है.
कौन हैं ये लोग! कहां से आते हैं! कहां से खरीदते हैं ऐसी बकवास डिक्शनरी? बड़ी मुश्किल से तो Apple ने आईफोन में टाइप-सी पोर्ट दिया. अलग-अलग केबल रखने की झंझट खत्म हुई. मगर अब यह वाला ज्ञान.
टाइप-सी पोर्ट समझ लीजिएवैसे तो एक लाइन का जवाब यह है की आईफोन का टाइप-सी और एंड्रॉयड का टाइप-सी पोर्ट एक ही है. ऐसा इसलिए क्योंकि टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट एक थर्ड-पार्टी तकनीक है. इसे एंड्रॉयड या ऐप्पल ने नहीं बनाया है. फोन में ऐसी कई तकनीक इस्तेमाल होती हैं, जैसे ब्लूटूथ, वाईफाई वगैरा, जिनको किसी और ने डेवलप किया होता है. इनके फिक्स स्टैंडर्ड होते हैं.
टाइप-सी को किसी एक कंपनी ने नहीं बनाया है. इसके पीछे 700 से ज़्यादा कंपनियां हैं, जिनमें ऐप्पल, माइक्रोसॉफ़्ट, सैमसंग, एचपी, इंटेल और डेल आदि शामिल हैं. इन कंपनियों ने मिलकर USB Implementers Forum (USB-IF) नाम का एक संगठन बनाया, जिसने टाइप-सी कनेक्टर को डेवलेप और सर्टिफ़ाई किया.
आप कहोगे ऐप्पल ने बनाया मगर लगाया क्यों नहीं.
टाइप-सी पोर्ट को सबसे पहले ऐप्पल ने ही लगाया था. 2015 में आए हुए 12-इंच वाले मैकबुक में. आईफोन में बस लगाने में बहुत देरी की.

इसलिए इनको कोई भी इस्तेमाल करे, कोई फर्क नहीं पड़ता. टाइप-सी चार्जिंग की एक यूनिवर्सल तकनीक है. जिसका इस्तेमाल फोन, हेडफोन से लेकर कई डिवाइस में होता है. एक टाइप की केबल होने से तारों का जंजाल खत्म हो गया. इसलिए आईफोन में एंड्रॉयड की केबल लगाइए या एंड्रॉयड में आईफोन की. कोई चिंता नहीं. आपकी केबल जितनी पावर सपोर्ट करती है, उतनी स्पीड से फोन चार्ज होगा. बस एक बात का ख्याल रखें. केबल हमेशा अच्छे ब्रांड की होनी चाहिए. पता है-पता है, आप कहोगे वो पिन वाला चक्कर क्या है. बताते हैं.
Pin को ‘Unpin’ करते हैंबाबू भईया पिन तो आईफोन के साथ आई केबल में भी होती हैं. मगर बहुत कम, इसलिए नजर नहीं आती हैं. जबकि एंड्रॉयड वाली केबल में 22 तक छोटी-छोटी पिन हो सकती हैं. जैसा हमने बताया कि इसे कई कंपनियों ने मिलकर बनाया है तो सब अपने हिसाब से उसमें थोड़े बहुत बदलाव कर लेती हैं. ऐप्पल तो टाइप-सी केबल देना ही नहीं चाहता था. इसलिए उसने जो केबल दी है वो बस चार्ज करती है. डेटा ट्रांसफर भी 48Mb/s पर होता है. माने बहुत थकी स्पीड से.
अब जरा जान लीजिए कि ज्यादा पिन वाली एंड्रॉयड वाली केबल क्या कर सकती है. डेटा ट्रांसफर 480Mb/s पर हो सकता है. फोन को केबल के साथ अगर मॉनिटर से कनेक्ट करेंगे तो आउटपुट मिलेगा जो आईफोन वाली केबल में नहीं होता है. एंड्रॉयड वाली केबल को अगर SSD (स्टोरेज डिवाइस) से कनेक्ट करेंगे तो ProRes में वीडियो शूट करने का ऑप्शन मिलेगा. माने एकदम हाई क्वालिटी में काम होगा. आईफोन वाली केबल में ऐसा कोई जुगाड़ नहीं होता है.

एंड्रॉयड वाली केबल super speed usb data (sdp) को सपोर्ट करती है. USB 3.2 से लेकर USB 4 को सपोर्ट करती है. वहीं आईफोन वाली केबल सिर्फ USB 2.0 सपोर्ट करती है. माने चार्ज कर लो बस. USB 2.0 माइक्रोफोन, कीबोर्ड, माइक जैसे छोटे डिवाइस में इस्तेमाल होता है.
एक दिलचस्प बात और बताते हैं. आईफोन 15-16-17 के प्रो मॉडल USB 3.2 Gen 2 सपोर्ट करते हैं. मगर उसके लिए आपको केबल अलग से लेनी होगी. ऐप्पल खुद कहता है कि आप कोई सी भी थर्ड पार्टी केबल इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके आगे क्या ही कहें. तो दिमाग से कनफ्यूजन वाली पिन निकाल दीजिए.
सिर्फ चार्जिंग-चार्जिंग खेलना है तो आईफोन वाली केबल चलने दीजिए. जो डेटा ट्रांसफर से लेकर वीडियो शूट करना है तो बढ़िया सी एंड्रॉयड वाली केबल खोंस लीजिए.
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