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चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 'नोटिस सही पते पर पहुंचा, देना होगा पूरा पैसा'

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (30 सितंबर) को SAINABA VERSUS STATE OF KERALA & ANR केस में कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत कानूनी डिमांड नोटिस को सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं माना जा सकता कि वह ड्रॉअर (चेक जारी करने वाले) के परिवार के किसी सदस्य को मिला था, जबकि नोटिस ड्रॉअर के सही पते पर रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजा गया था.

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2 अक्तूबर 2026 (अपडेटेड: 2 अक्तूबर 2026, 01:47 PM IST)
Section 138 NI Act, statutory notice, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138, चेक बाउंस, कानूनी डिमांड नोटिस, रजिस्टर्ड पोस्ट, नोटिस की तामील, ड्रॉअर का सही पता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला, Cheque Bounce, Legal Demand Notice, Supreme Court Ruling
कानूनी डिमांड नोटिस को सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं माना जा सकता कि वह ड्रॉअर (चेक जारी करने वाले) के परिवार के किसी सदस्य को मिला था (Courtesy: AI)

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