AI की वजह से ये छोटा सा देश हर रोज करोड़ों रुपये कमा रहा, दो अक्षरों ने मालामाल कर दिया
AI की वजह से कैरेबियन आईलैंड के बहुत ही छोटे देश एंगुइला (Anguilla) की इकोनॉमी एकदम से बढ़ गई है. साल 2025 में इस देश ने 85 मिलियन डॉलर बोले तो आठ सौ करोड़ रुपये छापे हैं. इस देश के पास दुनिया भर की AI कंपनियों से इतना पैसा आ रहा है कि वो अपने यहां बड़ा एयरपोर्ट बनवा रहा है. हेल्थ और एजुकेशन पर भी खूब काम हो रहा है. मगर कैसे?

AI की वजह से कौन-कौन सी कंपनियों को फायदा हो रहा है, वो कहना अभी जल्दबाजी होगी, मगर AI की वजह से एक छोटे से देश की चांदी (tiny island hit an AI goldmine) हो गई है. AI की वजह से कैरेबियन आईलैंड के बहुत ही (Caribbean island of Anguilla) छोटे देश एंगुइला (Anguilla) की इकोनॉमी एकदम से बढ़ गई है. साल 2025 में इस देश ने 85 मिलियन डॉलर बोले तो आठ सौ करोड़ रुपये छापे हैं. इस देश के पास दुनिया भर की AI कंपनियों से इतना पैसा आ रहा है कि वो अपने यहां बड़ा एयरपोर्ट बनवा रहा है. हेल्थ और एजुकेशन पर भी खूब काम हो रहा है. मगर कैसे?
खाली प्लॉट पर हाइवे निकालने सेआज हर एआई कंपनी को अपने डोमेन में नाम के साथ .ai मांगता ही है. जैसे .us या .in, वैसे .ai. अब जो .ai चाहिए तो फिर एंगुइला को पैसा देना पड़ेगा. दो साल के लिए 11 हजार रुपये देने होंगे भले आपका स्टार्ट अप स्टार्ट हो या बंद. साल 2022 में जहां साल के 60 हजार डोमेन रजिस्टर होते थे तो वहीं 2026 में इनकी संख्या 10 लाख तक पहुंचने वाली है. रोज के 2000 रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. जब तक कंपनी रहेगी तब तक दो साल वाली साइकिल चलती रहेगी. रजिस्ट्रेशन सिर्फ एक हिस्सा है. मन के नाम की लड़ाई भी है.
उदाहरण के लिए अमेरिका में टेक कंपनी चलाने वाले धर्मेश शाह ने you.ai के लिए साढ़े छह करोड़ खर्च किए हैं. अभी उन्होंने कोई कंपनी बनाई नहीं लेकिन डोमेन रजिस्टर कर लिया है. इसी के चलते 15 हजार की जनसंख्या वाले और सिर्फ 35 स्क्वायर किलोमीटर में फैले इस देश के कुल बजट का आधा एआई कंपनियों से आ रहा है. जैसा हमने कहा कि देश इस पैसे का इस्तेमाल अपने लोगों के लिए कर रहा है. टैक्स भी कम हुए हैं अपनों के लिए. खाली पड़े प्लॉट पर हाइवे निकलना इसी को कहते हैं.
दो अक्षरों ने किस्मत बदल दीहालांकि किस्मत जैसा कुछ लिखने से हम बचते हैं मगर एंगुइला के मामले में ऐसा ही लगता है. 80 के दशक में जब इंटरनेट सने-सने अपने तार फैला रहा तो इसकी पहचान को लेकर दिक्कत हुई. इंटरनेट कौन से देश का है? ये कैसे पता चलेगा. इसलिए कंप्यूटर साइंटिस्ट जॉन पास्कल ने हर देश को एक पहचान दी. जैसे अमेरिका को मिला .us और ब्रिटेन को .uk इंडिया को मिला .in और एंगुइला को .ai.
अगले 35-40 साल तो इस डोमेन को किसी ने पूछा नहीं, मगर जैसे ही चैट जीपीटी आया, AI कंपनियां सबसे पहले एंगुइला की तरफ भागी. हालांकि कंपनी के नाम के आगे .ai होना कोई जरूरी नहीं है, मगर ऐसा होना कंपनी की पहचान को अलग बना देता है. इसी पहचान का फायदा अब इस देश को मिल रहा है. आप जब भी किसी भी चैट बॉट से बतियाते हैं तो मौज एंगुइला की होती है.
अरे पता है हमें. आप स्टोरी की पहली लाइन पर दरेरा देने वाले हो. अजी हमको भी पता है कि AI के आने से फिलहाल सबसे ज्यादा फायदा NVIDIA को हुआ है. लेकिन वो कोई AI कंपनी थोड़े ना थी. गेमिंग कंपनी जो GPU बनाती है. अब हर कंपनी को GPU चाहिए तो NVIDIA की बल्ले-बल्ले है. बाकी कंपनियों का फायदा या घाटा कुछ सालों में पता चलेगा.
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