"मै आपको अच्छे से जानता हूं", आम बोलचाल में ऐसा हमसे किसी ने या हमने किसी कोअक्सर कहा होता है. वजह सकारात्मक हो या नकारात्मक, वो अलग बात है. आपको ये जानकारआश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए कि आपका स्मार्टफोन भी आपको बहुत अच्छे से जानता है.कई बार तो इतना ज्यादा जानता है जो उसके लिए जरूरी भी नहीं है. घबराइए नहीं आपकामोबाइल आपकी जासूसी नहीं कर रहा, लेकिन कुछ सेटिंग्स है जिनके इनेबल होने से आपकाऔर स्मार्टफोन दोनों का नुकसान है. ऐसी ही कुछ सेटिंग्स आपको तत्काल प्रभाव से बंदकर देनी चाहिए. हम आपको ऐसी ही कुछ सेटिंग्स बंद करने के बारे में बताएंगे, लेकिनउसके पहले एक जादू भी देख लीजिए. क्या आपको पता है आपके स्मार्टफोन (AndroidSmartphone) में एक छिपा हुआ मेन्यू होता है. हां जी, इस मेन्यू को ओपन करते हीआपके सामने तमाम सेटिंग्स और कंट्रोल का पिटारा खुल जाता है. इस मेन्यू का नाम है"डेवलपर ऑप्शन" जिसको आपको खुद से इनेबल करना होगा. एंड्रॉयड फोन की सेटिंग्स में"अबाउट फोन "(About Phone) में "बिल्ड नंबर" (Build Number) का ऑप्शन दिखेगा. आपकोबिल्ड नंबर पर सात बार टैप करना है. इसके बाद आपके फोन के पिन या पासवर्ड को डालिएऔर जादू का पिटारा खुल जाएगा. और एक चेतावनी "डेवलपर ऑप्शन" में आपको फोकट में कोईछेड़खानी नहीं करनी है. काम की बात ये है कि "डेवलपर ऑप्शन" आपको अपने स्मार्टफोन परऔर कंट्रोल देता है. यहां से कई सेटिंग्स बदली जा सकती है. ब्लूटूथ और वाई-फाईस्कैनिंग ब्लूटूथ और वाई-फ़ाई बंद नहीं करना है बल्कि स्कैनिंग बंद करनी है. आपकास्मार्टफोन बैकग्राउंड में नए ब्लूटूथ डिवाइस और वाई-फ़ाई कनेक्शन को लगातार तलाशतारहता है. ऐसा होने से फोन की बैटरी पर असर तो पड़ता ही है, सुरक्षा के लिए भी ये ठीकनहीं. आमतौर पर आपके वाई-फ़ाई और ब्लूटूथ डिवाइस स्मार्टफोन से कनेक्ट होते हैं तोफिर बिना वजह और क्यों तलाशना. फोन की सेटिंग्स में लोकेशन में आपको दोनों सेटिंग्सको डिसेबल करने का ऑप्शन मिल जाएगा. ऐसा करने से आपके ब्लूटूथ और वाई-फ़ाई पर कोईअसर नहीं पड़ेगा. आपको जब भी कोई नया डिवाइस या वाई-फाई एड करना है तो आप सेटिंग्समें जाकर आराम से कर सकते हैं. सीमित बैकग्राउंड प्रोसेस यदि आपके पास थोड़ा पुरानाफोन है जिसमें रैम कम है तो ये आपके लिए रामबाण हो सकता है. वैसे आपके फोन मेंपर्याप्त रैंडम एक्सेस मेमोरी (RAM) भी है, तब भी बैकग्राउंड प्रोसेस बंद ही रखिए.जैसा नाम से जाहिर है, इस प्रोसेस में बैकग्राउंड में ऐप्स रन होते रहते हैं. अबफोन आपका पुराना हो या नया, ऐप्स तो उसमें सैकड़ों होते हैं तो सोचिए आपके फोन परकितना असर पड़ता होगा. "डेवलपर ऑप्शन" में जाकर आप इस प्रोसेस को बंद कर सकते हैं याफिर 1 से 4 के स्केल पर भी सेट कर सकते हैं. ऐसा करने से आपको पहले दिन शायद कुछफर्क ना दिखे लेकिन कुछ दिनों के बाद आपको महसूस होगा कि फोन की परफ़ॉर्मेंस बेहतरहुई है. लोकेशन हिस्ट्री आपने देखा होगा कि अक्सर आपके फोन पर आपकी लोकेशन के हिसाबसे सुझाव आते रहते हैं. पास वाला होटल या कोई दर्शनीय स्थल का सुझाव आपको गूगल सेमिलता रहता है. आप ऐसे सुझावों से खुश हैं तो कोई बात नहीं. लेकिन आपको इनसे कोफ्तहोती है तो इसको बंद कर सकते हैं. फोन की सेटिंग्स में लोकेशन में जाइए, यहां आपकोगूगल लोकेशन हिस्ट्री का ऑप्शन दिखेगा. अपने गूगल अकाउंट से लॉगइन कीजिए और लोकेशनको हमेशा के लिए बंद कर दीजिए. आपको ऐसा नहीं करना है तो आप "ऑटो डिलीट" का ऑप्शनभी चुन सकते हैं. आपकी लोकेशन हिस्ट्री 3 महीने लेकर 36 महीने में अपने आप डिलीट होजाएगी. "ऑटो डिलीट" का ऑप्शन आपको लोकेशन हिस्ट्री में नीचे मिल जाएगा. फायदा बतानेकी जरूरत नहीं है फिर भी बता देते हैं. ऐसा करने से बैटरी, डेटा और प्राइवेसी तीनोंपर लगाम लगेगी . सारे सेंसर्स डिसेबल कर दीजिए फोन में अचानक से कैमरा खुल जाना कोईनई बात नहीं है. ऐसा फोन में लगे हार्डवेयर सेंसर की वजह से होता है. आप जब फोन यूजकर रहे हो तो आप तुरंत उसको बंद कर सकते हैं, लेकिन सोचिए आपका फोन आपके पॉकेट मेंपड़ा हो तब क्या होगा. आप इन सेंसर्स को बंद कर सकते हैं. आपको "डेवलपर ऑप्शन" मेंजाना होगा. यहां आपको क्विक सेटिंग्स का ऑप्शन दिख जाएगा. बहुत से ऑप्शन सामने दिखजाएंगे. आपको सेंसर्स ऑफ को एक्टिव कर देना है. एक बार इनेबल करने के बाद आपके फोनमें टॉप पर जो सेटिंग का मेन्यू होता है, वहां पर भी इसका टैब मिल जाएगा. सेंसर्सऑफ होने से माइक्रोफोन, जीपीएस, कंपास अचानक से ऑपरेट नहीं होंगे. ऐड्सपर्सनलाइजेशन को करें ऑफ ऐसा हो सकता है कि आपने अपने एंड्रॉयड फोन से गूगल अकाउंटपर साइन इन नहीं किया हो (संभावना कम है) तो भी आपको विज्ञापन दिखाई देते हैं. ऐसाइसलिए क्योंकि लाखों वेबसाइट गूगल का यूज करती हैं आपको पर्सनल ऐड दिखाने के लिए.आपकी सर्च के आधार पर आपको ऐड दिखते हैं. इनको बंद किया जा सकता है. सबसे पहले अपनेफोन की सेटिंग्स में गूगल पर जाइए. मैनेज योर गूगल अकाउंट में दाखिल होने पर आपको"डेटा और प्राइवेसी" का ऑप्शन दिखेगा जिसमें आपको नीचे ऐड सेटिंग नजर आएगा. आप AdsPersonliation को ऑफ कर दीजिए. ऐसा करने से आपको कम से कम सर्च या नेट सर्फिंग केआधार पर ऐड दिखना बंद हो जाएंगे. हालांकि, गूगल पर आने वाले नॉर्मल ऐड से छुटकारामिलना असंभव है. पापी पेट का सवाल है भाई (गूगल की कमाई का). बैकग्राउंड्स डेटा ऑफआज की तारीख में भारत में अनलिमिटेड इंटरनेट मिलना कोई बड़ी बात नहीं है. अनलिमिटेडइंटरनेट मतलब बिना किसी चिंता के मजे लिए जाओ. आपको शायद पता ना हो कि यही मजा आपकेफोन के लिए ठीक नहीं है. ऐप्स बैकग्राउंड में डेटा को चूसते रहते हैं और ऐसे मेंबैटरी पर असर पड़ता है. यदि आपके पास सीमित इंटरनेट वाला प्लान है तो फिर चिंता औरबड़ी है. आप बैकग्राउंड डेटा को स्थाई तौर पर बंद कर सकते हैं या फिर ऐप्स के हिसाबसे भी. कई सारे ऐप होंगे जो आप शायद महीने में एक बार यूज करते हो लेकिन डेटा वोआपसे पूरा लेते हैं. फोन की सेटिंग्स में ऐप्स पर क्लिक कीजिए जहां आपको गूगल प्लेस्टोर दिखेगा. इसके अंदर मोबाइल डेटा और वाई-फ़ाई का ऑप्शन मिलेगा. यहीं से आपबैकग्राउंड डेटा को ऑफ कर सकते हैं. आपको यदि ऐप्स के हिसाब से ऐसा करना है तोसेटिंग्स में ऐप्स के अंदर ऐप्स मैनेजमेंट का ऑप्शन मिलेगा. आप जिस भी ऐप का डेटाबंद करना चाहते हैं वो कर सकते हैं. दोनों ही तरीकों में अब आप जब उस ऐप को यूजकरेंगे तब ही डेटा की खपत होगी. यूसेज एंड डायग्नोस्टिक्स कोई मेडिकल की टर्म नहींहै, बल्कि एंड्रॉयड की प्रॉपर्टी है. आपके फोन में जब कभी कोई ऐप क्रेश हो जाता हैया सही तरीके से काम नहीं करता तो उसकी रिपोर्ट गूगल को और संबंधित डेवलपर को भेजीजाती है. ऐसा उस ऐप को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. आमतौर पर ये एक सामान्यजानकारी होती है, जैसे कि फोन का बैटरी लेवल या सिस्टम एक्टिविटी का ब्योरा. इसरिपोर्टिंग की प्रक्रिया को बंद किया जा सकता है. आपको लगेगा कि ऐसा करने से आपकाऐप कैसे ठीक होगा तो एक बात जान लीजिए कि करोड़ों लॉग एंड्रॉयड यूज करते हैं तो गूगलको तो पता चलना ही है. अब यदि ऐप में कुछ भी बड़ी दिक्कत आई होगी तो खुद गूगल बताताहै ब्लॉग पर या सोशल मीडिया पर. आपके अकेले के फोन से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.कारण जान लिया अब फोन की सेटिंग्स में गूगल पर जाइए और ऊपर दायीं तरफ तीन डॉटस परक्लिक कीजिए. Usage & Diagnostics को ऑफ कर दीजिए. इंस्टेंट ऐप्स आप कहोगे किइंस्टेंट नूडल तो सुना था लेकिन ये इंस्टेंट ऐप्स क्या बला है? पहले ये जान लीजिएकि एंड्रॉयड में इंस्टेंट ऐप्स 2016 से मौजूद हैं. किसी भी ऐप को डाउनलोड करके उसकोयूज करने से पहले ट्राइ करने का ऑप्शन इंस्टेंट ऐप्स है. उदाहरण के लिए, आप इंटरनेटपर कुछ देख रहे थे और आपको उसको खरीदने का मन हुआ तो आप इंस्टेंट ऐप का यूज कर सकतेहैं बिना अपनी पूरी जानकारी दिए. ऐप डेवलपर्स आपकी गतिविधियों पर नजर ना रख पाए.गूगल ने ये सोचकर ये सुविधा दी थी लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है. इंस्टेंट ऐप्सको बंद करने के लिए आपको सेटिंग्स में ऐप्स पर जाना होगा. ऐप्स के अंदर डिफॉल्ट ऐपमिलेगा और उसके अंदर होता है- "ओपनिंग लिंक". यहीं पर आपको इंस्टेंट ऐप्स दिखजाएगा. ऑफ कर दीजिए. सटीक लोकेशन ऑफ लोकेशन की ट्रेसिंग पर आपकी अपनी राय हो सकतीहै. मतलब आपके फोन की लोकेशन पर नजर रखी जाए या नहीं, वो आप पर निर्भर करता है.आपको बेहतर डायरेक्शन मिलता है और लोकल जानकारी भी. लेकिन इसके साथ आपकी निजता भीचली जाती है. हो सकता है कि आप लोकेशन सर्विस चालू रखना पसंद करते हों लेकिन आपकेघर का सटीक पता कतई नहीं बताना चाहेगे. सोशल मीडिया या मौसम की जानकारी वाले ऐप काआपके घर के पते से भला क्या काम होगा? आप अपने एंड्रॉयड फोन में इस फीचर को बंद करसकते हैं. सेटिंग्स में लोकेशन पर जाइए और उसके अंदर लोकेशन सर्विस दिख जाएगा. जिसभी ऐप को सेलेक्ट करेंगे, उसमें लोकेशन से जुड़े कई ऑप्शन आपको मिल जाएंगे. PreciseLocation को ऑफ कर दीजिए. यदि आपके गूगल के लेटेस्ट वर्जन मतलब एंड्रॉयड 12 वालाफोन है तो आपको ऐप इंस्टॉल करने पर या ओपन करने पर Precise या Approximate लोकेशनका पॉप अप भी मिल जाएगा. सेंसिटिव नोटिफिकेशन्स ऑफ आपके स्मार्टफोन में लॉक करने केकई ऑप्शन हैं, जैसे कि पिन, पैटर्न, पासवर्ड, फिंगर या फेस अनलॉक. बिना इनकेइस्तेमाल के आपका फोन अनलॉक नहीं होगा. फोन भले अनलॉक ना हो लेकिन आपकी निजीजानकारी पर नजर जरूर रखी जा सकती है. ऐसा किसी ट्रिक या हैकिंग से नहीं, बल्किनोटिफिकेशन पैनल की सेटिंग्स से हो सकता है. आपका फोन भले लॉक हो लेकिन कोईनोटिफिकेशन आएगा और यदि उस पर टैप किया जाए तो कुछ जानकारी दिखने लगती है.स्मार्टफोन की भाषा में इसको प्रिव्यू कहते हैं और ये कई बार घातक हो सकता है. अपनेएंड्रॉयड फोन में इसको बंद किया जा सकता है. नोटिफिकेशन सेटिंग में जाकर SensitiveNotifications को बंद कर दीजिए. कई फोन में इस फीचर का नाम "Hide Content onlockscreen" भी होता है. ऑफ करने के बाद आपको सिर्फ उस ऐप का पॉप अप दिखेगा जैसेमैसेज या ईमेल. उसके अंदर की जानकारी फोन को अनलॉक करने पर ही दिखेगी. ऊपर बताईसेटिंग्स को ऑफ करके आप बैटरी बचा सकते हैं. डेटा की खपत कम कर सकते हैं औरस्मार्टफोन से बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद कर सकते हैं.