नए स्मार्टफोन में ये 7 सेटिंग्स कर लीं तो सालों की टेंशन खत्म
फोन आपका नया हो या पुराना. कुछ सेटिंग्स (7 Android security settings) को सेटअप के समय ही सेट करना अच्छा होता है. फोन के साथ चिपक कर आई कुछ डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स आपके डेटा, लॉक स्क्रीन और अकाउंट के साथ खेला कर सकती हैं.

नया फोन सेटअप करने के अपने मजे हैं. नया वॉलपेपर लगाओ. नए ऐप्स डाउनलोड करो. वाकई बहुत मजा आता है. मगर नया फोन सेट करने के मोह में हम सेटिंग्स (7 Android security settings) में झांकना भूल जाते हैं जहां हमें सबसे पहले जाना चाहिए. क्यों जाना चाहिए, क्योंकि हर स्मार्टफोन कुछ डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स के साथ आता है.
ये सेटिंग्स आपके डेटा, लॉकस्क्रीन और अकाउंट को आपकी अपेक्षा से कहीं अधिक असुरक्षित बना सकते हैं. इन सेटिंग को बदलकर आप अपने फोन को ट्रैक होने से बचा सकते हैं. आपकी प्राइवेसी भी बची रहेगी और डेटा भी सेफ रहेगा. कुल 7 हैं, इसलिए 3.5 मिनट लगाकर पढ़ लीजिए.
ऐप एक्सेस पर ताला लगाइएफोन में पहले से मौजूद ऐप्स और बाद में प्ले स्टोर से डाउनलोड किए गए ऐप्स भतेरे एक्सेस आपसे लेकर फोन में बस जाते हैं. कहने को तो एक्सेस का पॉपअप स्क्रीन पर फूटता है मगर हम अक्सर उसे बिना पढ़े ओके कर देते हैं. इसको डिफ़ॉल्ट ऐप परमिशन कहते हैं. उदाहरण के लिए किसी यूटिलिटी ऐप को या नोट्स ऐप को आपकी लोकेशन या बॉडी सेंसर का एक्सेस क्यों देना. टेलीकॉम कंपनी के पास आपकी कुंडली पहले से है तो उसको आपकी लोकेशन का क्या करना है?
इसलिए सेटिंग्स में जाइए और Privacy में Permission manager के अंदर ऐसे ऐप्स को लोकेशन से लेकर कॉन्टैक्ट का एक्सेस ऑफ कीजिए. ऐप्स को लोकेशन के लिए Allow only while using the app या Don’t allow पर सेट कीजिए. ऐसा करने से लोकेशन भी नहीं शेयर होगी और बैकग्राउन्ड में इनके नहीं चलने से बैटरी भी बचेगी.

सीधे-सीधे कहें तो रोजमर्रा के काम के लिए गूगल क्रोम की जगह कोई दूसरा सर्च इंजन जैसे Firefox या DuckDuckGo का इस्तेमाल कीजिए. क्रोम में कोई बुराई नहीं है. फीचर्स भी हैं और इस्तेमाल में आसान, लेकिन वो गूगल का वंशज है. आपका पूरा डेटा सीधे उधर ही भेजता है. जबकि दूसरे ब्राउजर प्राइवेसी का थोड़ा ख्याल रखते हैं. सेटिंग में डिफ़ॉल्ट ऐप्स के अंदर ब्राउजर का ऑप्शन दिखेगा. यहां क्रोम की जगह Firefox कर लीजिए.
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बेताल से पीछा छुड़ाइएआपने नया फोन ले लिया मगर पुराने फोन को भूल गए. पता है आपने लॉग आउट किया होगा, मगर वो आधा काम है. फोन से लेकर लैपटॉप और दूसरे डिवाइस लॉग आउट होने के बाद भी गूगल अकाउंट से चिपके रहते हैं. ऐसे बेतालों से पीछा छुड़ाने के लिए गूगल अकाउंट की सेटिंग में डिवाइस में जाइए. यहां से इनको और साथ में इस्तेमाल नहीं होने वाले ऐप्स को आपकी पीठ से रफा-दफा कीजिए.

इतना अच्छा फीचर फोन में मिलता है मगर हम इसके ऊपर ध्यान ही नहीं देते. सेटिंग्स में जाकर सिम को पिन या पासवर्ड से लॉक कर दीजिए. अब अगर किसी ने आपकी सिम निकाल कर दूसरे फोन में लगाई तो वो काम नहीं करेगी. कोई कॉल नहीं कोई एसएमएस नहीं और सबसे जरूरी, कोई ओटीपी भी शेयर नहीं होगा.
स्विच ऑफ रीस्टार्ट को रोकिएआजकल के एंड्रॉयड स्मार्टफोन में फोन को स्विच ऑफ से रोकने और रीस्टार्ट से बचाने की सेटिंग्स होती हैं. अगर आपके फोन में है तो पहली फुर्सत में इनेबल कर लीजिए.
नोटिफिकेशन पर ताला लगाइएमोबाइल की लॉकस्क्रीन पर नोटिफिकेशन की घंटी वैसे भी चिड़ मचाती है, लेकिन उससे भी खतरनाक है इसका प्रीव्यू. सेटिंग्स में जाकर इसे सिर्फ फोन अनलॉक होने पर सेट कीजिए. लॉकस्क्रीन पर इनके दिखने से ओटीपी, पासवर्ड या दूसरी निजी जानकारी में सेंध लगाई जा सकती है.
कैमरा और माइक्रोफोन का एक्सेस बंद कीजिएएकदम लोकेशन जैसा मामला. फोन में मौजूद हर ऐप को इसकी जरूरत नहीं. कैमरा वहां इस्तेमाल होता है जहां मामला फोटो खींचने और अपलोड करने का है. ऐसे ही माइक्रोफोन वहां लगता है जहां वॉयस सर्च या रिकॉर्ड होना है. सेटिंग्स में जाकर फालतू के ऐप्स को इसका एक्सेस बंद कर दीजिए. आपके फोन भी ऐसे एक्सेस का इन्डिकेटर स्क्रीन पर दिखाते हैं. जैसे ही लाल बत्ती दिखे. एक्सेस बंद कर दीजिए.
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