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इलेक्ट्रीशियन-प्लंबर तक की नौकरी सेफ नहीं... AI से खतरे पर डराने वाली रिपोर्ट आई

अमेरिकी IT और कंसल्टेंसी कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है. उदाहरण दिया गया है कि अभी भी पाइप को फिजिकली रिपेयर करने के लिए प्लंबर चाहिए. लेकिन पानी के लीक का पता लगाने यानी डायग्नोसिस और रिपेयर प्लान बनाने जैसी तमाम चीजें AI कर सकता है.

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2 जून 2026 (अपडेटेड: 2 जून 2026, 01:20 PM IST)
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AI के पैर पसारने से कई सेक्टर्स की जॉब खतरे में हैं. ()
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आपकी नौकरी खा जाएगी? डर तो है, लेकिन पता कैसे चले कि हम कितने खतरे में हैं. एक स्टडी ने खतरे के बारे में आगाह कर दिया है. इसमें दावा किया गया है कि 2026 में ही 93 फीसदी जॉब्स पर AI का असर पड़ रहा है. जबकि ऐसा होने की संभावना साल 2032 तक थी. लेकिन AI ने इतनी तेजी से पैर पसारे कि 6 साल पहले ही सुई 90 फीसदी प्लस जॉब्स तक पहुंच गई. स्टडी के मुताबिक, टेक प्रोफेशनल्स को तो छोड़िए, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर भी AI के खतरे में हैं.

अमेरिकी IT और कंसल्टेंसी कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) की रिपोर्ट में दावा किया गया कि AI उम्मीद से भी पहले कामकाज पर असर डाल रहा है. यही वजह है कि जो खतरा 2032 तक होने का अनुमान जताया जा रहा था, वो 2026 में ही सामने आकर खड़ा हो गया. मंगलवार, 2 जून को कॉग्निजेंट के रिसर्च हेड ओली ओ’डोनोग्यू ने फॉर्च्यून मैगजीन को बताया कि लगभग हर कोई रिस्क में हो सकता है. आखिर में उन्होंने कहा कि कोई भी सेफ नहीं है.

प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन पर AI का खतरा

ऐसा लग सकता है कि AI उन नौकरियों पर ज्यादा असर डालता है जिन्हें ऑटोमेटेड किया जा सकता है. जैसे कि सर्विस या कोडिंग. हेड ओली ओ’डोनोग्यू ने कहा कि प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन जैसी जॉब्स को AI से सेफ कहा जाता था. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं.

ओ’डोनोग्यू ने उदाहरण दिया कि अभी भी पाइप को फिजिकली रिपेयर करने के लिए प्लंबर चाहिए. उन्होंने कहा कि पानी के लीक का पता लगाने यानी डायग्नोसिस और रिपेयर प्लान बनाने जैसी तमाम चीजें AI की मदद से हो सकती हैं.

रिपोर्ट में ओली ओ’डोनोग्यू ने कहा,

"लेकिन, आज एक मल्टीमॉडल रीजनिंग एजेंट दीवार पर नमी वाला पैच देख सकता है, लीक हो रहे जोड़ का अंदाजा लगा सकता है, रिपेयर प्लान का ड्राफ्ट बना सकता है और इनवॉइस या पार्ट्स लिस्ट भी बना सकता है. प्लंबर अभी भी पाइप ठीक करता है, लेकिन इंस्पेक्शन, डायग्नोसिस और उससे पहले या बाद में होने वाले सपोर्टिव एक्शन में AI से मदद मिल सकती है."

इस साल मार्च में अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने एक स्टडी जारी की थी. इसमें 22 ऐसे काम दिखाए गए थे, जिन पर AI का असर नहीं पड़ा. इनमें इंस्टॉलेशन और रिपेयर का काम भी शामिल है.

AI से नई नौकरियां पैदा होंगी

AI एक सच है और नौकरी को लेकर इसके खतरे से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता. इस बीच, कॉग्निजेंट ने उम्मीद जताई है कि AI की वजह से मार्केट में नई नौकरियां भी पैदा होंगी. कॉग्निजेंट के AI चीफ बिजनेस ऑफिसर सुशांत वारिकू का दावा है कि AI के कारण हम नए 'वैल्यू पूल' बनते हुए देख सकते हैं.

उन्होंने आगे कहा,

"जब ऐसा होता है, तो इससे बहुत ज्यादा सोशल इकोनॉमिक डेवलपमेंट होता है, जिससे नई नौकरियां, मार्केट में नए रोल बनते हैं."

उनका कहना है कि ऐसा करने के लिए कंपनियों को 'ऑपरेशनल मॉडल में बदलाव' के जरिए AI को सच में अपनाना होगा.

टेक दिग्गजों के दावे

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, रिपोर्ट में दावे ऐसे समय पर किए जा रहे हैं जब OpenAI के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई जैसे टेक लीडर्स ने AI के व्हाइट-कॉलर जॉब्स पर कब्जा करने को लेकर अपनी सोच बदलनी शुरू कर दी है. वहीं, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग ने AI के जॉब्स पर कब्जा करने को 'पूरी तरह बकवास' बताया है.

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