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पूर्व ओलंपियन रणधीर सिंह का निधन, शूटिंग में पहला गोल्ड मेडल जीत रिकॉर्ड बनाया था

Randhir Singh ने 1978 में बैंकॉक में हुए एशियन गेम्स के ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. खिलाड़ी के अलावा उन्होंने बतौर स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर भी काफी नाम कमाया था. वह IOA, IOC के अलावा WADA का भी हिस्सा रहे.

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27 मई 2026 (अपडेटेड: 27 मई 2026, 05:17 PM IST)
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रणधीर सिंह ने 79 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. (Photo-PTI)
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पूर्व भारतीय शूटर और खेल जगत के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटर रणधीर सिंह (Randhir Singh) का बुधवार, 27 मई को निधन हो गया. वो 79 साल के थे. उम्र संबंधी बीमारियों के चलते रणधीर बीते कुछ दिन से अस्पताल में भर्ती थे. वो अर्जुन अवॉर्डी भी थे. रणधीर भारत और एशिया की कई अलग-अलग स्पोर्ट्स बॉडीज में एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम कर चुके थे.  

पटियाला राजघराने में पैदा हुए रणधीर सिंह

रणधीर सिंह का जन्म पटियाला के राज घराने में हुआ था. उनका परिवार शुरुआत से ही स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़ा हुआ था. पिता भलिंद्र सिंह IOC (इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी) का हिस्सा थे. वह 1960 से 1975 तक IOA के अध्यक्ष भी रहे. ऐसे में रणधीर शुरुआत से ही खेलों से जुड़े रहे. 

रणधीर को उनकी बुआ ने शूटिंग से रूबरू कराया था. वो उस समय नेशनल लेवल शूटर रही थीं. 18 साल की उम्र में रणधीर सिंह ने अपने शूटिंग करियर की शुरुआत की. वह उस समय कॉलेज की क्रिकेट टीम का भी हिस्सा थे. हालांकि शूटिंग में सफलता मिलने के बाद वह क्रिकेट से दूर हो गए.

एशियन गेम्स में रचा इतिहास

रणधीर सिंह ने 1978 में बैंकॉक में हुए एशियन गेम्स में इतिहास कायम किया. उन्होंने ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया. वह इन खेलों में शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने थे. 

रणधीर ने कुल पांच ओलंपिक गेम्स में शिरकत की. कर्णी सिंह के बाद वह पहले ऐसे शूटर थे जिन्होंने पांच ओलंपिक में हिस्सा लिया था.

शूटर रहते हुए ही उन्होंने स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन में एंट्री कर ली थी. सबसे पहले वह इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन में शामिल हुए. कमेटी का हिस्सा रहते हुए ही उन्होंने 1994 में अपना आखिरी इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेला. उस वक्त वह पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर रहते हुए इंटरनेशन टूर्नामेंट में हिस्सा लिया.

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रणधीर का स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर करियर

1987 से 2012 तक इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन यानी IOA के सेक्रेटरी जनरल के तौर पर काम किया. रणधीर 2001 से 2014 के बीच इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी IOC के मेंबर भी रहे हैं. 

इसके अलावा उन्होंने वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी में भी काम किया. साल 2010 में भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ था. उस साल वो इन खेलों की आयोजन समिति के वाइस चेयरमैन के पद पर थे.

रणधीर सिंह सितंबर 2024 में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के प्रेसिडेंट चुने जाने वाले पहले भारतीय बने. उन्हें 2028 तक चार साल के टर्म के लिए OCA प्रेसिडेंट चुना गया था. इस साल की शुरुआत में उनकी सेहत खराब होने लगी थी, जिसके बाद उन्होंने इस पद से हटने का फैसला किया था. 

अभिनव बिंद्रा ने जताया शोक

भारत की शूटिंग फेडरेशन NRAI ने रणधीर सिंह के निधन पर दुख जताया. देश के इकलौते गोल्ड मेडलिस्ट शूटर अभिनव बिंद्रा ने रणधीर सिंह के निधन को लेकर X पर लिखा,

राजा रणधीर सिंह जी के निधन की खबर सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ है. उन्होंने अपना पूरा जीवन खेल को समर्पित कर दिया. एक ओलंपियन के तौर पर, एक खेल प्रशासक के तौर पर, और एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर, उन्होंने भारतीय और विश्व खेलों में अपना अमूल्य योगदान दिया. उनकी विरासत हमारे खेल इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी. उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं.

रणधीर सिंह अपने पीछे पत्नी विनीति सिंह और तीन बेटियों को छोड़ गए हैं. उनकी बेटी सुनैना कुमारी IOA में वाइस प्रेसिडेंट रह चुकी हैं. वहीं राजेश्वरी पिता की तरह शूटिंग में ही एशियन गेम्स मेडलिस्ट हैं.

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