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यूपी में ऐसा भयानक तूफान आया कैसे जो इंसान को उड़ा ले गया?

एक पीड़ित शख्स इस आफत की 'तस्वीर' भी बन गया. तेज तूफान के चलते वो टिन शेड के साथ ही हवा में इतना ऊपर उड़ा कि पूरी दुनिया में चर्चा बन गया. सवाल है कि यूपी में इतना भीषण तूफान आया कैसे?

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रितिका
| रदीफा कबीर
14 मई 2026 (अपडेटेड: 14 मई 2026, 07:52 PM IST)
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यूपी में आए तूफान ने तबाही मचाई. (फोटो-इंडिया टुडे)
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उत्तर प्रदेश में बीती शाम जोरदार आंधी-तूफान ने तबाही मचा दी. प्रयागराज, भदोही, फतेहपुर, बदायूं, चंदौली समेत कई जिलों में लोगों की जान गई है. बताया गया कि करीब 90 लोगों की मौत हुई है. तूफान इतना तेज था कि कई पेड़ उखड़ गए. जो लोग बचने के लिए दीवारों के सहारे बैठे थे, वे उन्हीं दीवारों के मलबे में दबकर या तो मारे गए या घायल हो गए. कई तहसीलों में मोबाइल नेटवर्क ठप पड़ गए. एक पीड़ित शख्स इस आफत की 'तस्वीर' भी बन गया. तेज तूफान के चलते वो टिन शेड के साथ ही हवा में इतना ऊपर उड़ा कि पूरी दुनिया में चर्चा बन गया. सवाल है कि यूपी में इतना भीषण तूफान आया कैसे कि एक शख्स हवा में कई मीटर ऊपर उड़ गया.

आंधी-तूफान क्या होता है?

इंडिया टुडे से जुड़ीं रदीफा कबीर बताती हैं कि आंधी-तूफान झुलसती हुई जमीन और ऊपर की ठंडी हवा के बीच बहुत ज्यादा तापमान के अंतर से पैदा होते हैं. आमतौर पर इनसे मिट्टी जमीन से उठकर उड़ने लगती है. लेकिन अक्सर इतने प्रचंड भी हो जाते हैं कि पेड़, टैंट, हल्के वाहन, टिन वगैरा इनके वेग से उड़ या उखड़ जाते हैं.

मई के महीने में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर चला जाता है. जमीन के पास की अत्यधिक गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है. ऊपर उठते समय ये अन्य दिशाओं से ठंडी, नमीयुक्त हवा को अपनी ओर खींचती है. इससे टकराव होता है और तूफानी बादल बनते हैं. इसे क्यूम्यूलोनिम्बस कहा जाता है. यही बादल बिजली, ओले और तेज हवाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं.

ये हवाएं जमीन से टकराती हैं तो जबरदस्त स्पीड से बाहर की ओर फैलती हैं. इससे ढीली ऊपरी मिट्टी उड़ जाती है और भयानक तूफान बनता है.

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यूपी में चली हवाओं की रफ्तार 50 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच थी. (फोटो-इंडिया टुडे)

भारतीय मौसम विज्ञान ने 13 मई को उत्तरी पाकिस्तान और जम्मू के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में मौजूद वेस्टर्न डिस्टरबेंस और दक्षिण हरियाणा और उत्तर-पश्चिम यूपी के ऊपर एक दूसरे चक्रवाती सर्कुलेशन (किसी इलाके में हवाओं का घूमते हुए एक कम दबाव वाले क्षेत्र की तरफ जाना) की जानकारी दी थी. ये एटमॉस्फेरिक सिस्टम ही तूफान का कारण बनी है.

अप्रैल और मई के दौरान पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) उत्तरी भारत से होकर गुजरते हैं. और कभी-कभी मानसून से पहले के गंभीर मौसम को शुरू करने में मदद करते हैं. और जब ये तपती हुई जमीन के संपर्क में आते हैं, तो इसके नतीजे जानलेवा हो सकते हैं.

गर्मी और तूफान का मेल

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस जब गर्म जमीन के कॉन्टैक्ट में आते हैं, तो ये खतरनाक हो सकता है. और यूपी की गर्मी से हम सब वाकिफ हैं. यहां तापमान 40 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है. हवा का शुष्क होना, मिट्टी का ढीला होना और झुलसा देने वाली सतह और ठंडे ऊपरी वातावरण के बीच तापमान का अंतर अपने चरम पर होता है. कोई भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या लोकल साइक्लोनिक सर्कुलेशन, एक चेन रिएक्शन शुरू कर सकता है.

जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: एटमॉस्फियर्स में प्रकाशित एक पीयर-रिव्यूड स्टडी में पाया गया कि UP में धूल के तेज तूफान तब बनते हैं, जब सतह पर नमी वाली पूर्वी हवाएं रेगिस्तानी इलाके से आने वाली सूखी पश्चिमी हवाओं से टकराती हैं. इससे तेज कन्वेक्शन होता है और तेज डाउनड्राफ्ट (नीचे की ओर बहने वाली हवा) बनते हैं. वहीं, ऊपर आसमान में हाई स्पीड में बहने वाली एक पट्टी चलती है. इसे जेट स्ट्रीम कहते हैं जो ये तय करने में अहम भूमिका निभाती है कि तूफान किस जगह (दिशा में) जाएगा और कितना ताकतवर होगा.

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आंधी-तूफान के समय पेड़ों से दूर रहना चाहिए. (फोटो-इंडिया टुडे)

साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट में भारत में धूल के तूफानों के डायनामिक्स पर एक रिपोर्ट छपी. इसमें इस बात को और कन्फर्म किया गया कि यूपी सहित हिमालय की तलहटी में प्री-मानसून सीजन के दौरान तेज गरज और बिजली कड़कना, तापमान से होने वाली एटमोस्फेरिक अस्थिरता का ही सीधा नतीजा है.

ऐसे में सवाल आता है कि क्या क्लाइमेट चेंज इसमें कोई किरदार निभाता है? तो इसका जवाब है लगभग-लगभग हां. हाल के सालों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का पैटर्न बदल रहा है. और कई बार ये पहले की तुलना में ज्यादा तीव्र मौसमी घटनाओं से जुड़े भी पाए गए हैं.

तूफान के समय क्या करें?

भदोही, बदायूं और फतेहपुर की घटनाओं में कई लोगों की मौत इसलिए हुई क्योंकि वे पेड़ों के नीचे या मिट्टी के बने घरों में पनाह लिए हुए थे. तूफान के समय ये दोनों ही खतरनाक ऑप्शन है. इसलिए अगर आपको तूफान आने की आशंका लगे, तो पेड़ों, दीवारों और खुले मैदानों से दूर रहना ही बेहतर विकल्प है. 

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