चीन पहुंचे पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट क्या ट्रेनिंग ले रहे? ये गठजोड़ भारत के लिए कितना खतरनाक?
भारतीय सेना के अफसर दावा कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी. आरोप लगे कि चीन ने पाकिस्तान को रियल-टाइम डेटा दिया, ताकि इंडियन मिलिट्री की मूवमेंट्स पता चल सकें. अब चीन-पाकिस्तान का अंतरिक्ष गठजोड़ स्पेस मिलिट्राइजेशन का दायरा बढ़ा सकता है. इससे पार पाने के लिए भारत को भी कोशिशें तेज करनी होंगी.

चीन और पाकिस्तान. दोनों भारत के पड़ोसी और चुनौती हैं. जब ये दोनों देश एक साथ आते हैं, तो भारत के लिए चैलेंज और भी बढ़ जाता है. खासकर, बॉर्डर पर इन दोनों के साथ काफी तनाव रहता है. लेकिन अब यह तनाव बॉर्डर से निकलकर स्पेस में फैलता दिख रहा है. इसे हवा दी है चीन-पाकिस्तान स्पेस प्रोग्राम ने. दो पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट्स- मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम दाऊद चीन भी पहुंच गए हैं. क्या स्पेस की दुनिया में इन दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी भारत के लिए नए खतरे खड़े कर सकती है?
भारतीय सेना के अफसर दावा कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी. आरोप लगे कि चीन ने पाकिस्तान को रियल-टाइम डेटा दिया, ताकि इंडियन मिलिट्री की मूवमेंट्स पता चल सकें. अब चीन-पाकिस्तान का अंतरिक्ष गठजोड़ स्पेस मिलिट्राइजेशन का दायरा बढ़ा सकता है. इससे पार पाने के लिए भारत को भी कोशिशें तेज करनी होंगी.
24 मई को चीन ने अपना तीन चीनी एस्ट्रोनॉट्स का मानवीय मिशन Shenzhou-23 लॉन्च किया. ये तीनों सही सलामत चीन के तियांगॉन्ग स्पेश स्टेशन पहुंच चुके हैं. इससे ठीक एक दिन पहले 23 मई को चीन ने बीजिंग में पाकिस्तान के दो एस्ट्रोनॉट्स मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम दाऊद का स्वागत किया. दोनों पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट्स चीनी एस्ट्रोनॉट्स के साथ मिलकर स्पेस मिशन पर काम करेंगे.
पहला विदेशी, जो चीनी स्पेस स्टेशन जाएगा22 अप्रैल को CMSA ने इन दोनों पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट्स को चीन के स्पेस मिशन ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए पहले विदेशी एस्ट्रोनॉट्स के तौर पर चुना था. चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, सारी ट्रेनिंग और इवैल्यूएशन पूरी करने के बाद, इनमें से एक पेलोड स्पेशलिस्ट के तौर पर स्पेस मिशन में हिस्सा लेगा, और तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर जाने वाला पहला विदेशी एस्ट्रोनॉट बनेगा.
चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी (CMSA) ने 23 मई को बताया,
"दो पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट्स चीन के एस्ट्रोनॉट सेंटर में आ गए हैं और अपने चीनी साथियों के साथ मिशन ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहे हैं. इससे जुड़ा सारा काम ठीक से चल रहा है."
'काम ठीक से चल रहा है' और भारत के लिए नई चुनौती खड़ी कर रहा है. स्पेस की रेस में चीन तो पहले ही आगे है, अब पाकिस्तान भी कदमताल कर रहा है.

चीन के सरकारी टीवी चैनल CCTV न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, CMSA के प्रवक्ता झांग जिंगबो ने पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग की पूरी प्रोग्रेस के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि अभी के प्लान के तहत एक पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट पेलोड स्पेशलिस्ट के तौर पर कम समय (शॉर्ट-ड्यूरेशन) के स्पेस मिशन में शामिल होगा.
झांग जिंगबो ने आगे बताया कि दूसरा पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट अभी ट्रेनिंग प्रोग्राम के हिसाब से बेसिक ट्रेनिंग और स्पेशल एयरोस्पेस टेक्निकल ट्रेनिंग ले रहा है, जिसमें मिशन को पूरा करने की क्षमता पक्का करने के लिए प्रैक्टिकल ऑपरेशनल स्किल्स पर फोकस किया जा रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती स्टेज में पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट्स को चीनी भाषा सीखने में मदद करने के लिए इंटेंसिव पुतोंगहुआ कोर्स कराए जाएंगे. स्पेस मिशन करने के लिए जरूरी कमांड टर्मिनोलॉजी भी सिखाई जाएगी.
भारत के लिए खतरा क्यों?जिस तरह टेक्नोलॉजी एडवांस होती जा रही है, उससे स्पेस वॉर के खतरे भी बढ़ गए हैं. फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ऑर्बिटल स्पेस में भारत ने केवल 5 मिशन लॉन्च किए, जबकि चीन ने 92. स्पेस में चीन-पाकिस्तान का नेक्सस पाकिस्तान के Space Vision 2040 को अचीव करने में मदद करेगा. इससे पाकिस्तान की सेंसिंग कैपेबिलिटीज और स्ट्रैटेजिक मिलिट्री टेक्नोलॉजी बेहतर होगी.
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान ने चीन की मदद से PRSC-EO3 सैटेलाइट लॉन्च किया है. इससे पड़ोसी मुल्क की रिमोट सेंसिंग और पृथ्वी को देखने-समझने की कुव्वत में इजाफा होगा. सीधा मतलब है कि यह सैटेलाइट पाकिस्तान को पूरे भारत और दुनिया में मौजूद भारतीय एसेट्स पर पैनी नजर रखने की इजाजत देती है. रियल टाइम मॉनिटरिंग से बॉर्डर की हलचल और मैरीटाइम यानी समुद्र में तैनात एसेट्स के बारे में पता चल जाता है.
चीन-पाकिस्तान के स्पेस आधारित गठजोड़ को एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तौर भी देखा जा सकता है. चीन की टेक्नोलॉजी से पाकिस्तान का स्पेस डेवलपमेंट होगा. पाकिस्तान के स्पेस एसेट्स सीधे तौर पर भारतीय एसेट्स के खिलाफ होंगे. आने वाले समय में इससे भारत के लिए स्पेस में नया सिक्योरिटी प्रेशर बन सकता है.
इस लिहाज से भारत को अपना नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन यानी NavIC सिस्टम बेहतर करना होगा, जिसकी एक्टिव सैटेलाइट्स की संख्या कम होने की खबरें आई थीं. इसके अलावा, चीन-पाकिस्तान के स्पेस को-ऑपरेशन पर नजर रखनी होगी.
स्पेस के मामले में भारत से आगे था पाकिस्तानआजादी के बाद पाकिस्तान ने भारत से 8 साल पहले स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करना शुरू कर दिया था. 1961 में पाकिस्तान ने कराची में पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी 'पाकिस्तान स्पेस एंड अपर एटमॉस्फेयर रिसर्च कमीशन' (SUPARCO) की शुरुआत की. 1969 में भारतीय स्पेस एजेंसी 'इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन' बनी.
पाकिस्तान ने स्पेस एजेंसी भले ही पहले बनाई हो, लेकिन आज के वक्त में भारत उससे काफी आगे है. भारत के पास अपने रॉकेट, लॉन्चिंग साइट्स, सैटेलाइट्स आदि हैं. आगामी मानव स्पेस मिशन के लिए भारतीय गगनयात्री शुभांशु शुक्ला अमेरिकी स्पेस एजेंसी 'नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन' (NASA) के Axiom-4 मिशन के तहत स्पेस की सैर कर चुके हैं.
स्पेस टेक्नोलॉजी के मामले में चीन भारत से आगे है. वो अपने अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस भेज चुका है. भारत इस तकनीक को हासिल करने में लगा है, ताकि गगनयात्री स्पेस एक्सप्लोर कर सकें. लेकिन चीन की मदद से पाकिस्तान अपने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में भेजने में कामयाब होता है, तो रीजनल स्पेस में पाकिस्तान की पावर बढ़ेगी.
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