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सिर घुमा रही गर्मी के बीच आया मानसून कहां चला गया और कब लौटेगा?

India Monsoon slow reason: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में लंबे समय से लो-प्रेशर सिस्टम, डिप्रेशन और चक्रवाती तूफान नहीं देखे गए हैं. मानसून के आगे बढ़ने में इन्हीं वेदर सिस्टम्स का अहम किरदार रहता है. क्योंकि ये नमी वाली हवाओं को जमीन की ओर खींचने में मदद करती हैं. और भारतीय जमीन पर मानसून की रफ्तार बढ़ा सकती हैं.

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11 जून 2026 (अपडेटेड: 11 जून 2026, 11:48 PM IST)
India Monsoon stall reason
मानसून के आगे बढ़ने में वैदर सिस्टम का अहम किरदार रहता है. (फोटो-इंडिया टुडे)
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भारत में दक्षिण-पश्चिम में मानसून दस्तक दे चुका है. 4 जून को केरल पहुंचने के कुछ दिनों में ये तेजी से दक्षिण भारत, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और नॉर्थ ईस्ट के इलाकों में फैल गया. लेकिन भारत के कई राज्यों में बारिश का ये रूप दिख नहीं रहा.

कुछ राज्यों में मानसून की रफ्तार अब भी धीमी है. मध्य, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों में अभी भी मौसमी बारिश का इंतजार है. ऐसे में सवाल है कि जब और जगह मानसून आ चुका है, तो फिर यहां क्यों नहीं. क्यों अब तक राहत मिलने वाली बारिश नहीं हो रही है. कड़ाके की गर्मी से कब निजात मिलेगी.

मौसम का सिस्टम बिगड़ा, मानसून हिला!

इन सवालों का जवाब इंडिया टुडे ने प्राइवेट मौसम एजेंसी 'स्काईमेट' के हवाले से दिया है. एजेंसी ने लिखा कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में लंबे समय से लो-प्रेशर सिस्टम, डिप्रेशन और चक्रवाती तूफान नहीं देखे गए हैं. 2025 के आखिर में आए चक्रवात डिटवाह (Ditwah) के बाद से इन दोनों इलाकों में कोई बड़ा तूफान नहीं बना है.

मानसून के आगे बढ़ने में इन्हीं वेदर सिस्टम्स का अहम किरदार रहता है. क्योंकि ये नमी वाली हवाओं को जमीन की ओर खींचने में मदद करती हैं. और भारतीय जमीन पर मानसून की रफ्तार बढ़ा सकती हैं.

अगर ये नहीं है, तो मानसून को अपनी सामान्य हवाओं के बहाव से मेहनत करनी पड़ती है. खुद पर निर्भर रहना पड़ता है. नतीजा, इसके आगे बढ़ने की स्पीड धीमी हो सकती है.

स्काईमेट के अनुसार, मानसून की हवाएं अभी पश्चिमी तटीय इलाकों में ज्यादा मजबूत हैं. मगर दक्षिण भारत के अंदरूनी हिस्सों में उतनी स्ट्रांग नहीं. ये ही कारण है कि कुछ जगह झम-झमाकर बारिश हो रही है. लेकिन कई क्षेत्रों में अब भी हाल-बेहाल करने वाली गर्मी पड़ रही है.

धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा मानसून

अब ये भी सवाल है कि क्या मानसून का धीमा होना चिंता की बात है? तो जवाब है, इतना नहीं. मौसमी बारिश कभी तेजी से आगे बढ़ती है. और कभी इसकी रफ्तार पर लगाम लग जाता हैं. कहें तो ये आम तौर पर अलग-अलग फेज में आगे की तरफ मूव करती है. माने तेजी से एक बार मानसून आगे बढ़ा. फिर इसकी प्रोग्रेस धीमी हो गई. लेकिन फिर इसने रफ्तार पकड़ ली. इस साल ये ही पैटर्न देखा जा रहा है.

जोरदार शुरुआत करने के बाद, मानसून आगे बढ़ता रहा. लेकिन धीमी रफ्तार से. IMD ने इस हफ्ते की शुरुआत में बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून बाकी सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों, सिक्किम और सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून की यात्रा का अगला फेज इस बात पर निर्भर कर सकता है कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कोई नया लो-प्रेशर सिस्टम बनता है या नहीं. क्योंकि अगर ये प्रणालियां नहीं होंगी, तो भारत के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार काफी धीमी रह सकती है. 

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