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बंगाल में मुस्लिमों को बड़ा झटका, शुभेंदु सरकार ने कई उप जातियों को OBC आरक्षण लिस्ट से बाहर किया

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार, 29 जून को दो अहम बिल ध्वनि मत से पास हो गए हैं. इनके नाम हैं- 'पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026' और 'पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को छोड़कर) सरकारी नौकरियों और पदों में आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026'

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29 जून 2026 (पब्लिश्ड: 07:41 PM IST)
Suvendu Adhikari
सुवेंदु अधिकारी. फाइल फोटो- PTI
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पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की आरक्षण लिस्ट में कटौती की है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार, 29 जून को इससे जुड़े दो अहम बिल ध्वनि मत से पास हो गए हैं. इनके नाम हैं- 'पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026' और ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को छोड़कर) सरकारी नौकरियों और पदों में आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026’.

इंडिया टुडे से जुड़े इंद्रजीत की रिपोर्ट के मुताबिक, इन बिलों के जरिए शुभेंदु सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें OBC आरक्षण 7% से बढ़ाकर 17% कर दिया गया था. बिल पास होने के बाद कई मुस्लिम उप जातियां आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में दो बिल पास हुए
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में दो बिल पास हुए.

बीजेपी सरकार का कहना है कि यह फैसला मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के तहत लिया गया है. हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य में OBC आरक्षण 7% ही रहेगा और OBC सूची में कुल 66 जातियां शामिल होंगी. ममता सरकार के समय OBC सूची का विस्तार किया गया था. इसमें खासतौर पर मुस्लिम समुदाय की कई उपजातियों को जोड़ा गया था. 

बिल पास होने पर पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरी शंकर घोष ने कहा,

"इस संशोधन के जरिए पिछली सरकार द्वारा किए गए उन प्रावधानों को खत्म किया जा रहा है, जिन्हें हाईकोर्ट ने अवैध माना था. अब OBC की मूल सूची में शामिल 66 जातियां ही बनी रहेंगी. पिछली सरकार ने जल्दबाजी में 113 नई जातियों को OBC सूची में जोड़ दिया था. यह फैसला सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे और एक खास समुदाय को वोटर्स को खुश करने के मकसद से लिया गया था."

2010 से पहले वाली सूची

पश्चिम बंगाल सरकार ने साल 2010 से पहले वाली मूल OBC सूची को बहाल कर दिया है, जिसमें सिर्फ 66 जातियां शामिल हैं. अब सिर्फ इन्हीं जातियों को 7 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. साल 2010 में वाम मोर्चे की सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले OBC सूची में 42 नई जातियों को शामिल कर दिया और आरक्षण को दो कैटेगरी में बांट दिया. OBC-A (अतिपिछड़ा) को 10 प्रतिशत और OBC-2 (पिछड़ा) को 7 प्रतिशत.

मई 2012 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इसे और आगे बढ़ाया. उन्होंने 35 और जातियां ओबीसी सूची में जोड़ दीं. इन दोनों सरकारों ने मिलकर कुल 77 नई जातियां ओबीसी सूची में शामिल कीं. इनमें से 75 मुस्लिम समुदाय की थीं. शुभेंदु अधिकारी सरकार ने इन दोनों कैटेगरी को खत्म करते हुए 2010 वाली पुरानी व्यवस्था लागू कर दी है. यानी 66 जातियों के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण.

मदरसों में गाना होगा वंदे मातरम्

इससे पहले पिछल हफ्ते बीजेपी सरकार ने राज्य में अपने पहला बजट पेश किया. इसमें मदरसा एजुकेशन का बजट घटाकर आधा कर दिया गया. शुभेंदु सरकार में वित्त मंत्री स्वप्नदास गुप्ता ने बताया कि बंगाल में बीजेपी सरकार ने माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 2165 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. ये रकम पिछली TMC सरकार की तुलना में आधी से भी कम है. TMC कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 5713 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

इसके अलावा नई-नई पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में वंदे मातरम् गाना अनिवार्य कर दिया है. मदरसा शिक्षा निदेशालय ने 19 मई को एक आदेश जारी करके बताया कि मदरसों में क्लास शुरू होने से पहले होने वाली असेंबली में वंदे मातरम् गाना जरूरी होगा. यह आदेश राज्य के सभी सरकारी मॉडल मदरसों (इंग्लिश मीडियम), एफिलिएटेड सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों, अप्रूव्ड MSK, अप्रूव्ड SSK और एफिलिएटेड गैर सहायता प्राप्त मदरसों पर लागू होगा. आदेश में कहा गया है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए. 

वीडियो: पश्चिम बंगाल में RSS की शाखा कहां लगी?

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