उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का निधन, पीएम मोदी ने किया याद
साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में बीसी खंडूरी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के राज्यमंत्री बने. इसी दौरान देश के चारों हिस्सों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की शुरुआत हुई. खंडूरी को इस योजना के आर्किटेक्ट के तौर पर याद किया जाता है.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन हो गया है. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. 19 मई को देहरादून के मैक्स अस्पताल में बीसी खंडूरी ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. वे दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे.
बीसी खंडूरी का निधनप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीसी खंडूरी के निधन पर शोक प्रकट किया है. पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा,
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (रिटायर्ड) जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा. उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा. केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है. देशभर में कनेक्टिविटी की बेहतरी के लिए उन्होंने निरंतर अथक प्रयास किए. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और समर्थकों के साथ हैं. ओम शांति!
सेना से राजनीति में आए थे बीसी खंडूरी
भुवन चंद्र खंडूरी सेना से रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए थे. उनकी पहचान एक ईमानदार नेता और सख्त प्रशासक की रही है. खंडूरी साल 1991 में सबसे पहले गढ़वाल सीट से सांसद चुने गए. साल 1996 के चुनाव में सतपाल महाराज से हार मिली. साल 1998 में दूसरी और साल 1999 में गढ़वाल सीट से तीसरी बार सांसद बने. साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के राज्यमंत्री बने. इसी दौरान देश के चारों हिस्सों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की शुरुआत हुई. खंडूरी को इस योजना के आर्किटेक्ट के तौर पर याद किया जाता है.
साल 2007 में पहली बार मुख्यमंत्री बने
साल 2007 में उत्तराखंड में बीजेपी सत्ता में आई. पार्टी ने बीसी खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाया. 2009 में लोकसभा चुनाव में प्रदेश की पांच सीटों पर मिली हार का जिम्मा लेते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया. साल 2011 में बीजेपी ने उनको फिर से राज्य की कमान सौंपी. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ‘खंडूरी है जरूरी’ के नारे के साथ चुनाव में गई. लेकिन सत्ता में वापसी नहीं हुई.
इसके बाद से खंडूरी एक्टिव पॉलिटिक्स से दूर होते गए. उनकी बेटी रितु खंडूरी अभी उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर हैं. बेटे मनीष खंडूरी भी राजनीति में एक्टिव हैं. मनीष पहले कांग्रेस में थे. लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए.
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