The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Politics
  • sourav ganguly meets bjp bn pathak mamata pm modi face backlash online

'सरकार बदलते ही बदल गए', सौरव गांगुली बीजेपी MLA से मिले, फोटो आते ही कट गया बवाल

Sourav Ganguly with BJP leader: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ये अफवाह उड़ी थी कि सौरव शायद तृणमूल कांग्रेस पार्टी जॉइन कर सकते हैं. फिर बाद में उन्होंने इन अफवाहों को साफ किया कि वो कोई भी राजनीतिक पार्टी जॉइन नहीं कर रहे हैं. अब उनका फोटो BJP नेता के साथ आया तो लोग जमकर उनकी आलोचना कर रहे हैं.

Advertisement
pic
7 मई 2026 (अपडेटेड: 7 मई 2026, 11:47 AM IST)
Sourav Ganguly with BJP leader:
सौरव गांगुली की भाजपा नेता पीएन पाठक (लेफ्ट) के साथ मीटिंग. (फोटो-इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

‘कलकत्ता के राजकुमार’ और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली विवादों में घिर गए हैं (Sourav Ganguly). सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर वायरल है. तस्वीर में वे भाजपा (BJP) नेता पीएन पाठक के साथ दिख रहे हैं. यही बात उनके कुछ फैंस को पसंद नहीं आई. कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि सौरव बंगाल में सरकार बदलते ही बदल गए. पश्चिम बंगाल में अभी चुनाव के नतीजे आए हैं. चुनाव से पहले ये अफवाह उड़ी थी कि सौरव गांगुली शायद तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) जॉइन कर सकते हैं. फिर बाद में उन्होंने इन अफवाहों को साफ किया कि वो कोई भी राजनीतिक पार्टी जॉइन नहीं कर रहे हैं. अब इस तस्वीर ने लोगों के मन में सौरव के इंटेंशन्स को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से विधायक P.N. Pathak ने 5 मई को अपने X हैंडल से एक तस्वीर शेयर की. कैप्शन में उन्होंने बताया कि कोलकाता में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के साथ उनकी मीटिंग सफल रही.  

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 293 में से 207 सीटें जीती हैं. लोगों ने तर्क दिया कि अगर सौरव भाजपा का समर्थन करते हैं तो पहले ये बात क्यों नहीं बताई? इंडिया टुडे के मुताबिक, सौरव गांगुली ने बेहाला पूर्व में वोट किया था. जब उनसे पूछा गया कि चुनाव कौन जीत सकता है? तब उन्होंने जवाब दिया था, ‘ये तो मां दुर्गा भी नहीं बता सकतीं.’ यूजर इसी बात को ढाल बनाकर उनसे सवाल कर रहे हैं. 

इसके अलावा लोग उन्हें सिलीगुड़ी के पूर्व तेज गेंदबाज़ अशोक डिंडा से भी कम्पेयर कर रहे हैं. अशोक डिंडा 2021 में भाजपा में शामिल हुए. जिसके बाद उनकी आलोचना की गई, लेकिन वो पीछे नहीं हटे. आलोचकों का कहना है कि सौरव गांगुली का सत्ताधारी पार्टी के साथ रिश्ते बनाना उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाता है. 

सोशल मीडिया बना ‘पॉलिटिकल पिच’

ये तस्वीर देखते ही लोगों के तेज रिएक्शन आने शुरू हो गए. कुछ यूजर उन्हें मौकापरस्त और स्वार्थी की संज्ञा दे रहे हैं तो कुछ उनकी तरफदारी कर रहे हैं. राहुल नाम के एक यूजर ने गुस्से भरे लहजे में लिखा, ‘सर हीरो बनने की ज़रूरत नहीं है. बंगाल में पहले ही बहुत ड्रामा हो चुका है. पूरी राजनीति सिर्फ एक स्वार्थी इंसान की वजह से ख़राब हो सकती है.’

screenshot
X पर यूजर का कमेंट. 

कुछ यूजर्स ने लिखा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल इन्हें नहीं मिलना चाहिए. जब भाजपा को इनकी ज़रूरत थी तब ये दादागिरी दिखाते हुए साइड हो गए. सत्यार्थी नाम के यूजर ने साफ तौर पर लिखा, ‘इन्हें पार्टी में नहीं लेना है. इन्होंने कभी बंगाल में हिंसा पर बात नहीं की. हमेशा वहां गए जहां इनका फायदा है. ऐसे गद्दारों को पार्टी से दूर रखना चाहिए.’ वहीं कुछ यूजर्स ने इनके सपोर्ट में भी बात की. बताया कि सौरव गांगुली ने कभी कोई पार्टी जॉइन नहीं की. बंगाल क्रिकेट को सबसे ऊपर रखा.

सौरव गांगुली को साल 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान नियुक्त किया गया था. उन्होंने टीम को कई महत्वपूर्ण ट्रॉफी दिलाईं. जिनमें 2002 ICC चैंपियंस ट्रॉफी की जीत और 2003 वनडे विश्व कप के फाइनल तक का शानदार सफर शामिल है. हालांकि इस वर्ल्ड कप में भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में हार गया, लेकिन ये भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे यादगार पलों में से एक रहा. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (CAB) के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए खेल में अपना योगदान जारी रखा. 

वीडियो: भारत-पाकिस्तान मैच पर सौरव गांगुली के बयान पर लोग क्यूं भड़क गए

Advertisement

Advertisement

()