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उद्धव ठाकरे की शिवसेना टूटी तो दर्द देवेंद्र फडणवीस को भी होगा? एकनाथ शिंदे का असली खेल

शिंदे सेना के पास फिलहाल सात सांसद हैं. वहीं बीजेपी के पास नौ. शिंदे सेना में उद्धव गुट के छह और जुड़ेंगे तो संख्या 13 हो जाएगी. इस विभाजन का नुकसान उद्धव ठाकरे को तो होगा ही, शिंदे के लिए इस जीत के मायने काफी बड़े हैं. ये जीत महाराष्ट्र में उनकी बारगेनिंग पावर बढ़ाएगी, जिससे उनके सहयोगी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की असहजता बढ़ेगी.

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18 जून 2026 (पब्लिश्ड: 08:14 PM IST)
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उद्धव की पार्टी में टूट से महायुति के सत्ता समीकरण बदलेंगे. (इंडिया टुडे)
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शिवसेना (UBT) के 6 सांसद टूटते दिख रहे हैं. उनकी तैयारी एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में जाने की है. ये दूसरा मौका है, जब शिंदे अपने बॉस रहे उद्धव ठाकरे को झटका देंगे. पहला झटका साल 2022 में लगा था, जब उन्होंने पार्टी तोड़ी और उद्धव ठाकरे से मुख्यमंत्री की कुर्सी छीन ली. दोबारा से पार्टी में टूट उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका तो होगा ही, लेकिन शिंदे का ये दांव उनके सहयोगी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी असहज कर सकता है.

उद्धव के बाद फडणवीस को डराएंगे शिंदे?

शिंदे सेना के पास फिलहाल सात सांसद हैं. वहीं बीजेपी के पास नौ. शिंदे सेना में छह और जुड़ेंगे तो संख्या 13 हो जाएगी. इससे बीजेपी, शिवसेना और NCP (अजित पवार) वाले महायुति गठबंधन के सत्ता समीकरण में बदलाव आने के आसार हैं.

महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. 288 सदस्यों वाले सदन में पार्टी के 132 विधायक हैं. शिंदे सेना 57 विधायकों के साथ काफी पीछे है. साल 2024 में सत्ता में वापसी के बाद एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा. देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने. शिंदे उपमुख्यमंत्री. तब खबरें चलीं कि शिंदे इस बदलाव से खुश नहीं थे. लेकिन उनके पास कोई और ऑप्शन नहीं था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महायुति से जुड़े कई नेता निजी बातचीत में इसका जिक्र करते हैं कि नंबर गेम के चलते सरकार में बीजेपी का असर बहुत ज्यादा है. संसद में सीन अलग है. महाराष्ट्र में 42 लोकसभा सीटे हैं. इनमें बीजेपी और शिवसेना (UBT) के पास 9-9 सीटें हैं. शिंदे सेना के पास 7 सीट है. अब ये नंबर 13 होने वाला है, जो कांग्रेस के बराबर होगा. इससे विपक्ष तो कमजोर होगा ही, एनडीए के भीतर भी खींचतान बढ़ सकती है. 

मुंबई यूनिवर्सिटी से जुड़े पॉलिटिकल एक्सपर्ट संजय पाटिल ने बताया, 

जाहिर है तत्काल नुकसान तो उद्धव ठाकरे का होगा. लेकिन इसका बड़ा प्रभाव कहीं और हो सकता है. अगर संसद में शिंदे के नंबर बढ़ते हैं तो बीजेपी की स्टेट लीडरशिप उनको उसी नजरिए से नहीं देख पाएगी, जैसे अभी देख रही है.

राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, इस फूट की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है. साल 2022 में शिवसेना में विभाजन हुआ. उसके बाद शिंदे ने उद्धव खेमे में सेंधमारी बंद कर दी. लेकिन 2024 विधानसभा के नतीजों ने महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच के सत्ता संतुलन को पूरी तरह से बदल दिया. इसके बाद ही शिंदे को अहसास हुआ कि उनको अपनी पार्टी की ताकत बढ़ानी होगी.

एनडीेए में मजबूत होंगे शिंदे!

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की टूट ने महाराष्ट्र के ‘ऑपरेशन टाइगर’ के लिए कैटेलिस्ट का काम किया. बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में हुए विद्रोह ने दिखाया कि राजनीति में हालात कितनी जल्दी बदल सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं, 

रीजनल पार्टियां जिस तरह से कमजोर हो रही हैं, एकनाथ शिंदे को बहुत अच्छे से पता है कि बीजेपी लीडरशिप के लिए उनकी अहमियत सिर्फ और सिर्फ उनके नंबर्स से ही तय होगी.

एनडीए के पास लोकसभा में फिलहाल 293 सांसद हैं. इसमें 240 बीजेपी के हैं. शिंदे के 7 सांसद उनको बीजेपी के सबसे मजबूत सहयोगी के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं करते. TMC के 20 बागी सांसदों के NCPI के बैनर तले एनडीए में आने के बाद उनकी स्थिति और कमजोर हो जाएगी. लेकिन अगर उद्धव गुट के 6 सांसद शिंदे गुट में आते हैं तो उनकी संख्या लगभग दोगुनी हो जाएगी. इससे एनडीए में उनकी स्थिति बेहतर हो जाएगी.

शिंदे सेना ने बताया मास्टरस्ट्रोक

शिंदे सेना पहले ही उद्धव ठाकरे से उनकी पार्टी का नाम, चुनाव चिह्न और कई भरोसेमंद साथियों को छीन चुकी है. अब उद्धव गुट में दोबारा हुई सेंधमारी एकनाथ शिंदे को एक कुशल रणनीतिकार के तौर पर स्थापित कर देगी. शिंदे गुट के एक सीनियर नेता ने बताया, 

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी मजबूत ताकत बनकर उभरी. कई लोगों ने शिंदे को नकारना शुरू कर दिया. लेकिन शिंदे ने एक बार फिर से साबित किया है कि जब लोग सोचते हैं कि लड़ाई खत्म हो गई, तभी वे पासा पलटना जानते हैं.

लेकिन शिवसेना (UBT) अपने संसदीय खेमे में हो रही टूट को एक दूसरे नजरिए से देखती है. पार्टी की नेता सुषमा अंधारे ने कहा, “इस टूट को केवल उद्धव ठाकरे की हार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. यह देवेंद्र फडणवीस की भी हार है.”

शिवसेना बनाम बीजेपी

दिल्ली में हो रहे बदलावों के बीच महाराष्ट्र में एनडीए के भीतर भी एक खींचातानी चल रही है. विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी और फडणवीस महायुति के भीतर ज्यादा मजबूत होकर उभरे हैं. मंत्रियों की नियुक्ति, MLC चुनाव के लिए सीट बंटवारा, निगम और बोर्ड में नियुक्तियां, स्थानीय निकाय चुनावों की स्ट्रैटजी और शिवसेना के गढ़ वाले इलाकों में बीजेपी के विस्तार को लेकर बार-बार टकराव देखने को मिला है.

इन परिस्थितियों में एकनाथ शिंदे का मजबूत होना महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मिली बीजेपी की बढ़त को कम कर सकता है. साफ-साफ कहें तो विभाजन का नुकसान उद्धव ठाकरे को तो होगा ही, शिंदे के लिए इस जीत के मायने काफी बड़े हैं. ये जीत एनडीए में उनकी बारगेनिंग पावर को बढ़ा देगी. शिंदे ज्यादा मजबूती से बीजेपी के सामने अपनी बात रख पाएंगे. 

वीडियो: राजधानी: क्या एकनाथ शिंदे एक बार फिर उद्धव की शिवसेना में सेंध लगा देंगे?

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