The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Politics
  • Samrat chaudhary childhood friend lakhanpur madarsa munger study

सम्राट चौधरी मदरसा क्यों जाते थे? बचपन के दोस्तों ने सब बताया

सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे. एनडीए विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुना लिया गया है. 15 अप्रैल को उनका शपथग्रहण होने की संभावना है. इस खबर से उनके गांव में उत्साह का माहौल है. उनको दोस्तों ने सम्राट चौधरी के बचपन की कहानी बताई है.

Advertisement
pic
14 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 14 अप्रैल 2026, 09:21 PM IST)
samrat chaudhary munger madarsa childhood friend
सम्राट चौधरी के दोस्तों ने उनके बचपन की कहानी बताई है. (इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उनकी जगह सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. यानी सम्राट अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे. सीएम के लिए उनके नाम पर मुहर लगने से मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में जश्न का माहौल है. इस मौके पर उनके दोस्तों ने उनके बचपन की कहानी बताई है.

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की खबर से उनके बचपन के दोस्तों में उत्साह है. उनके साथ पढ़ने और क्रिकेट खेलने वाले दोस्तों ने बातचीत में पुराने दिनों को याद किया है. आजतक ने उनके दोस्त शम्स रजा उर्फ गोल्डी, मोहम्मद अरशद उर्फ रॉकी और मोहम्मद कयाम उर्फ बबलू से बात की है. 

सम्राट चौधरी के इन दोस्तों ने बताया कि उनके बचपन में लखनपुर में पढ़ाई-लिखाई के लिए स्कूल नहीं था. बस एक मदरसा था, जहां सम्राट समेत दूसरे सभी बच्चे पढ़ाई करते थे. इस मदरसे में हिंदी, उर्दू के अलावा संस्कृत की पढ़ाई भी होती थी. बिहार के भावी मुख्यमंत्री के मित्रों ने बताया, 

 सम्राट चौधरी क,ख,ग के अलावा उर्दू के अक्षर अलिफ बे ते भी पढ़ते थे. ऐसा नहीं था कि सिर्फ सम्राट ही उर्दू पढ़ते थे, उनके साथ-साथ पढ़ने वाले सभी समुदाय के बच्चे उर्दू और संस्कृत दोनों की पढ़ाई करते थे.

सम्राट चौधरी के दोस्तों ने बताया कि सम्राट क्रिकेट खेलने में अच्छे थे. उनके पिता शकुनी चौधरी भी चाहते थे कि सम्राट अच्छी तरह क्रिकेट खेलें. उन्होंने आगे बताया,

क्रिकेट खेलने के चलते सम्राट चौधरी की पिटाई भी होती थी. क्रिकेट के दौरान हम लोगों में नोकझोंक भी होती थी. लेकिन कभी भी नफरत नहीं होती थी. वह बात आज भी है. भले ही सम्राट अब बिहार के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं लेकिन जब भी यहां आते हैं तो हम लोगों की उनसे मुलाकात होती है. कभी भी हमारे यहां लोग हिंदू मुस्लिम की नजर से एक दूसरे को नहीं देखते हैं.

उर्दू मिडिल स्कूल लखनपुर के प्रिंसिपल मोहम्मद ताबीर ने बताया कि पहले यह स्कूल मदरसा हुआ करता था, तब सम्राट चौधरी ने यहां से पढ़ाई की थी. अब इसका नाम बदल गया है. उन्होंने बताया, 

जिन शिक्षकों ने उनको पढ़ाया है वे रिटायर हो चुके हैं. लेकिन आज भी उनके किस्से हमें सुनने को मिलते हैं. हम लोगों को खुशी है कि हमारे स्कूल से पढ़ने वाले सम्राट चौधरी राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.

सम्राट चौधरी बीजेपी के ऐसे नेता हैं, जिनका RSS बैकग्राउंड नहीं है. उनके पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. शकुनी कभी नीतीश के करीबी रहे तो कभी लालू यादव के बगलगीर हुई. उनका नाम कुशवाहा समाज के बड़े नेताओं में है. वे कई बार विधायक और एक बार सांसद रहे हैं.

सम्राट चौधरी ने साल 1990 में एक्टिव पॉलिटिक्स में एंट्री ली. साल 2000 के विधानसभा में राजद के टिकट पर परबत्ता से जीतकर वो पहली बार विधायक बने. साल 2005 में जदयू के रामानंद सिंह ने उनको हरा दिया. फिर साल 2010 में सम्राट दोबारा इस सीट से जीते. साल 2014 में जदयू ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया. सम्राट चौधरी ने कुछ राजद विधायकों के साथ उनका समर्थन किया. बदले में मंत्री पद भी मिला. इसी साल उन्होंने जदयू जॉइन कर ली.

साल 2015 में जदयू और राजद का गठबंधन हुआ. सम्राट चौधरी की जगह रामानंद प्रसाद को परबत्ता से टिकट दिया गया. साल 2017 में सम्राट चौधरी ने जदयू से इस्तीफा दिया और बीजेपी जॉइन की. साल 2023 में उनको बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया. साल 2024 के शुरुआत में नीतीश राजद से अलग होकर बीजेपी के साथ आए. इस बार सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. साल 2025 में एनडीए की जीत के बाद सम्राट फिर से उपमुख्यमंत्री बनें. और अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे.

वीडियो: राजधानी : नीतीश की लगी मुहर ! बिहार में मुख्यमंत्री के लिए सम्राट चौधरी का नाम फाइनल?

Advertisement

Advertisement

()