AAP सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी, राज्यसभा में NDA का संख्याबल कितना हुआ?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी है कि राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने AAP के सात सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है.

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 27 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 7 सदस्यों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है. वहीं AAP के 10 से घटकर तीन सांसद रह गए हैं.
बीजेपी में शामिल होने वाले 7 सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं. राज्यसभा की ऑफिशियल वेबसाइट पर इन सांसदों को बीजेपी के सदस्य के तौर पर दिखाया जा रहा है.
संसदीय कार्य मंत्री और बीजेपी सांसद किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके जानकारी दी कि सभापति ने AAP के सातों सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही राज्यसभा में अब एनडीए की कुल 148 सीटें हो गई हैं. इसमें बीजेपी-113, टीडीपी-2, जदयू-4, शिवसेना-2, रालोद - 1, जेडी (एस)-1, एजीपी-1, एनसीपी -4, एआईएडीएमके-5, आरपीआई (अठावले)-1, राष्ट्रीय लोक मोर्चा -1 और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी (लिबरल) के 2 सांसद हैं.
इनके अलावा बीजेपी की सदस्यता नहीं लेने वाले 7 मनोनीत सदस्य, स्वतंत्र तौर पर राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा और MNF, NPP और PMK से एक-एक सदस्य भी एनडीए का हिस्सा हैं.
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी की सीटों की संख्या अब 10 से घटकर 3 रह गई है. पार्टी के फ्लोर लीडर संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता दिल्ली से अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. वहीं उनके साथ में पंजाब से राज्यसभा सदस्य के तौर पर भेजे गए बलबीर सिंह बचे हैं.
राज्यसभा के सभापति की मंजूरी के बाद ही AAP के सदस्यों को बीजेपी का सदस्य माना जा सकता है. अध्यक्ष की मंजूरी के बिना बीजेपी में मर्जर के दावे के बावजूद सातों सांसदों का AAP का ही सांसद माना जाता. क्योंकि 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 (1) (क) के मुताबिक, सदन के निर्वाचित सदस्य को उसी राजनीतिक दल का सदस्य माना जाएगा, जिसके द्वारा उसे सदस्य के तौर पर चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया था.
जून 2019 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के 6 सदस्यों में से चार ने बीजेपी में विलय करने का फैसला किया था. ये संख्या राज्यसभा में पार्टी की कुल संख्या का ठीक दो-तिहाई थी. दो दिन बाद ही तत्कालीन राज्यसभा अध्यक्ष एम वैंकैया नायडू ने विलय को मंजूरी दे दी. इसके बाद ये सांसद दल बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए जाने के खतरे से मुक्त हो गए थे.
वीडियो: 'AAP में टॉक्सिक वर्क कल्चर' पार्टी छोड़ने की क्या वजह बताई राघव चड्ढा ने?

