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'अडानी की रिहाई का सौदा किया', राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तीखा हमला किया

राहुल गांधी और कांग्रेस ने अडानी को अमेरिका में चल रहे कानूनी मसलों से छूट दिए जाने की खबरों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया है. उन्होंने पीएम मोदी पर अडानी को बचाने के लिए अमेरिका से ट्रेड डील में भारत के हितों की बलि देने का आरोप लगाया है.

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15 मई 2026 (अपडेटेड: 15 मई 2026, 06:37 PM IST)
rahul gandhi narendra modi gautam adani
राहुल गांधी ने पीएम पर अडानी को बचाने के लिए ट्रेड डील करने का आरोप लगाया है. (इंडिया टुडे)
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अमेरिका में गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे धोखाधड़ी और रिश्वत से जुड़े मामलों को वापस लिए जाने की खबरें चल रही हैं. इसको लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया है. उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को ‘अडानी की रिहाई की डील’ बताया है.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कॉम्प्रमाइज्ड पीएम ने ट्रेड डील नहीं, अडानी की रिहाई का सौदा किया.”

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने नवंबर 2026 में अडानी और उनके भतीजे समेत छह लोगों पर रिश्वत और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था. राहुल गांधी और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अडानी के खिलाफ हमलावर रहे हैं. राहुल के अलावा कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी अडानी से जुड़ी खबर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, 

अब यह साफ हो गया है कि पीएम ने अमेरिका के पक्ष में एकतरफा झुकी ट्रेड डील को क्यों स्वीकार किया. ये भी साफ हो गया कि 10 मई, 2025 को उन्होंने (पीएम मोदी) अचानक ऑपरेशन सिंदूर को क्यों रोक दिया. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव में राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने के बजाय उनकी धमकियों के आगे घुटने टेक दिए. रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अब मोदानी के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े सभी आरोपों को वापस लेने की तैयारी में है. आखिरकार, प्रधानमंत्री और कितना समझौता करेंगे?

अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहा मामला बंद होगा!

दरअसल, अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) में गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी के आपराधिक मामले को खत्म करने की तैयारी चल रही है. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी मामले को वापस लेने की दिशा में काम कर रहे हैं. DOJ इसी हफ्ते अडानी के खिलाफ लगे आरोपों को वापस लेने की घोषणा कर सकता है. 

वहीं अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) भी अडानी और उनके सहयोगियों के खिलाफ नवंबर 2024 में शुरू किए गए पैरलल सिविल फ्रॉड के मामले को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अगर ये मामला बंद होता है तो पिछले एक साल से अमेरिका में अडानी के खिलाफ चल रहे कानूनी विवाद का अंत हो सकता है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक गौतम अडानी को ये राहत दिलाने में उनकी लीगल टीम के लीडर रॉबर्ट गुफ्रा जूनियर का बड़ा हाथ है. वो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के करीबी वकीलों में गिने जाते हैं. NYT ने बताया कि रॉबर्ट की टीम ने जस्टिस डिपार्टमेंट के सामने ‘अजीब’ प्रस्ताव रखा था. इस कथित प्रस्ताव के तहत अडानी पर लगे आरोप ड्रॉप किए जाने के बदले अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ‘10 अरब डॉलर का निवेश किया जाता और 15 हजार नौकरियां पैदा की जातीं’.

अडानी ग्रुप की ओर से अब तक इस मामले में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि अडानी ग्रुप पहले दिन से इन आरोपों से इनकार करता रहा है. इन मामलों के खत्म होने से अडानी ग्रुप के लिए इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट के दरवाजे फिर से खुल जाएंगे. इससे ग्रुप को अपनी विस्तार की योजनाओं को अग्रेसिव स्ट्रैटजी के साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.

वीडियो: खर्चा-पानी: वेदांता ग्रुप ने अडानी को लेकर क्यों खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा?

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