राघव चड्ढा के लिए जब AAP 'गलत' नहीं थी तब उन्होंने BJP और मोदी सरकार के लिए क्या-क्या कहा?
राघव चड्ढा बीजेपी के साथ चले गए हैं, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में ‘अतीत के अवशेष’ बीतने के साथ खत्म नहीं होते. वह पदचिह्न की तरह उनके पीछे इकट्ठा हो जाते हैं.

‘गलत पार्टी’ में ‘सही आदमी’ होने का पता चलते ही राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ दिया. ऐलान के कुछ ही देर बाद वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हाथों भगवा गुलदस्ता लेते हुए मिठाई खाते दिखे. यानी आम आदमी पार्टी के 3 सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. वही बीजेपी, जिसके लिए कभी उनके विचार थे कि ‘वो गुंडों और अनपढ़ों की पार्टी’ है. वही बीजेपी जिस पर विरोधी पार्टियों के विधायक-सांसद खरीदने के लिए वह ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने का आरोप लगाते नहीं थकते थे. और वही बीजेपी, जिसके लिए राघव चड्ढा ने कहा था कि नोटबंदी करके वह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है.
राघव चड्ढा अब उसी बीजेपी के साथ चले गए हैं. लेकिन सोशल मीडिया के दौर में ‘अतीत के अवशेष’ बीतने के साथ खत्म नहीं होते. वह पदचिह्न की तरह आपके पीछे इकट्ठा होते रहते हैं और जरूरत पड़ने पर आईने की तरह आपके सामने रख दिए जाते हैं. बीजेपी जॉइन करने के बाद राघव चड्ढा के ‘पदचिह्न’ भी मिटे नहीं हैं. लोग अतीत के उनके बयानों को खोद-खोदकर सामने ला रहे हैं. इसमें सबसे ज्यादा वायरल 3 साल पहले (2023) दिया गया उनका एक इंटरव्यू है, जिसमें राघव चड्ढा बीजेपी को ‘गुंडों की पार्टी’ बता रहे हैं.
इस वीडियो में राघव चड्ढा कहते हैं,
ऑपरेशन लोटस परमेरा मानना है कि बीजेपी अनपढ़-गुंडों की पार्टी है. वे अपराधियों को संरक्षण देते हैं.
राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने के बाद AAP नेता संजय सिंह ने उन्हें ‘ऑपरेशन लोटस’ का शिकार बताया है. ये ऐसा शब्द-युग्म है, जिसे आम आदमी पार्टी अक्सर बीजेपी के उन अभियानों के लिए इस्तेमाल करती है, जिसमें दूसरी पार्टी के नेताओं को भगवा पार्टी में शामिल कराया जाता है. जाहिर है, AAP में रहते हुए राघव चड्ढा को भी इस मुहावरे से कोई खास बैर नहीं था. सितंबर 2022 में उन्होंने इसी मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए बीजेपी पर तगड़ा हमला किया था.
तब दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि पंजाब में सरकार गिराने के लिए बीजेपी ने 10 AAP विधायकों से संपर्क किया था. उन्हें 25-25 करोड़ के ऑफर भी दिए गए थे. इस पर राघव चड्ढा ने कहा था,
'ऑपरेशन लोटस' अब पंजाब पहुंच गया है. BJP के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने अपने दलालों और एजेंटों के जरिए पंजाब में आम आदमी पार्टी के 10 से ज्यादा विधायकों से संपर्क साधा है.
बीजेपी की कोशिश को ‘बेकार’ बताते हुए चड्ढा ने तब बड़े दावे से कहा था,
केजरीवाल के सिपाहीआम आदमी पार्टी के विधायक कांग्रेस के विधायक नहीं हैं. आम आदमी पार्टी के विधायक अरविंद केजरीवाल के सच्चे और वफादार सिपाही हैं. वे न तो जनता के जनादेश के साथ कभी विश्वासघात करेंगे और न ही पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे कभी तोड़ेंगे.
राघव चड्ढा यहीं नहीं रुके. उन्होंने ये भी कहा कि ‘ऑपरेशन लोटस’ उस राज्य में कभी कामयाब नहीं होगा जहां आम आदमी पार्टी सत्ता में है. ऐसा इसलिए क्योंकि AAP के विधायक अलग ही मिट्टी के बने हैं. उनकी वफ़ादारी पार्टी के प्रति है और उनके नेता केजरीवाल के प्रति है.
विधायकों की खरीद-फरोख्त की बीजेपी की कथित कोशिशों को निशाना बनाते हुए चड्ढा ने सवाल किया था, “BJP के पास इतना सारा पैसा आता कहां से है. उन्होंने पूछा कि बीजेपी सिर्फ पंजाब की सरकार गिराने के लिए 16-1700 करोड़ रुपये खर्च कर रही है तो सोचिए पार्टी के पास कितनी दौलत होगी. इस पैसे को कहां खपाया जा रहा है? यह पैसा कहां से आ रहा है? सीबीआई और ईडी जैसी तथाकथित 'स्वतंत्र' जांच एजेंसियां कहां हैं और वे क्या कर रही हैं?”
AAP नेता रहते हुए राघव मोदी सरकार के कट्टर आलोचक रह चुके हैं. 2025 के बजट के बाद राज्यसभा में दिया उनका भाषण सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. इसमें उन्होंने कहा था कि पिछले 10 सालों में टैक्स लगा-लगाकर मोदी सरकार ने देश के आम आदमी का खून चूस लिया है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार जो हमसे इतना टैक्स लेती है उसके बदले में देती क्या है? चड्ढा का जो वक्तव्य सबसे ज्यादा चर्चित हुआ, उसमें उन्होंने कहा था,
सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग परआज मुझे यह कहने में बिल्कुल भी गुरेज नहीं है कि आज के भारत में हम इंग्लैंड की तरह टैक्स देते हैं, लेकिन सेवाएं सोमालिया जैसी मिलती हैं.
सरकारी एजेंसियों से सरकार को अस्थिर करने का आरोप आम आदमी पार्टी तब से लगाती रही है, जब से उसने पहली बार दिल्ली में सरकार बनाई थी. साल 2018 में मोदी सरकार पर ऐसा ही आरोप राघव चड्ढा ने भी लगाया था. तब उन्होंने कहा था कि फरवरी 2015 में दिल्ली की विधानसभा चुनाव में अपने राजनीतिक जीवन में मिली सबसे करारी हार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और (तत्कालीन) भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली सरकार को माफ नहीं किया है. दिल्ली के लोगों से बदला लेने के लिए उन्होंने सारी एजेंसियों को दिल्ली सरकार को तबाह करने के लिए छोड़ दिया है.
चड्ढा ने तब मोदी सरकार पर ये आरोप भी लगाया था कि नोटबंदी के बाद उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जो देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हैं. खुद को राष्ट्रवादी कहने वाली सरकार भारत की सुरक्षा से खेल रही है. हालांकि, 8 साल बाद मोदी सरकार को लेकर राघव चड्ढा के विचार पूरी तरह बदल गए हैं. AAP छोड़ने के बाद 24 अप्रैल को राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई ऐसे मजबूत फ़ैसले लिए हैं जिन्हें लेने में शायद पहले के नेता हिचकिचाते थे. चाहे वह आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना हो या भारत को दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना. इतना ही नहीं, उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प के साथ काम करने को अपना सौभाग्य भी बताया.
जब केजरीवाल ‘कृष्ण’ थे, बीजेपी ‘कंस’ थीवफादारी भरी ये बातें राघव चड्ढा कभी आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के लिए करते थे. यह वफादारी ऐसी थी कि उन्होंने केजरीवाल को 'कृष्ण' और बीजेपी को 'कंस' तक कह दिया था. 16 अप्रैल 2023 को शराब घोटाले में फंसे केजरीवाल को सीबीआई के सामने पेश होना था. इसी समय राघव चड्ढा ने कहा,
कंस जानता था कि भगवान श्रीकृष्ण उसका नाश कर देंगे, इसलिए उसने श्रीकृष्ण को नुकसान पहुंचाने के लिए हर कोशिश की. अनेक षड्यंत्र रचे. लेकिन वह उनके सिर के एक बाल का भी नुकसान नहीं पहुंचा सका. ऐसे ही भाजपा जानती है कि आम आदमी पार्टी उनका पतन करेगी.
इन सबके अलावा बीजेपी के खिलाफ राघव चड्ढा सोशल मीडिया पर भी काफी मुखर रहे. लेकिन जब उनकी AAP से ठन गई और वह राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिए गए, तब उन्होंने बीजेपी को निशाना बनाने वाली अपनी सारी पोस्ट्स डिलीट कर दीं. आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे लेकर भी उनकी खूब लानत-मलामत की थी.
वीडियो: राजधानी: राघव चड्ढा और बीजेपी की सेटिंग के पीछे कौन?

