'बिना कुछ बताए ये फिर मदद मांगने लगे', PM मोदी की चिट्ठी पर खरगे ने दिया ये जवाब
जिस बिल में संशोधन को लेकर पीएम मोदी ने राजनीतिक दलों से समर्थन मांगा है, वो नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (महिला आरक्षण बिल) है. इसके तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल में संशोधन प्रस्ताव को लेकर सभी पार्टियों से सपोर्ट मांगा है. इसे लेकर उन्होंने सभी दलों को चिट्ठी लिखी है, जिस पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जवाब भी दिया है. खरगे ने कहा कि मोदी सरकार विधेयक के बारे में पूरी जानकारी दिए बिना विपक्षी दलों से समर्थन मांग रही है. इससे ये शक मजबूत होता है कि वह महिलाओं को सच में सशक्त नहीं बनाना चाहती है बल्कि इसका राजनीतिक फायदा उठाने के लिए जल्दबाजी कर रही है.
जिस बिल में संशोधन को लेकर पीएम मोदी ने राजनीतिक दलों से समर्थन मांगा है, वो नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (महिला आरक्षण बिल) है. इसके तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है. इस बिल को 2023 में संसद से पास कराया जा चुका है. इसी में अब एक नया संशोधन लाया जा रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि इसे 2027 की जनगणना से जोड़ने के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर लागू किया जाएगा. इससे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले आरक्षण को लागू किया जा सकेगा.
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अगले हफ्ते संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. ये सत्र पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के बीच चलेगा, जहां पर 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होनी है.
मोदी ने लिखी चिट्ठीमहिला आरक्षण बिल के संशोधन को पास कराने के लिए पीएम मोदी ने पत्र लिखकर राजनीतिक दलों से कहा कि साल 2023 में सभी दलों के सांसदों ने इस विधेयक का समर्थन किया था, जो एक यादगार क्षण था. इसने हमारी एकता दिखाई थी और पूरी दुनिया ने देखा कि देश की महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए सामूहिक रूप से एक अहम फैसला कैसे लिया गया. पीएम मोदी ने आगे कहा कि काफी सोचने-विचारने के बाद हमें लगा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश में लागू करने का समय आ गया है. ये जरूरी है कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव इस आरक्षण के साथ कराए जाएं.
पीएम ने कहा कि ये अच्छा रहेगा कि इस मुद्दे पर कई सांसद अपने विचार व्यक्त करेंगे. यह किसी एक दल या व्यक्ति विशेष से ऊपर उठने का समय है. ये महिलाओं के प्रति हमारी जिम्मेदारी दिखाने का क्षण है. तमाम पार्टियों ने लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की इच्छा जताई है और अब उस इच्छा को असलियत में बदलने का वक्त आ गया है.
कांग्रेस नेता ने दिया जवाबप्रधानमंत्री की इस चिट्ठी पर जवाब देते हुए कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सोशल मीडिया पर एक लंबी चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने मोदी सरकार की मंशा पर शक जताया है. खरगे ने कहा कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी में यह सत्र बुला रही है. उसका मकसद महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं है.
खरगे ने कहा कि जब संसद ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था, तब कांग्रेस ने मांग की थी कि इसे तुरंत प्रभावी किया जाए. उन्होंने लिखा कि तब से 30 महीने बीत गए हैं. अब बिना विपक्षी दलों को भरोसे में लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. मोदी सरकार परिसीमन के बारे में कोई जानकारी दिए बिना हमसे फिर से मदद मांग रही है. बिना परिसीमन और अन्य डिटेल्स के इस ऐतिहासिक कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना संभव नहीं है.

खरगे ने कहा,
आपने (पीएम मोदी ने) अपने पत्र में कहा कि आपकी सरकार ने इस बारे में पार्टियों से बात की है लेकिन मुझे खेद है कि यह दावा झूठा है. सभी विपक्षी दल सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 मई 2026 को जब राज्यों के चुनाव खत्म हो जाएंगे, तब संविधान संशोधनों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए.
खरगे ने कहा कि चुनावों के बीच में विशेष सत्र बुलाना हमारे इस विश्वास को और मजबूत करता है कि आपकी सरकार महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए विधेयक को लागू करने में जल्दबाजी कर रही है.
उन्होंने आगे कहा कि अगर यह विशेष सत्र सच में ‘लोकतंत्र को मजबूत करने’ और ‘सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने’ के लिए बुलाया गया है, जैसा कि पीएम मोदी ने अपने पत्र में लिखा है तो उनका सुझाव है कि सरकार 29 अप्रैल के बाद कभी भी सर्वदलीय बैठक बुलाए, जिसमें परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा हो.
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