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850 लोकसभा सीटें, 33% महिला आरक्षण, संसद के विशेष सत्र वाले विधेयकों की बड़ी बातें

आगामी 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने वाला है. केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल संशोधन बिल को सदन में पेश करेंगे. बताया गया कि इस संशोधन के जरिए संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किया जाएगा, ताकि लोकसभा सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से हो सके.

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14 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 14 अप्रैल 2026, 07:19 PM IST)
narendra modi delimitation bill
मोदी सरकार परिसीमन के लिए बिल लेकर आ ही है. (फोटो- India Today)
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देश में लोकसभा सीटों की संख्या अभी 543 है. बहुत जल्द ये संख्या 850 हो जाएगी. इनमें भी 33 फीसदी सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण रहेगा. केंद्र शासित प्रदेशों को 35 सीटें दी जाएंगी. इन सब बदलावों के लिए सरकार संविधान संशोधन करने जा रही है. इसके लिए तीन बिल लाए जा रहे हैं, जिनकी प्रतियां सांसदों को दे दी गई हैं. 

आगामी 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने वाला है. केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल संशोधन बिल को सदन में पेश करेंगे. बताया गया कि इस संशोधन के जरिए संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किया जाएगा, ताकि लोकसभा सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से हो सके.

अभी सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय है. साल 2001 में 84वां संविधान संशोधन हुआ था. इस अधिनियम में तय किया गया कि 2026 के बाद जो भी पहली जनगणना होगी, उसके पहले तक देश में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा स्थिर रखी जाएगी. देश में फिलहाल जनगणना कराई जा रही है. 1 अप्रैल से शुरू होकर इसके 2027 में समाप्त होने की उम्मीद है. इससे पहले ये संविधान संशोधन बिल लाया जा रहा है. इसके तहत एक परिसीमन आयोग बनाया जाएगा. 

निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करने की प्रक्रिया परिसीमन कहलाती है. 

परिसीमन आयोग का मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) आरक्षण जल्दी लागू करना और नए सिरे से परिसीमन शुरू करना है. सरकार के लाए नए विधेयक में प्रावधान है कि ताजा जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कर महिला आरक्षण लागू किया जाएगा. यह आरक्षण 15 सालों तक लागू रहेगा. आरक्षित सीटें अलग-अलग चुनावों में बदलती रहेंगी ताकि सभी इलाकों में महिलाओं को मौका मिल सके. 

इस विधेयक के तहत नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली सीटों की संख्या बदली जाएगी. साथ ही, संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र में जनसंख्या के अनुसार संतुलन बनाया जा सके. विधेयक में परिसीमन आयोग बनाने का प्रावधान है. इस आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड या वर्किंग जज होंगे. 

आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित कोई चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य के राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे. इस विधेयक की एक अहम बात यह है कि इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है. इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा. ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी.

परिसीमन आयोग अपने प्रस्तावों को सार्वजनिक करेगा और जनता से आपत्तियां और सुझाव भी लेगा. अंतिम फैसला गजट में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी होगा और इसके बाद होने वाले चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे.

विपक्ष क्या कह रहा है?

हालांकि, विपक्षी दलों ने परिसीमन को लेकर कुछ सुझाव भी दिए हैं. सोमवार, 13 अप्रैल को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या गणितीय रूप से ही नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी न्यायसंगत होनी चाहिए. दक्षिण भारत के जिन राज्यों की जनसंख्या बढ़त दर धीमी है, उन्होंने बार-बार चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या पर आधारित परिसीमन से लोकसभा में उत्तरी राज्यों को अनुचित लाभ मिल सकता है. क्योंकि उत्तर में सीटों का अनुपात ज्यादा होगा.

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