बंगाल की कुर्सी गई, ममता बनर्जी ने 'एक्स' पर बायो भी बदला, पर 'पूर्व CM' नहीं लिखा
पूर्व शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हुए, ममता ने खुद को "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (15वीं, 16वीं, 17वीं विधानसभा)" के रूप में पेश किया है. बायो में उन्हें तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भी बताया गया है.

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन चुकी है. शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर शपथ ले ली है. लेकिन हर राजनीतिक जंग सिर्फ चुनाव में ही नहीं लड़ी जाती. आज के मॉडर्न युग में सोशल मीडिया भी एक युद्ध का अखाड़ा ही है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक्स अकाउंट के बायो ने एक नई चर्चा छेड़ दी है. बंगाल चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया और गवर्नर को अपना इस्तीफा भी नहीं सौंपा.
9 मई की सुबह 11 बजे तक X पर उनके बायो में उन्हें ‘माननीय मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल’ बताया गया था. लेकिन जैसे ही शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ली, ममता बनर्जी ने अपने बायो में बदलाव कर दिया. उन्होंने जो लिखा वो चर्चा का विषय बन गया है.
'पूर्व सीएम' लिखने से बच रहीं ममताममता बनर्जी 15 साल से बंगाल के सीएम के पद पर काबिज थीं. राज्य को लोगों की नब्ज पर उनका अच्छा होल्ड था लेकिन भाजपा ने उन्हें चुनाव हरा दिया. पहले तो ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से मना किया और अब वो ‘एक्स’ के बायो के जरिए भाजपा को टारगेट करने की कोशिश कर रही हैं. ‘पूर्व’ शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हुए ममता ने खुद को ‘पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (15वीं, 16वीं, 17वीं विधानसभा)’ के रूप में पेश किया है. बायो में उन्हें तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भी बताया गया है. उन्होंने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी के अपने बायो को अपडेट करने से इनकार करने पर सोशल मीडिया पर बवाल कट रहा है. कई यूजर्स ने X और उसके मालिक, एलन मस्क को टैग करके यह मांग की कि उनका बायो अंदरूनी तौर पर बदल दिया जाए. कुछ लोगों ने तो उनके अकाउंट को सस्पेंड करने की भी मांग कर दी.

भले ही ममता बनर्जी पूर्व शब्द का इस्तेमाल करने से बच रही हों, इसके बावजूद उन्होंने बायो बदल कर ‘स्मार्ट प्ले’ करने की कोशिश की है. ममता का यह कदम इस बात का संकेत है कि उन्होंने आखिरकार अपनी हार मान ली है. ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि 7 मई के बाद ममता का पद अपने आप ही समाप्त हो गया था. चुनाव होने के बाद राज्यपाल आर एन रवि ने राज्य विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद उसे भंग कर दिया.
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