थलपति विजय ने पेरियार की नास्तिकता को नकारा, बोले- 'हम भगवान को मानने वाले'
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने विधानसभा में कहा कि उनकी पार्टी TVK पेरियार के सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को मानती है, लेकिन नास्तिकता पर उनके विचारों से सहमत नहीं है. विजय ने कहा कि उनकी पार्टी ईश्वर में विश्वास रखती है और अंबेडकर और कामराज की सोच से भी प्रेरित है.

तमिलनाडु की सत्ता पर द्रविड़ पार्टियों की अटूट पकड़ को तोड़ने वाले थलपति विजय ने साफ किया है कि उनकी पार्टी टीवीके नास्तिकता को नहीं मानती, जो ईवी रामास्वामी पेरियार की विचारधारा की महत्वपूर्ण विरासत है. विजय ने कहा कि वह पेरियार के तमाम सामाजिक सिद्धांतों को मानते हैं लेकिन वह नास्तिकता और धार्मिक विश्वासों पर उनके विचारों से सहमत नहीं हैं. पेरियार तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के जनक माने जाते हैं. 59 साल से लगातार सत्ता में रही द्रविड़ मुनेत्र कझगम और एआईएडीएमके इसी राजनीति पर आधारित पार्टियां हैं.
इन दोनों पार्टियों के वर्चस्व को तोड़कर जोसेफ विजय ने अपनी नई पार्टी से तमिलनाडु में कमाल कर दिया. पहली बार चुनावों में उतरी उनकी पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. कांग्रेस और अन्य दलों के गठबंधन से विजय ने अपनी सरकार बनाई. तब से उनकी राजनीतिक विचारधारा को लेकर सवाल किए जा रहे थे.
सोमवार, 22 जून को जोसेफ विजय ने तमिलनाडु विधानसभा के अंदर साफ किया कि उनकी पार्टी की विचारधारा नास्तिक नहीं है. विजय ने कहा,
पेरियार ने धार्मिक आस्था को स्वीकार नहीं किया था. उनके इस विचार को हमने स्वीकार नहीं किया. लेकिन हमने उनके व्यापक सिद्धांतों को पूरी तरह से अपनाया. हमने पेरियार की शिक्षाओं को अपनाया. लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि हम ईश्वर में विश्वास रखते हैं. हमने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि हम किसी की भी विचारधारा के विरोधी नहीं हैं.
राज्यपाल के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ के दौरान बोलते हुए विजय ने ये भी कहा कि उनकी सरकार ने पेरियार के साथ-साथ बीआर आंबेडकर और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री के कामराज से भी प्रेरणा ली है. उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार ने डॉ. आंबेडकर के समान अवसर और सामाजिक न्याय के आदर्शों को स्वीकार किया है. वहीं, कामराज के ईमानदार प्रशासन के मॉडल को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया है.
कौन थे पेरियार?पेरियार तमिलनाडु की राजनीति के सबसे असरदार विचारकों में से एक हैं. उन्हें राज्य में द्रविड़ आंदोलन का जनक भी कहा जाता है. अपनी राजनीति की शुरुआत में वो कांग्रेस से भी जुड़े. बाद में द्रविड़ कझगम नाम से अपना संगठन बनाया. इसी की नींव पर तमिलनाडु की दो बड़ी पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके की स्थापना हुई. दोनों ही पार्टियां 1967 से लगातार बारी-बारी से तमिलनाडु पर शासन करती रहीं, जिस सिलसिले को विजय की टीवीके ने 59 साल बाद यानी 2026 में तोड़ दिया.
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