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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'महाभियोग' खारिज

Impeachment motion Gyanesh Kumar rejected: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है. राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इसे रिजेक्ट कर दिया है. चीफ इलेक्शन कमिशन (CEC) को पद से हटाने वाले नोटिस पर INDIA गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने मिलकर साइन किया था.

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6 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 12:08 AM IST)
Impeachment motion Gyanesh Kumar rejected
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए 193 सांसदों ने साइन किए थे. (फोटो-इंडिया टुडे)
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करने वाला महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया गया. राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इसे रिजेक्ट कर दिया है. इस प्रस्ताव पर 12 मार्च को 193 विपक्षी सांसदों (राज्यसभा के 63 और लोकसभा के 130) ने साइन किए थे. 

यह नोटिस भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5), मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए सौंपा गया था. राज्यसभा के सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968 की धारा 3 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

चीफ इलेक्शन कमिशन को पद से हटाने वाले नोटिस पर INDIA गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने मिलकर साइन किया था. CEC को हटाने के लिए राज्यसभा में 50 सांसदों और लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी होते हैं. ये पहली बार है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए ऐसा नोटिस दिया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने वाली प्रक्रिया ही मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए अपनाई जाती है. चुनाव आयुक्त को संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के तहत हटाया जाता है. इसमें महाभियोग शब्द का उल्लेख नहीं है लेकिन प्रोसेस यही होती है.

नोटिस में क्या लगे थे आरोप?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिस में कुमार के खिलाफ सात आरोप लगाए गए थे. जैसे- पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाना, साबित दुर्व्यवहार, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर रुकावट डालना और बड़े पैमाने पर लोगों का वोट देने का अधिकार छीनना. विपक्ष ने बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए थे. 

आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया की वजह से कई वोटरों का वोट देने का अधिकार छिन गया. नोटिस में यह भी दावा किया गया कि CEC ने कुछ खास राजनीतिक पार्टियों का पक्ष लेते हुए पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया. रिपोर्ट के मुताबिक, इन आरोपों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया गया है. विपक्षी पार्टियों ने ज्ञानेश कुमार पर कई मौकों पर सत्ताधारी BJP की मदद करने का आरोप लगाया है.

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