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आम भाषण से अलग कैसे है राष्ट्र के नाम संबोधन? जिसे लेकर कांग्रेस मोदी पर सवाल उठा रही

पीएम के सम्बोधन का विरोध सिर्फ इसी वजह से हो रहा है कि इसमें सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया गया. कांग्रेस लगातार इस बात को लेकर हमलावर है.

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19 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 19 अप्रैल 2026, 06:52 PM IST)
congress accused pm modi misusing address to nation using it for personal political campaign
कांग्रेस का आरोप है कि पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक काम के लिए किया है (PHOTO-ANI)
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 18 अप्रैल को 'राष्ट्र के नाम संबोधन' किया. इसमें उन्होंने महिला आरक्षण बिल पास न होने पर अपनी बात रखी. पूरे संबोधन के दौरान पीएम विपक्षी पार्टियों, खासकर कांग्रेस पर हमलावर रहे और अब इसी सम्बोधन को लेकर कांग्रेस पीएम मोदी पर हमलावर है. कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम सम्बोधन का राजनीतिक इस्तेमाल किया है.

खरगे ने एक्स पर कहा कि हताश और निराश पीएम के पास पिछले 12 सालों में दिखाने के लिए कुछ भी सार्थक नहीं है. उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने आधिकारिक संबोधन को एक राजनीतिक भाषण में बदल दिया. यह भाषण कीचड़ उछालने और सरासर झूठ से भरा हुआ था. आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) पहले से ही लागू है और यह बिल्कुल साफ था कि PM मोदी ने अपने विरोधियों पर हमला करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया. उन्होंने आगे कहा, 

यह लोकतंत्र और भारत के संविधान का घोर अपमान है. मोदी जी ने कांग्रेस का जिक्र 59 बार किया, जबकि महिलाओं का जिक्र बमुश्किल कुछ ही बार किया. इससे देश को उनकी प्राथमिकताओं के बारे में सब कुछ पता चल जाता है. महिलाएं BJP की प्राथमिकता नहीं हैं. कांग्रेस है क्योंकि कांग्रेस इतिहास के सही पक्ष पर खड़ी है.

खरगे ने लिखा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन किया है. कांग्रेस ने ही 2010 में राज्यसभा में 'महिला आरक्षण बिल' पास करवाया था, ताकि वह बिल लैप्स न हो जाए. BJP उस बिल को लोकसभा में पास नहीं करवा पाई. खरगे के अलावा राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी पीएम पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 

मैंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना और मैं यह सोच रहा था कि प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री के रूप में बोल रहे हैं या संसद में बीजेपी के नेता के रूप में. प्रधानमंत्री के पीछे राष्ट्रीय झंडा था और वह भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर बोल रहे थे. जबकि चुनाव चल रहा है. यह भारत की राजनीति में एक नया निम्न स्तर है. 

कपिल सिब्बल ने कहा कि ये साफ तौर पर गलत है. लेकिन मुझे पता है कि न तो मुख्य चुनाव आयुक्त और न ही कोई अन्य संस्था इस पर कुछ करेगी.

इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि राष्ट्र के नाम संबोधन और आम भाषण से क्या अंतर होता है. 

 देश के नाम संबोधन का सीधा मतलब तो यह है कि इसका संदेश किसी एक व्यक्ति का न होकर पूरी सरकार के रुख को दिखाता है. प्रोटोकॉल के मुताबिक देश को संबोधित करने से पहले प्रधानमंत्री सबसे पहले भारत के राष्ट्रपति को जानकारी देते हैं. क्योंकि राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं. इस वजह से किसी भी बड़े राष्ट्रीय संदेश के बारे में उन्हें जानकारी देनी होती है. राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले उसकी मुख्य बात को गोपनीय रखा जाता है. उदाहरण के लिए 2016 में जब पीएम ने नोटबंदी की घोषणा की थी, तब तक किसी को कुछ नहीं पता था.

इससे संबोधन से पहले किसी भी तरह की जानकारी लीक होने या फिर अफवाह फैलने से बचा जा सकता है. एक बार जब ये तय हो जाए कि संबोधन होना है, तब सरकारी ब्रॉडकास्टर्स से लेकर तमाम चैनल्स तक को इसकी जानकारी दी जाती है जिससे संबोधन को पूरे देश तक पहुंचाया जा सके. अगर संबोधन किसी आपातकाल, महामारी या युद्ध जैसी कंडीशन में हो तो इसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, एक्सपर्ट और संबंधित मंत्रालयों से भी सुझाव लिए जाते हैं. इससे यह पक्का किया जाता है कि जो संबोधन होना है, वो सटीक और तथ्यों पर ही आधारित हो.

वीडियो: प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार को पुराना महिला आरक्षण बिल लाने की चुनौती क्यों दी?

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