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'अपने AAP' से कैसे दूर होते गए राघव चड्ढा? इनसाइट स्टोरी

डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाने के बाद वो खुलकर AAP के खिलाफ आ गए हैं. उन्होंने ‘एक्स’ पर वीडियो शेयर करके कहा कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा को बोलने न दिया जाए.

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3 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 12:05 AM IST)
Raghav Chadha
राघव चड्ढा को आप ने डिप्टी लीडर पद से हटा दिया. (फोटो- India Today)
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साल 2024 चुनावी साल था. लोकसभा चुनाव होने वाले थे. ठीक उसके पहले मार्च के महीने में पहली बार देश में किसी सिटिंग मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी हुई थी. वह मुख्यमंत्री दिल्ली के अरविंद केजरीवाल थे. शराब घोटाले के आरोप में ED ने केजरीवाल को उनके आवास से गिरफ्तार किया था. पूरे देश में इसी खबर की चर्चा थी. विपक्ष सरकार को घेर रहा था. आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इससे पहले पार्टी के बड़े-बड़े नेता जेल जा चुके थे. पहले मनीष सिसोदिया. फिर संजय सिंह और अब केजरीवाल भी. पार्टी में हड़कंप मचा था लेकिन राघव चड्ढा कहाँ थे? 

यही वो पहला मौका है, जब आम आदमी पार्टी को लेकर राघव चड्ढा की लॉयलिटी पर शक किया गया था. अरविंद केजरीवाल की ‘आंखों का तारा’ जिन्हें माना जाता था, वो अपनी पार्टी के बड़े नेताओं की गिरफ्तारियों के बीच आंख का इलाज कराने लंदन गए थे. इस घटना के दो साल बाद आम आदमी पार्टी के साथ उनकी कलह एकदम सतह पर आ गई है. पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है. इससे पहले कई विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से भी चलता कर दिया गया था. 

हालांकि, डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाने के बाद वो खुलकर AAP के खिलाफ आ गए हैं. उन्होंने ‘एक्स’ पर वीडियो शेयर करके कहा कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा को बोलने न दिया जाए. इस गंभीर आरोप के जवाब में पूरी आम आदमी पार्टी के समवेत पलटवार में राघव चड्ढा की इमेज ‘पीएम मोदी से डरा हुआ’ और ‘उनकी गोद में बैठा हुआ’ बना दी गई है. लेकिन ये सब हुआ कैसे? 

राघव चड्ढा की कहानी

राघव चड्ढा की आम आदमी पार्टी में जिस स्पीड से तरक्की हुई थी, वो नॉर्मल बात नहीं थी. ये साल 2011 था. देश में अन्ना आंदोलन की चिंगारी से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई आग की तरह फैल गई थी. इसी समय राघव चड्ढा ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन से जुड़ते हुए राजनीति में एंट्री लेते हैं. साल 2012 की गांधी जयंती पर अरविंद केजरीवाल ने AAP पार्टी बनाई. पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा भी इसी साल इस पार्टी में शामिल हुए. 

इसके बाद दिल्ली सरकार का बजट तैयार करने में मदद से लेकर पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के 9 सदस्यों में शामिल होकर बड़े नेताओं को सलाह देने तक में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई. 2019 के लोकसभा चुनाव में वह दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए. इसके एक साल बाद वह दिल्ली विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए. कार्यकाल पूरा करने से पहले ही मार्च 2022 में उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेज दिया गया.

अब शुरू होती है विवाद की कहानी.

साल 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) के कई बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. जांच और गिरफ्तारियां शुरू हो गईं. मई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी से शुरुआत हुई. सितंबर 2022 में AAP के कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर, फरवरी 2023 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, अक्टूबर 2023 में संजय सिंह और मार्च 2024 में खुद अरविंद केजरीवाल सलाखों के पीछे पहुंच गए. 

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, AAP के अंदरूनी सूत्रों का आरोप है कि इस दौरान राघव चड्ढा भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के कामकाज में ‘दखल’ दे रहे थे. इतना ही नहीं वो राज्यसभा में अपनी प्रोफाइल बढ़ाने की कोशिश भी करने लगे थे. ये सब तो ठीक है लेकिन सूत्र आगे बताते हैं कि वह जरूरी मौकों पर ‘गायब’ रहते थे. साल 2025 के दिल्ली चुनाव प्रचार से भी वो दूर रहे और सिर्फ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे.

इंडिया टुडे से जुड़े अमित भारद्वाज अपनी एक रिपोर्ट में बताते हैं कि जब केजरीवाल जेल में थे, तब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और सुनीता केजरीवाल उन गिने-चुने लोगों में थे, जिन्हें तिहाड़ जेल में केजरीवाल से मिलने की इजाजत थी लेकिन केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद चड्ढा की लंबी अनुपस्थिति ने आग में घी डालने का काम किया. सोशल मीडिया पर कट्टर 'आप' समर्थक भी पूछने लगे कि 'जब पार्टी गहरे संकट में है, तब राघव चड्ढा कहां हैं?' 

इसके अलावा, राज्यसभा सांसद के रूप में उन्हें एक गंभीर काम दिया गया था. उन्हें दिल्ली की मतदाता सूची की जांच करनी थी लेकिन चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ने अपना ये मजबूत किला खो दिया. AAP चुनाव में भाजपा के हाथों दिल्ली हार गई. इसके बाद पार्टी में बड़े बदलाव हुए. मनीष सिसोदिया को पंजाब की जिम्मेदारी मिली. गोवा, गुजरात और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारियां भी बंटीं लेकिन राघव चड्ढा का नाम किसी भी लिस्ट में नहीं था. 

ये पहला संकेत था जब लगा कि आम आदमी पार्टी राघव चड्ढा को दरकिनार करना शुरू कर चुकी है. इसी बीच एक बड़ी घटना हुई. संसद के बजट सत्र के दौरान जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला रही थी. तब उस प्रस्ताव पर राघव चड्ढा के हस्ताक्षर नहीं थे. उन्होंने इस प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किए थे. ये पार्टी लाइन का उल्लंघन तो था ही. पार्टी से बड़ी बगावत का इशारा भी था. आज जब आप के बड़े नेता राघव को निशाना बना रहे हैं तो उनके ताने में ये वाला केस जोरदार तरीके से सामने आ रहा है. 

अभी इसी हफ्ते की बात है. 30 मार्च को राघव चड्ढा का एक वीडियो एक्स पर वायरल हुआ. इसमें वो NDA शासित महाराष्ट्र के मुंबई एयरपोर्ट पर बने ‘उड़ान यात्री कैफे’ में चाय-कॉफी पीने चले गए. उनके पोस्ट से लगा कि वह उड़ान यात्री कैफे की तारीफ कर रहे हैं. लालू प्रसाद यादव एक बार संसद में साहिर लुधियानवी का एक शेर सुनाए थे. “तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं. तुम किसी और को चाहोगे तो मुसीबत होगी.”

राघव चड्ढा के साथ वही हुआ. पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाने के आरोप उन पर लग ही रहे थे. अब पार्टी के नेताओं ने उन पर ‘कम्प्रोमाज्ड’ होने का आरोप भी मढ़ दिया. आप के सारे बड़े नेताओं ने राघव पर जो आरोप लगाए हैं, उसमें उन्हें ‘नरेंद्र मोदी से डरा हुआ’ और ‘उनकी गोद में बैठा हुआ’ बताया गया है.

क्या बोले बड़े नेता 

पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने कहा कि राघव को संदेह का लाभ दिया गया था. हमें लगा कि शायद उनकी आंख में कोई समस्या थी. वह शायद डर के मारे नहीं भाग रहे थे लेकिन जब भी प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देने की जरूरत पड़ी, वो भाग गए. राघव प्रधानमंत्री मोदी की गोद में बैठे हैं. भगवंत मान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में गलत SIR, गुजरात में AAP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाने के बजाय राघव चड्ढा ने संसद कैंटीन में समोसे महंगे होने और पिज्जा की डिलीवरी में देरी का मुद्दा उठाया. मुझे लगता है कि वो भ्रष्ट हैं.

संजय सिंह ने कहा कि वह मोदी के खिलाफ आवाज नहीं निकालते हैं, पार्टी के कार्यकर्ताओं को गुजरात में पीटा जाता है, उस पर नहीं बोलते हैं. जब विपक्ष मुद्दों पर सदन से वॉकआउट करता है तो वॉकआउट नहीं करते. ये सारी चीजें हैं, जिसका जवाब देश उनसे मांग रहा है. 

वीडियो: राजधानी: राघव चड्ढा की AAP से अलगाव की पूरी कहानी

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