'परिसीमन बिल से किसी को नुकसान नहीं', लोकसभा में अमित शाह ने गणित समझाया
परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में बहस के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि परिसीमन का विरोध करना असल में एससी-एसटी का विरोध है.

परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में बहस के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि परिसीमन का विरोध करना असल में एससी-एसटी का विरोध है. कांग्रेस ने दशकों तक देश में परिसीमन लागू नहीं होने दिया और एससी-एसटी समुदायों को उनके अधिकारों से वंचित रखा. शाह ने कहा कि 50 साल तक कांग्रेस ने देश को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने दिया.
परिसीमन की जरूरत पर जोर देते हुए अमित शाह ने कहा कि देश में अभी 127 सीटें ऐसी हैं, जहां 20 लाख से ज्यादा वोटर्स हैं. संविधान में डिलिमेटशन का प्रावधान है, ताकि समय-समय पर उचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था हो सके. फिलहाल देश में कहीं 6 लाख लोगों पर एक प्रतिनिधि है और कुछ ऐसी सीटें हैं जहां 20 लाख लोगों का एक प्रतिनिधि है. देश के हर चुनाव क्षेत्र में हर एक वोट की कीमत बराबर नहीं है. 1976 में देश की आबादी 567.9 मिलियन थी और आज यह बढ़कर 1.4 बिलियन है.
अमित शाह ने कहा कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा. पांच राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल की फिलहाल लोकसभा सीटों की संख्या 129 है, जो कुल सीटों की संख्या का 23.76 प्रतिशत है. 50 प्रतिशत की बढ़त के बाद यह संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी, जो 816 सीटों वाली लोकसभा में 23.87 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करेगी. उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य को खासतौर पर दक्षिण के राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा. लक्षद्वीप हो या उत्तर प्रदेश. हर राज्य का संसद में निष्पक्ष प्रतिनिधित्व होगा.
अमित शाह ने कहा कि ‘एक व्यक्ति-एक वोट-एक मूल्य’ का यह सिद्धांत हमारे संविधान का मूल है और जिसे संविधान सभा ने तय किया था, उसे उसी संविधान की भावना के हिसाब से लागू किया जाना चाहिए.
अमित शाह के संबोधन के बाद संविधान संशोधन बिल पर पहले राउंड की वोटिंग हुई. इसमें बिल के पक्ष में 278 मत पड़े. बिल के खिलाफ 211 सांसदों ने मतदान किया. बिल को दो तिहाई बहुमत नहीं मिला है.
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