परिसीमन पर बोले अखिलेश यादव, 'मुस्लिम और OBC महिलाओं को मिलना चाहिए आरक्षण'
लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक से जुड़े 3 बिलों पर चर्चा चल रही है. विपक्षी पार्टियां महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का विरोध कर रही हैं. सपा नेता अखिलेश यादव ने जाति जनगणना कराने के बाद ही परिसीमन कराने की बात कही है. वहीं कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इन बिलों को असंवैधानिक करार दिया है.

लोकसभा में 16 अप्रैल को महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल पेश किए गए. विपक्षी पार्टियों ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े इन विधेयकों को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने जाति जनगणना के बाद ही परिसीमन कराने की मांग की है. साथ ही, उन्होंने इन बिलों के जरिए केंद्र सरकार पर पिछड़े वर्ग (ओबीसी) और मुस्लिम महिलाओं की हकमारी का आरोप लगाया है.
अखिलेश यादव ने कहा,
ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं. जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई कि लोकसभा क्षेत्र इस तरह से बनाए जाएं कि इसका फायदा इनको ही मिले. इसलिए हम चाहते हैं कि पहले जनगणना हो, जब आंकड़े आ जाएं तभी परिसीमन हो. हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़े वर्ग (OBC) और मुस्लिम महिलाओं को जोड़कर भी जनगणना हो.
अखिलेश यादव ने परिसीमन बिल पर बीजेपी और सरकार की नीयत पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा,
सपा महिला आरक्षण के पक्ष में है. डॉ. लोहिया हमेशा जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस के पक्ष में रहे. हम भी उसी राह पर हैं. ये आरक्षण हमारे आह्वान को और मजबूत कर रहा है. अब भारतीय जनता पार्टी ‘नारी को नारा’ बनाने की कोशिश कर रही है. जिन्होंने नारी को अपने संगठन में नहीं रखा वे उसके मान-सम्मान को कैसे रखेंगे.
सपा अध्यक्ष ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा,
कई साल से ये लोग सरकार में हैं. लेकिन हम दुनिया के आंकड़े देखें तो हम जेंडर इक्वालिटी में कहां खड़े हैं. इनकी खुद की सरकार देखें तो 21 जगह सरकार है, लेकिन कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं. जो दिल्ली की हैं भी, वे हाफ सीएम हैं.
कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल का विरोध करते हुए इसे भारत के संघीय ढांचे पर एक बुनियादी हमला बताया है. उन्होंने कहा,
2023 में संसद ने महिला आरक्षण के लिए विधेयक पारित किया गया था. विपक्ष ने इसका समर्थन किया. राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत सभी विपक्षी नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि इसे 2024 के चुनावों में लागू किया जाए. फिर 2024 के चुनावों में इसे लागू क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की मंशा संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े उपायों को हड़पने की है. उन्होंने सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की. तृणमूल कांग्रेस भी इस विधेयक का विरोध कर रही हैं. TMC सांसद काकोली घोष ने कहा,
हम इस बिल का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसमें महिलाओं का आरक्षण परिसीमन से जोड़ा गया है.
टीएमसी सांसद ने कहा कि समानता का अधिकार जन्म से सबको मिला है. ये लोकतांत्रिक अधिकारों पर निर्भर करता है. उनके मुताबिक समानता का अधिकार किसी राजनीतिक प्रक्रिया पर निर्भर नहीं होना चाहिए. महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के सरकार के फैसले के विरोध में पूरा विपक्ष लामबंद दिख रहा है. बिल के संसद में पेश किए जाने के एक दिन पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी एक वीडियो जारी करके इस पर सवाल उठाए हैं.
वीडियो: नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट को लेकर अखिलेश यादव ने योगी सरकार से क्या कहा?

