आमतौर पर जब कोई लड़की कहती है कि उसे पीरियड का दर्द हो रहा है, वो दफ्तर नहीं आपाएगी या घर के काम नहीं कर पाएगी तो उसे पिछले जनरेशन की औरतों के उदाहरण दिए जातेहैं. कि देखो हमारी मां ने तो कभी छुट्टी नहीं ली, हमको तो कभी पता भी नहीं चलता थाकि उनके ‘महीने के वो दिन’ कब आते हैं. कभी किसी खिलाड़ी को देखा है, पीरियड केदर्द के नाम पर ब्रेक लेते. सच ये है कि औरतों की इन दोनों ही प्रजातियों के पासकभी पीरियड में रेस्ट करने का ऑप्शन ही नहीं रहा. मांओं के हिस्से में हमेशा रही घरकी पूरी जिम्मेदारी, खाना नहीं बनाएंगी तो पति-बच्चे खाएंगे क्या, घर बिखरा पड़ा हैकोई आएगा तो क्या कहेगा. और वो काम में लगी रहीं, पीरियड के दर्द में, बुखार में,शरीर के दर्द में. पीरियड हर महीने होने वाली एक नैचुरल प्रक्रिया है. उसमें होनेवाला दर्द भी उसका एक पार्ट है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि उस दर्द में आपकोरेस्ट करने का अधिकार नहीं है.