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बेटा पैदा करने के लिए पति ने पत्नी के कपड़े उतारकर सबके सामने नहलाया!

तांत्रिक ने कहा था, सबके सामने झरने पर नहाएगी तो बेटा पैदा होगा.

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24 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 24 अगस्त 2022, 04:41 PM IST)
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महिला ने अपने पति, सास ससुर और तांत्रिक के खिलाफ केस दर्ज़ करवा दिया है /(सांकेतिक फोटो)
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महाराष्ट्र के पुणे में एक महिला को नग्न कर सबके सामने नहाने पर मजबूर किया गया. ये ज्यादती महिला के पति और ससुराल वालों ने एक तांत्रिक के कहने पर की. तांत्रिक ने महिला के परिवारवालों से कहा था कि ऐसा करने से महिला को बेटा पैदा होगा. महिला ने तांत्रिक, पति और सास-ससुर के खिलाफ 21 अगस्त को केस दर्ज करवाया, पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

बेटा पैदा हो, इसके लिए परेशान करते थे ससुराल वाले

महिला का पति पेशे से बिजनेसमैन है. पीड़ित महिला का आरोप है कि उसका पति और सास-ससुर अक्सर बच्चे को लेकर उसे ताने मारते थे. बेटा पैदा करने का दबाव उस पर बनाया जा रहा था. आरोप है कि साल 2013 से ही ससुराल वाले पीड़िता को दहेज के लिए भी प्रताड़ित कर रहे थे. महिला का कहना है कि ससुराल वाले जादू-टोने पर यकीन करते थे, इस वजह से उससे अलग-अलग तरह के टोटके करवाए जाते थे.

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, महिला के ससुराल वाले कोल्हापुर के मौलाना बाबा जमादार नाम के एक तांत्रिक के संपर्क में आए. इस तांत्रिक ने दावा किया कि महिला पर किसी ने काला जादू किया है. उसने कहा कि अगर महिला महाराष्ट्र के रायगड जिले के एक झरने पर नग्न होकर सबके सामने नहाएगी तो उसको बेटा पैदा होगा. इसके बाद पति और सास-ससुर ने पीड़िता पर इसका दबाव डाला और उसे झरने पर नहाना पड़ा.

महिला को ये भी आरोप है कि उसके पति ने उसका फर्जी साइन करके उसके नाम पर 75 लाख का लोन भी लिया है.

महिला ने पुणे के भारतीय विद्यापीठ पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया है. आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 498A (पति या पति के रिश्तेदार द्वारा क्रूरता),  323( किसी को चोट पहुंचाना), 420(धोखाधड़ी), 504 (किसी व्यक्ति को उकसाने के इरादे से जानबूझकर उसका अपमान करना ), 406(विश्वास का आपराधिक हनन) और अंधश्रद्धा उन्मूलन कानून की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

लड़का पैदा होने के पीछे का साइंस क्या है?

ये तो हुई केस और अपराध की बात. अब थोड़ा साइंस की बात भी कर लेते हैं. हमारे आसपास बहुत सारे लोग हैं जो ये मानते हैं कि चूंकि बच्चा लड़की के पेट में पलता-बढ़ता है तो उसे कुछ खिला-पिला देने से, उससे पूजा पाठ करवाने से ये सुनिश्चित किया जा सकता है कि लड़का होगा या लड़की. पर ऐसा है नहीं. साइंस ये कहता है कि ये पुरुष पर निर्भर करता है कि बेटा होगा या बेटी. और ये तो मिडिल स्कूल के विज्ञान में पढ़ाया जाता है.

हमारे शरीर में दो क्रोमोज़ोम्स होते हैं. लड़की के में XX और लड़कों के में XY. तो जब रीप्रोडक्शन होता है तो लड़की के पास तो XX ही होता है देने के लिए. तो अब, अगर लड़के का X क्रोमोज़ोम लड़की के एक्स से मिलता है तो लड़की पैदा होती है. और लड़के का Y लड़की के X से मिलता है तो लड़का पैदा होता है. तो लड़का होगा या लड़की इसकी जिम्मेदारी पुरुष की होती है. और कुछ भी खिलापिलाकर ये डिसाइड नहीं किया जा सकता है कि लड़की होगी या लड़का.

साइंस समझ लिया, अब कानून की बात कर लेते हैं. कानूनी तौर पर किसी भी व्यक्ति को इस बात के लिए प्रताड़ित नहीं किया जा सकता है कि उसका बच्चा किस जेंडर का है या उसका बच्चा नहीं है. ये मेंटल हरासमेंट के दायरे में आता है. और हां, किसी क्लिनिक पर जाकर ये पता करने की कोशिश बिल्कुल न करें कि गर्भ में लड़का है या लड़की. इसके लिए आपको डेफिनेटली जेल हो सकती है.

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