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नसबंदी के बाद पुरुषों में सेक्स करने की क्षमता कम हो जाती है?

नसबंदी से आदमी की सेक्स करने की ताकत कम होती है? डॉक्टर्स कहते हैं नसबंदी के 3-7 दिन बाद आप सेक्स कर सकते हैं

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Vasectomy, Vasectomy process, Male sterelization
पुरुषों की नसबंदी को उनके पौरुष से जोड़कर देखा जाता है.
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सोनल पटेरिया
6 मई 2022 (अपडेटेड: 6 मई 2022, 08:50 PM IST)
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कुछ दिनों से ट्विटर पर एक ऐसे टॉपिक पर बात हो रही है जिपसर अमूमन लोग खुलकर बात नहीं करते. या दबी छिपी आवाज़ में बात करते हैं जिस वजह से लोगों में इससे जुड़े बहुत सारे मिथ हैं और उन्हें आधी अधूरी जानकारी है. इसलिए मैंने सोचा विस्तार से इसपर म्याऊं में ही बात की जाए. टॉपिक है- पुरुषों की नसबंदी.

डेज़ी ज़ीटलैली नाम की एक ट्विटर यूजर ने सितंबर 2020 में एक ट्वीट किया था. तीन ग्राफिकल तस्वीरों के ज़रिए उन्होंने बताया था कि समाज ने नसबंदी का सारा बोझ गलत जेंडर पर डाल रखा है.

साफ़ है, समाज बर्थ कंट्रोल की ज़िम्मेदारी गलत जेंडर पर डाल रहा है. साइंस गलत व्यक्ति के लिए पिल्स और हॉर्मोन चेंज करने वाली डिवाइस बनाने में व्यस्त है.
डेज़ी का इशारा पुरुषों के गर्भनिरोधक और नसबंदी की और था. महिलाओं के लिए तो कंट्रासेप्टिव पिल्स, कंट्रासेप्टिव इम्प्लांट, कॉपर टी, कंडोम और नसबंदी जैसे तमाम ऑप्शनस हैं. पुरुषों के लिए सिर्फ कंडोम और नसबंदी है. आज तक पुरुषों के लिए कंट्रासेप्टिव पिल्स तक मार्केट में नहीं आ पाई है.

अब आते हैं दुसरे ट्वीट पर. फ्लिक नाम के एक यूजर ने लिखा,

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फ्लिक के इस ट्वीट पर खूब रिएक्शन आए.

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ये बात सच है कि लोगों को पुरुषों की नसबंदी के बारे बहुत कम जानकारी है या आधी अधूरी जानकारी है. इसे लेकर खूब मिथ हैं. कई लोगों को लगता है नसबंदी कराने के बाद पुरुष सेक्स नहीं कर पाएंगे, नपुंसक हो जाएंगे, सेक्स करने में मज़ा नहीं आएगा, उन्हें सुख नहीं मिलेगा, बहुत दर्द होगा. लोगों को इसका प्रोसेस भी सही से नही पता. लोगों को इस बारे में सिमित जानकारी की एक वजह ये भी है कि लोग इसपर खुलकर बात नहीं करते. दबी छिपी आवाज़ में जो किसी से सुना उसे ही सच मान बैठते हैं.  

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जब कोई आदमी या औरत बच्चा नहीं पैदा करना चाहता है तब वो गर्भ निरोध के तरीकों का इस्तेमाल करता है. गर्भ निरोध के अलग अलग तरीके होते हैं. जैसे कंडोम, पिल्स और कंट्रासेप्टिव का इस्तेमाल कर के गर्भ धारण से बचा जा सकता है. ये टेम्पररी तरीके हैं. स्थाई तरीका नसबंदी है. जो पुरुष भी करवा सकते हैं और औरत भी. नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट बताती है की 2019 में इंडिया में नसबंदी के जितने ऑपरेशन हुए हैं उसमे 91% महिलाओं ने कराये हैं और केवल 6.8 % पुरुषों ने करवाए हैं.

सबसे पहले तो ये समझते हैं कि पुरुषों में नसबंदी आखिर होती कैसे है?

पुरुष नसबंदी एक सामान्य ऑपरेशन है जो आपके शरीर से शुक्राणु यानी स्पर्म को निकलने से रोकता है, इसलिए आप किसी को गर्भवती नहीं कर सकते हैं. स्पर्म और सीमन में फर्क होता है. सेक्स के दौरान पुरुषों में जो फ्लूइड इजेक्ट होता है, वो कई सारे हॉर्मोन से मिलकर बनता है. उसमें एक एलिमेंट स्पर्म होता है. नसबंदी के बाद भी फ्लूइड वैसे ही इजेक्ट होता बस उसमें स्पर्म्स नहीं होते, जो बच्चा पैदा करने के लिए ज़िम्मेदार सेल है.
पुरुषों की नसबंदी में उन ट्यूब को काटा जाता है या सील किया जाता है जो बॉल्स यानि अंडकोषों (testicles) से स्पर्म (sperm) को पीनिस (penis)  तक ले जाते हैं. इसमें लगभग 15 मिनट लगते हैं और आमतौर पर ये लोकल एनेस्थैटिक के प्रभाव में किया जाता है ताकि पुरुष को कोई दर्द महसूस न हो.

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डॉक्टर्स कहते हैं नसबंदी के 3-7 दिन बाद आप सेक्स कर सकते हैं. नसबंदी से सेक्शुअल लाइफ में कोई असर नहीं पड़ता. पुरुषों में सेक्स की इच्छा टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन की वजह से होती है. नसबंदी का इसपर कोई असर नहीं होता. इससे इरेक्शन और ऑरगैस्म में भी कोई फर्क नहीं पड़ता. जो सीमेन रिलीज़ होता है वो भी पहले जैसा ही होता है. कलर और टेक्सचर में भी. उस फ्लूइड में केवल स्पर्म नहीं होता, बाकि सब एकदम पहले जैसा ही होता है.

नसबंदी से आदमी की सेक्स करने की ताकत कम होती है?

ये तो हुई साइंस की बात. अब बात करते हैं इससे जुड़े सोशल स्टिग्मा की. समाज में एक आदमी की मर्दानगी और औरत के नारीत्व को उनके बच्चा पैदा करने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है. पुरुषों की नसबंदी को उनके पौरुष से जोड़कर देखा जाता है.
फ़र्ज़ करिए एक परिवार है. परिवार में पति पत्नी ने तय किया अब बच्चे नहीं चाहिए, तो नसबंदी का ओनस महिला पर डाला जाएगा. लोग ये मानते हैं कि खुदा न खस्ता अगर बच्चे को आगे जाकर कुछ हो गया या उन्हें बाद में बच्चा चाहिए हो तो पुरुष का स्पर्म यूज़ कर के बच्चा पैदा कर सकते हैं. दूसरी महिला की कोख में या सरोगसी और IVF के ज़रिए. लेकिन अगर पुरुष नसबंदी करा लेगा तो महिला की कोख में किसी और आदमी के स्पर्म का इस्तेमाल करना होगा, और उस बच्चे में उस पुरुष या उसके खानदान का अंश नहीं होगा. वो उनका बच्चा नहीं होगा. इसके अलावा ये भी समझा जाता है कि इससे आदमी की सेक्स करने की ताकत कम हो जाएगी या जो आदमी बच्चा नहीं पैदा कर सकता तो काहे का मर्द.

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समाज में माना जाता है कि जब बच्चे महिला पैदा करती है तो फैमिली प्लानिंग की ज़िम्मेदारी भी उसी की हुई. वो ही नसबंदी कराए. लेकिन ये सच नहीं है. महिला अकेले बच्चा पैदा नहीं कर सकती, मतलब बिना पुरुष के स्पर्म के. बच्चा पैदा करने में दोनों की बराबर भूमिका है. वैसे ही, फैमिली प्लानिंग में भी दोनों की ही होनी चाहिए.

मैं ये नहीं कह रही की महिलाएं नसबंदी न कराएं, मैं बस इतना कह रही हूं की इसमें पुरुषों की भी बराबर भूमिका होनी चाहिए. आज उन्हें भी ज़रूरत है कि वो मर्दानगी की झूठी परिभाषा से बाहर निकलें और मिथ पर भरोसा करना बंद करें, नसबंदी को टैबू न समझें और फैमिली प्लानिंग में बराबर योगदान दें.

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