क्यों सबसे पहले संदीप रेड्डी को देखनी चाहिए तापसी पन्नू की फिल्म 'थप्पड़'?
वो फिल्म जो 'थप्पड़' में प्रेम नहीं खोजती.

सिर्फ एक थप्पड़. लेकिन नहीं मार सकता.
तापसी पन्नू की फिल्म 'थप्पड़' का ट्रेलर आ गया है. ट्रेलर की शुरुआत हिंदू मैरिज एक्ट के 'सेक्शन 9' के जिक्र से होती है. जिसमें एक महिला या पुरुष बिना किसी ठोस तर्क या एक्सक्यूज के शादी तोड़ सकते हैं. तापसी इस सेक्शन के आधार पर अपनी शादी खत्म करना चाहती हैं. क्योंकि वो जिस वजह से पति से तलाक लेना चाहती हैं, वो दुनिया की नजरों में बहुत सामान्य सी बात है. सिर्फ एक थप्पड़, जो उसका पति उसे पार्टी में, कई लोगों के बीच मारता है.
ट्रेलर में तापसी की वकील को जब तलाक की वजह पता चलती है, तो हैरान होते हुए कहती है-
तो सिर्फ एक थप्पड़
इसके जवाब में वो कहती है-
सिर्फ एक थप्पड़, लेकिन नहीं मार सकता.

'थप्पड़' के एक सीन में तापसी पन्नू और उनके पति के किरदार में पावेल गुलाटी.
दुनिया की नजरों में किसी रिश्ते में बहुत ही नॉर्मल सी चीज उनके लिए नॉर्मल नहीं हैं. एक थप्पड़ के बाद वो अपनी शादी को खत्म करने का फैसला कर लेती हैं. इसके बाद उन्हें अपने पेरेंट्स को, अपने पति और उसके पेरेंट्स को, यहां तक कि खुद के वकील को समझाना पड़ता है. ट्रेलर में वो कहती हैं-
उस एक थप्पड़ से मुझे वो सारी अनफेयर चीज़ें साफ-साफ दिखने लग गईं, जिन्हें मैं अनदेखा करके मूव ऑन करती जा रही थी.
2.54 मिनट के इस ट्रेलर में एक डायलॉग आपको एक साल पहले की उस कॉन्ट्रोवर्शियल फिल्म की याद दिला देता है, जिसने महिलाओं के साथ हिंसा का पर्दे पर काफी महिमामंडन किया था. डायलॉग है-
सर मारपीट भी तो प्यार जताने का एक तरीका है.
इस एक लाइन पर तीन सुपरहिट फिल्में आ चुकी हैं. 'अर्जुन रेड्डी' (2017), 'कबीर सिंह' (2019) और 'आदित्य वर्मा' (2019). तीनों ही फिल्मों में हीरो-हीरोइन पर हावी रहता है. उसे टॉर्चर करता है, धमकाता है, उसे सेल्फ डाउट से भर देता है, उसे 'थप्पड़' मारता है.
कहानी में उस थप्पड़ को हीरोइन की गलती, बुरी सिचुएशन और हीरो के गुस्से से जस्टिफाई किया जाता है. असल जिदंगी में इसे जस्टिफाई करने की जिम्मेदारी लेते हैं, 'कबीर सिंह' और 'अर्जुन रेड्डी' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा. संदीप तेलुगु फिल्मों के पॉपुलर डायरेक्टर हैं. अनुपमा चोपड़ा को दिए एक इंटरव्यू में संदीप ने कहा-
जब आप किसी महिला से (या कोई महिला पुरुष से) प्यार में होते हैं और ज़्यादा कनेक्टेड होते हैं, इसमें बहुत ईमानदारी होती है. अगर आप शारीरिक रूप से खुद को व्यक्त नहीं कर रहे, अगर आपके पास एक-दूसरे को थप्पड़ मारने की आज़ादी नहीं है, मुझे वहां कुछ नहीं दिखाई देता. प्रीति ने कबीर (फिल्म 'कबीर सिंह' के मुख्य किरदार) को बेवजह थप्पड़ मारा था, कबीर के पास कम से कम वजह तो थी. अगर आप अपनी पत्नी-गर्लफ्रेंड को जब चाहें तब थप्पड़ नहीं मार सकते, छू नहीं सकते, किस नहीं कर सकते, मुझे वहां कोई इमोशन नज़र नहीं आता. ये सच्चा प्यार नहीं हो सकता.
फिल्म में हीरोइन के खिलाफ हिंसा को ग्लोरिफाई करने पर उनकी आलोचना हुई. लेकिन उन्होंने अलग-अलग बयानों में अपनी सोच और फिल्म को सही ठहराने की कोशिश की. अनुपमा चोपड़ा को दिए इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा-
शायद उन्होंने कभी प्यार को सही तरीके से महसूस ही नहीं किया है. ये उनके लिए नया है. जहां तक तेलुगु फिल्म (अर्जुन रेड्डी) की बात है, लोगों ने वहां फिल्म से जुड़ी अलग-अलग चीज़ों को क्रिटिसाइज़ किया. लेकिन यहां लोग सिर्फ फेमिनिस्ट साइड को पकड़कर बैठ गए हैं. वो किसी और बारे में बात ही नहीं करते. शायद वो मुझसे नफरत करते हैं.

‘कबीर सिंह’ के इसी सीन में शाहिद का किरदार कबीर अपनी प्रेमिका को थप्पड़ मारकर और बेइज्ज़ती करके चला जाता है.
विजय देवरकोंडा ने 'अर्जुन रेड्डी' में लीड रोल निभाया था. तो उनसे भी थप्पड़ वाले सीन पर सवाल पूछे गए. फिल्म कंपेनियन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने जो जवाब दिया, वो संदीप के जवाब से बहुत अलग नहीं था. उन्होंने कहा-
हर तरफ चीजें खराब हो रही हैं. पॉल्यूशन, पानी, लोग, पॉलिसी, लोगों का व्यवहार, मेरे हिसाब से हर तरफ बुराई मौजूद है, तो क्या अच्छी फिल्में बनाने से ये सब ठीक हो जाएगा? नहीं. मैं अभी इन दोनों चीजों के बीच में झूल रहा हूं कि इस तरह की फिल्म मैं करना चाहता हूं और इस फिल्म की सामाजिक जिम्मेदारी क्या है? समाज सुधारने की पूरी जिम्मेदारी सिनेमा पर नहीं थोपी जा सकती.
एक कपल है, जो एक दूसरे को बहुत प्यार करता है. मैं फिल्म को जस्टिफाई नहीं कर रहा है, लेकिन ये संभव है कि एक लड़का और लड़की एक-दूसरे के साथ कंफर्टेबल हैं. प्यार करते हैं. वो एक-दूसरे को थोड़ा-बहुत मार सकते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि वो गलत है. लेकिन अगर आपने बचपन में घरेलू हिंसा देखी है. या अपने पिता से अपनी मां को पिटते देखा है, तो आपको 'अर्जुन रेड्डी' या 'कबीर सिंह' बुरी फिल्में लग सकती हैं.
एक्टर से डायरेक्टर तक मानते हैं कि थप्पड़ भी प्रेम की अभिव्यक्ति है. लेकिन असल में थप्पड़ मारना या खाना, घरेलू हिंसा करना या सहना है. ये समझने के लिए इन दोनों को ही 'थप्पड़' फिल्म सबसे पहले देखनी चाहिए.
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act 2005) के मुताबिक, किसी महिला के साथ मौखिक और भावनात्मक हिंसा, आर्थिक हिंसा, लैंगिक शोषण और हिंसा, शारीरिक हिंसा घरेलू हिंसा के अंदर आती है.
अब कुछ फैक्ट्स पर नजर डाल लेते हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के मुताबिक-
-भारत में हर तीसरी महिला 15 साल की उम्र तक घरेलू हिंसा झेल चुकी होती है.
-31 फीसदी महिलाएं अपने पति से इमोशनल, फिजिकल सेक्सुअल हिंसा का शिकार हो चुकी होती हैं.
-घरेलू हिंसा में सबसे कॉमन 27 परसेंट शारीरिक हिंसा है.
ट्रेलर में तापसी के घर में काम करने वाली महिला कहती है-
कल पति ने फिर मारा, लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर किसी दिन उसने अंदर से कुंडी लगा ली, तो तू कहां जाएगी?

ऊपर इसी सीन की बात हो रही है.
मारपीट पिटाई कभी भी पहली बार का हवाला देकर अनदेखा नहीं की जा सकती. एक बार थप्पड़ खाकर चुप रह जाने का मतलब आगे अनगिनत थप्पड़ भी सह जाना. क्योंकि थप्पड़ पहला और आखिरी नहीं होता.
उसी सर्वे के मुताबिक, घरेलू हिंसा में दूसरा सबसे कॉमन क्राइम इमोशनल वायलेंस है.
तापसी की मां के किरदार में रत्ना पाठक कहती हैं-
बस यही सुनना रह गया था, बेटी डायवॉर्स करेगी,
सास कहती है-
जाने देना बेटा, थोड़ा बर्दाश्त करना सीखना चाहिए औरतों को.
उनकी वकील कहती है-
हर रिश्ता फ्लॉड होता है, जोड़कर रखना पड़ता है.
एक और महिला किरदार कहती है-
सबसे ज्यादा नुकसान अमू (तापसी पन्नू के किरदार का नाम) का है, इसके ऊपर ही डायवॉर्सी का टैग लगेगा.
पहली बार मारा है. या सिर्फ एक बार मारा है, या सिर्फ एक थप्पड़ मारा है, तर्क नहीं होते. सब कुछ सह रही औरत इस एक थप्पड़ के बाद गिवअप कर देती है. ये वो हद होती है, जिसके अंदर औरत न चाहते हुए भी सबकुछ सह रही होती है. लेकिन इस हद के पार होने के बाद सब खत्म हो जाता है. समाज के लिए नॉर्मल सी दिखने वाली ये घटना एक औरत की जिंदगी को बदल देती है.
इस मूवी को डायरेक्ट किया है अनुभव सुशीला सिन्हा ने. ये 28 फरवरी, 2020 को रिलीज़ होगी.
इस ट्रेलर में सबसे गौर करने लायक बात 55 सेकेंड पर स्क्रीन पर आती है-
ये कहानी प्रेरित है, आपसे और उससे
फिल्म 'थप्पड़' के ट्रेलर को नीचे देख सकते हैं:
Video : करीना कपूर के इस वायरल वीडियो पर उन्हें ट्रोल करने से पहले ये देख लीजिए

