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हिजाब विवादः कर्नाटक के मंत्री बोले- जिनको नियम नहीं मानना, वो दूसरे ऑप्शन देख लें

8 फरवरी को कर्नाटक हाईकोर्ट में होगी इस मामले की सुनवाई.

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" क्लास में बैठने के लिए निर्धारित यूनिफ़ॉर्म पहनना ज़रूरी" - बी. सी. नागेश (शिक्षा मंत्री कर्नाटक)
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संध्या चौरसिया
7 फ़रवरी 2022 (अपडेटेड: 7 फ़रवरी 2022, 05:49 PM IST)
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कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब का मुद्दा बीते कई दिनों से लगातार सुर्खियों का हिस्सा बना हुआ है. दरअसल, उडूपी जिले के एक सरकारी महिला इंटर कॉलेज ने 27 दिसंबर, 2021 से लड़कियों के हिजाब पहनने पर बैन लगा दिया है. इस मामले में लड़कियों ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई 8 फरवरी को होने वाली है. अब तक इस पूरे मामले में कई लोगों के बयान आ चुके हैं. एक नया बयान कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश का आया है. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने मैसूर में पत्रकारों से कहा,
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बता दें कि 5 फरवरी को कर्नाटक सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया है. जिसके तहत ऐसे कपड़ों को बैन कर दिया गया जिससे राज्य के एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में 'एकता, शांति और नियम को खतरा' हो. शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्राएं हिजाब पहनकर स्कूल आ सकती हैं, लेकिन क्लासरूम के अंदर उन्हें हिजाब को बैग में रखना होगा. ट्विटर पर उठ रहे सवाल कर्नाटक हिजाब विवाद के बीच 7 फरवरी को ट्विटर पर#हिजाब_से_दर्द_क्यों ट्रेंड में रहा. लोग पूछ रहे हैं कि एक धर्म निरपेक्ष देश में लड़कियों को अपनी इच्छा से अपनी धार्मिक रीतियों का पालन करने की आज़ादी क्यों नहीं दी जा रही है? लोग ट्विटर पर राइट टू एजुकेशन और राइट टू सेकुलरिज्म की बात कर रहे हैं. एक ट्विटर यूज़र ने लिखा,
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  एक और यूज़र ने लिखा,
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एक यूज़र ने हर धर्म की महिलाओं की सिर ढकी तस्वीर लगाकर लिखा,
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   एक और यूज़र ने लिखा,
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कर्नाटक हाईकोर्ट करेगा सुनवाई इस मामले में छात्राओं की तरफ से कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई है. याचिका में हिजाब पहनकर क्लास अटेंड करने को लेकर अंतरिम अनुमति की मांग की गई है. एक याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनना छात्राओं का मौलिक अधिकार है. जिसका संरक्षण संविधान के आर्टिकल 14 और 25 करते हैं. बता दें कि आर्टिकल 14 समानता के अधिकार की बात करता है और आर्टिकल 25 धर्म की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है. लड़कियों का कहना है कि संविधान धर्म निरपेक्ष है और यह उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार अपनी धार्मिक रीतियों को मानने का अधिकार देता है. छात्राओं की याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट में 8 फरवरी को सुनवाई होगी.

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