हाथ-पैर बार-बार सुन्न पड़ जाते हैं? इस बीमारी में शरीर ही बन जाता है अपना दुश्मन
चलते-चलते बैलेंस बिगड़ जाता है.
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मल्टीपल स्क्लेरोसिस ब्रेन की एक बीमारी है
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
अदा 35 साल की हैं. दिल्ली की रहने वाली हैं. इस साल की शुरुआत उनके लिए अच्छी नहीं रही. उन्हें कुछ ऐसे लक्षण महसूस होने लगे, जो पहले कभी नहीं हुए. उनके सीधे हाथ और पैर में बहुत कमज़ोरी महसूस होती थी. इतनी कि वो न उस हाथ कुछ सामान उठा पातीं न ठीक से चल पातीं. चलते-चलते उनका बैलेंस बिगड़ जाता, जिसके कारण वो गिर जातीं. साथ ही जब भी वो गर्दन आगे की तरफ़ झुकातीं तो उसमें एक करंट सा महसूस होता. घरवालों के कहने पर अदा ने डॉक्टर को दिखाया. उनके कुछ टेस्ट हुए, जिनसे साफ़ हो गया कि उनको मल्टीपल स्क्लेरोसिस नाम की एक बीमारी है.
ये ऐसी बीमारी है जो ब्रेन और आपके नर्वस सिस्टम पर असर करती हैं. नर्वस सिस्टम यानी आपके शरीर का पॉवर हाउस. ये आपके शरीर की हरकतों को कंट्रोल करता है. अदा चाहती हैं कि हम अपने शो पर मल्टीपल स्क्लेरोसिस के बारे में बात करें. ये क्या है, क्यों होती है, इसका इलाज क्या है, इसके बारे में लोगों को जागरूक करें.
समय के साथ देश में मल्टीपल स्क्लेरोसिस के केसेज भी बढ़ रहे हैं. इसका एक कारण ये है कि अब इस बीमारी की जांच होना आसान है. इसका पता ज़्यादा आसानी से चल जाता है. न्यूरोलॉजी इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ये बीमारी हर एक लाख में 5-10 लोगों को होती है. तो सबसे पहले डॉक्टर्स से समझ लेते हैं कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्या है और क्यों होती है? मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्या और क्यों होता है? ये हमें बताया डॉक्टर सुमित सिंह ने.
डॉक्टर सुमित सिंह, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम
-मल्टीपल स्क्लेरोसिस ब्रेन की एक बीमारी है.
-जिसमें ब्रेन की नसों के ऊपर इंसुलेशन की एक परत, जिसे माइलिन शीथ कहा जाता है, उसको नुकसान पहुंचता है. जैसे बिजली के तार पर प्लास्टिक की एक परत होती है जो बिजली बहने में मदद करती है, माइलिन शीथ ठीक वही काम करता है.
-इसके कारण अलग-अलग प्रकार के लक्षण दिखते हैं.
-ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है.
-ऑटोइम्यून बीमारी का मतलब आपका शरीर अपना ही दुश्मन बन जाता है.
-आपकी इम्युनिटी आपके ही शरीर को नुकसान पहुंचाती है.
-जैसे शरीर में किसी वायरस के कारण इन्फेक्शन हुआ.
-उस वायरस के खिलाफ़ आपके शरीर ने एंटीबॉडी बनाई.
-उन एंटीबॉडी की बनावट, माइलिन शीथ की बनावट से मैच कर गई.
-जिसकी वजह से वायरस को खत्म करने के साथ, एंटीबॉडी ने माइलिन शीथ को भी नुकसान पहुंचा दिया.
-ये बताना असंभव है कि इस बीमारी के पीछे मुख्य कारण क्या है.
-लेकिन इसका इलाज संभव है.
मल्टीपल स्क्लेरोसिस ब्रेन की एक बीमारी है
लक्षण -मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण बहुत अलग-अलग प्रकार के होते हैं.
-मरीज़ को बार-बार अटैक पड़ते हैं.
-इन अटैक्स के दौरान मरीज़ को किसी भी प्रकार की प्रॉब्लम हो सकती है.
-उसकी आंखों की रोशनी जा सकती है.
-एक आंख से दिखाई देना बंद हो सकता है.
-दोहरी चीज़ें दिखाई दे सकती हैं.
-चलने पर बैलेंस बिगड़ सकता है.
-शरीर का कोई भी अंग चलना बंद हो सकता है.
-हो सकता है दोनों पैर काम करना बंद कर दें.
-एक हाथ, एक पैर चलना बंद हो सकते हैं.
मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण बहुत अलग-अलग प्रकार के होते हैं
-आवाज़ में लटपलाहट आ जाए.
-बैलेंस बिगड़ने की वजह से मरीज़ को चलने में दिक्कत हो.
-ज़रूरी है कि जैसे ही ये लक्षण दिखें, आप डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं. इलाज -मल्टीपल स्क्लेरोसिस का इलाज दो प्रकार से किया जाता है.
-पहला इलाज किसी भी तरह के अटैक को ठीक करने के काम आता है.
-आमतौर पर इसमें आईवी मिथाइल प्रेडनिसोलोन (IV Methylprednisolone) या स्टेरॉयड नाम की दवाइयां दी जाती हैं.
-अटैक का इलाज करने के लिए स्टेरॉयड, आईवी मिथाइल प्रेडनिसोलोन या उसी प्रकार का कोई और इंजेक्शन 3-5 दिनों के लिए दिया जाता है.
-अगर मरीज़ इससे ठीक हो गया तो बहुत अच्छी बात है.
-यदि मरीज़ ठीक नहीं होता तो IV-IG या खून की सफाई, जिसे प्लाज्मा एक्सचेंज कहा जाता, वो की जाती है.
-मरीज़ को अटैक से बचाने के लिए भी कुछ दवाइयां दी जाती हैं.
-ये टैबलेट या इंजेक्शन के रूप में होती है.
-कुछ दवाइयां ऐसी भी हैं जो जीवन में 1 या 2 दफ़ा दें तो आगे आने वाले अटैक से बचा जा सकता है.
-ज़रूरी है कि आप अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें.
आमतौर पर इसमें आईवी मिथाइल प्रेडनिसोलोन (IV Methylprednisolone) या स्टेरॉयड नाम की दवाइयां दी जाती हैं
-उनसे समझ लें कि आपके लिए कौन सी दवाई सही है.
-बहुत सारे ऑप्शन में से आप और आपके डॉक्टर, आपके लिए सबसे बेहतर दवाई चुन सकते हैं. बचाव -मल्टीपल स्क्लेरोसिस से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में कोई ख़ास बदलाव करना ज़रूरी नहीं है.
-रेगुलर एक्सरसाइज करना ज़रूरी है.
-डाइट में विटामिन डी, एंटीऑक्सीडेंट लें.
-शरीर में विटामिन बी-12 ठीक रहना चाहिए.
-कहा जाता है कि हरी सब्जियां और फ्रेश फल काफ़ी मददगार साबित होते हैं.
-कुछ लोगों का मानना है कि नॉन-वेज डाइट मल्टीपल स्क्लेरोसिस के पेशेंट्स के लिए उतनी अच्छी नहीं होती जितनी वेज डाइट.
-मल्टीपल स्क्लेरोसिस से घबराएं नहीं.
-मल्टीपल स्क्लेरोसिस के पेशेंट्स अपना जीवन नॉर्मल तरह से जी सकते हैं, इसमें आपके डॉक्टर आपकी मदद करते हैं.
डॉक्टर साहब ने मल्टीपल स्क्लेरोसिस से बचने के लिए विटामिन डी, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन बी-12 की बात कही है. इसके लिए आपको खाने में मशरूम, अंडा, चीज़, दूध, विटामिन डी के सप्लीमेंट्स, गाजर, आलू, पालक और राजमा लेना चाहिए. मल्टीपल स्क्लेरोसिस का इलाज संभव है, इसलिए लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
अदा 35 साल की हैं. दिल्ली की रहने वाली हैं. इस साल की शुरुआत उनके लिए अच्छी नहीं रही. उन्हें कुछ ऐसे लक्षण महसूस होने लगे, जो पहले कभी नहीं हुए. उनके सीधे हाथ और पैर में बहुत कमज़ोरी महसूस होती थी. इतनी कि वो न उस हाथ कुछ सामान उठा पातीं न ठीक से चल पातीं. चलते-चलते उनका बैलेंस बिगड़ जाता, जिसके कारण वो गिर जातीं. साथ ही जब भी वो गर्दन आगे की तरफ़ झुकातीं तो उसमें एक करंट सा महसूस होता. घरवालों के कहने पर अदा ने डॉक्टर को दिखाया. उनके कुछ टेस्ट हुए, जिनसे साफ़ हो गया कि उनको मल्टीपल स्क्लेरोसिस नाम की एक बीमारी है.
ये ऐसी बीमारी है जो ब्रेन और आपके नर्वस सिस्टम पर असर करती हैं. नर्वस सिस्टम यानी आपके शरीर का पॉवर हाउस. ये आपके शरीर की हरकतों को कंट्रोल करता है. अदा चाहती हैं कि हम अपने शो पर मल्टीपल स्क्लेरोसिस के बारे में बात करें. ये क्या है, क्यों होती है, इसका इलाज क्या है, इसके बारे में लोगों को जागरूक करें.
समय के साथ देश में मल्टीपल स्क्लेरोसिस के केसेज भी बढ़ रहे हैं. इसका एक कारण ये है कि अब इस बीमारी की जांच होना आसान है. इसका पता ज़्यादा आसानी से चल जाता है. न्यूरोलॉजी इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ये बीमारी हर एक लाख में 5-10 लोगों को होती है. तो सबसे पहले डॉक्टर्स से समझ लेते हैं कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्या है और क्यों होती है? मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्या और क्यों होता है? ये हमें बताया डॉक्टर सुमित सिंह ने.
डॉक्टर सुमित सिंह, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम
-मल्टीपल स्क्लेरोसिस ब्रेन की एक बीमारी है.
-जिसमें ब्रेन की नसों के ऊपर इंसुलेशन की एक परत, जिसे माइलिन शीथ कहा जाता है, उसको नुकसान पहुंचता है. जैसे बिजली के तार पर प्लास्टिक की एक परत होती है जो बिजली बहने में मदद करती है, माइलिन शीथ ठीक वही काम करता है.
-इसके कारण अलग-अलग प्रकार के लक्षण दिखते हैं.
-ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है.
-ऑटोइम्यून बीमारी का मतलब आपका शरीर अपना ही दुश्मन बन जाता है.
-आपकी इम्युनिटी आपके ही शरीर को नुकसान पहुंचाती है.
-जैसे शरीर में किसी वायरस के कारण इन्फेक्शन हुआ.
-उस वायरस के खिलाफ़ आपके शरीर ने एंटीबॉडी बनाई.
-उन एंटीबॉडी की बनावट, माइलिन शीथ की बनावट से मैच कर गई.
-जिसकी वजह से वायरस को खत्म करने के साथ, एंटीबॉडी ने माइलिन शीथ को भी नुकसान पहुंचा दिया.
-ये बताना असंभव है कि इस बीमारी के पीछे मुख्य कारण क्या है.
-लेकिन इसका इलाज संभव है.
मल्टीपल स्क्लेरोसिस ब्रेन की एक बीमारी है
लक्षण -मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण बहुत अलग-अलग प्रकार के होते हैं.
-मरीज़ को बार-बार अटैक पड़ते हैं.
-इन अटैक्स के दौरान मरीज़ को किसी भी प्रकार की प्रॉब्लम हो सकती है.
-उसकी आंखों की रोशनी जा सकती है.
-एक आंख से दिखाई देना बंद हो सकता है.
-दोहरी चीज़ें दिखाई दे सकती हैं.
-चलने पर बैलेंस बिगड़ सकता है.
-शरीर का कोई भी अंग चलना बंद हो सकता है.
-हो सकता है दोनों पैर काम करना बंद कर दें.
-एक हाथ, एक पैर चलना बंद हो सकते हैं.
मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण बहुत अलग-अलग प्रकार के होते हैं
-आवाज़ में लटपलाहट आ जाए.
-बैलेंस बिगड़ने की वजह से मरीज़ को चलने में दिक्कत हो.
-ज़रूरी है कि जैसे ही ये लक्षण दिखें, आप डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं. इलाज -मल्टीपल स्क्लेरोसिस का इलाज दो प्रकार से किया जाता है.
-पहला इलाज किसी भी तरह के अटैक को ठीक करने के काम आता है.
-आमतौर पर इसमें आईवी मिथाइल प्रेडनिसोलोन (IV Methylprednisolone) या स्टेरॉयड नाम की दवाइयां दी जाती हैं.
-अटैक का इलाज करने के लिए स्टेरॉयड, आईवी मिथाइल प्रेडनिसोलोन या उसी प्रकार का कोई और इंजेक्शन 3-5 दिनों के लिए दिया जाता है.
-अगर मरीज़ इससे ठीक हो गया तो बहुत अच्छी बात है.
-यदि मरीज़ ठीक नहीं होता तो IV-IG या खून की सफाई, जिसे प्लाज्मा एक्सचेंज कहा जाता, वो की जाती है.
-मरीज़ को अटैक से बचाने के लिए भी कुछ दवाइयां दी जाती हैं.
-ये टैबलेट या इंजेक्शन के रूप में होती है.
-कुछ दवाइयां ऐसी भी हैं जो जीवन में 1 या 2 दफ़ा दें तो आगे आने वाले अटैक से बचा जा सकता है.
-ज़रूरी है कि आप अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें.
आमतौर पर इसमें आईवी मिथाइल प्रेडनिसोलोन (IV Methylprednisolone) या स्टेरॉयड नाम की दवाइयां दी जाती हैं
-उनसे समझ लें कि आपके लिए कौन सी दवाई सही है.
-बहुत सारे ऑप्शन में से आप और आपके डॉक्टर, आपके लिए सबसे बेहतर दवाई चुन सकते हैं. बचाव -मल्टीपल स्क्लेरोसिस से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में कोई ख़ास बदलाव करना ज़रूरी नहीं है.
-रेगुलर एक्सरसाइज करना ज़रूरी है.
-डाइट में विटामिन डी, एंटीऑक्सीडेंट लें.
-शरीर में विटामिन बी-12 ठीक रहना चाहिए.
-कहा जाता है कि हरी सब्जियां और फ्रेश फल काफ़ी मददगार साबित होते हैं.
-कुछ लोगों का मानना है कि नॉन-वेज डाइट मल्टीपल स्क्लेरोसिस के पेशेंट्स के लिए उतनी अच्छी नहीं होती जितनी वेज डाइट.
-मल्टीपल स्क्लेरोसिस से घबराएं नहीं.
-मल्टीपल स्क्लेरोसिस के पेशेंट्स अपना जीवन नॉर्मल तरह से जी सकते हैं, इसमें आपके डॉक्टर आपकी मदद करते हैं.
डॉक्टर साहब ने मल्टीपल स्क्लेरोसिस से बचने के लिए विटामिन डी, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन बी-12 की बात कही है. इसके लिए आपको खाने में मशरूम, अंडा, चीज़, दूध, विटामिन डी के सप्लीमेंट्स, गाजर, आलू, पालक और राजमा लेना चाहिए. मल्टीपल स्क्लेरोसिस का इलाज संभव है, इसलिए लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

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