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मां के पेट में बच्चा, बच्चे के पेट में बच्चा! आखिर ये है क्या?

18वीं शताब्दी से ही फीटस इन फीटू के केसेस सामने आते रहे हैं, जिसमें बच्चे के पेट में बच्चा पाया गया है!

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1 जून 2022 (अपडेटेड: 4 सितंबर 2025, 01:09 PM IST)
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दुनियाभर में फीटस इन फीटू के 200 से ज़्यादा केस सामने आ चुके हैं.
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हरियाणा में करीब एक महीने पहले एक बच्ची का जन्म हुआ. कुछ वक्त बाद, बच्ची के पैरेंट्स ने ध्यान दिया कि उसका पेट सूजा हुआ है. उसे दूध पीने में दिक्कत होती है. वो बहुत चिढ़चिढ़ाती है. फिर पैरेंट्स अपनी बच्ची को अस्पताल ले गए. कुछ जांचें हुईं. जो नतीजा सामने आया, उसने इस केस को रेयर बना दिया है. दरअसल, बच्ची के पेट में एक नहीं, बल्कि दो विकृत भ्रूण मिले. विकृत यानी आधे बने हुए.

ये मामला सुनने में भले नया लगे, पर दुनियाभर में ऐसे कई केसेज़ देखे गए हैं.  2022 में बिहार के मोतिहारी में एक 40 दिन के बच्चे के पेट में भ्रूण मिला था. जब बच्चे के पेट में बच्चा हो, तो इसे ‘फीटस इन फीटू’ या ‘फीटस इन फीटस’ कहते हैं. ये बहुत ही रेयर कंडीशन है. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, किसी नवजात बच्चे के अंदर दो भ्रूण मिलने के सिर्फ 35 मामले ही दुनिया में अबतक सामने आए हैं. 

इस ‘फीटस इन फीटू’ कंडीशन के बारे में सब कुछ जानिए,

फीटस इन फीटू क्या कंडीशन होती है?

ये हमें बताया डॉक्टर सबीता कुमारी ने.

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डॉक्टर सबीता कुमारी, गाइनकॉलजिस्ट, एकॉर्ड सुपर स्पेशलिटी, फ़रीदाबाद

18वीं शताब्दी से ही फीटस इन फीटू के केस सामने आते रहे हैं. पर इसका बहुत साइंटिफिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. दुनियाभर में फीटस इन फीटू के 200 से ज़्यादा केस सामने आ चुके हैं. ये केस बहुत रेयर होते हैं. 5-10 लाख बच्चों में ऐसा होता है. भारतीयों में फीटस इन फीटू के लगभग 10 केस सामने आ चुके हैं. इसमें बच्चे के पेट में बच्चा बन रहा होता है.

कारण

फीटस इन फीटू का पक्का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है. लेकिन कुछ थ्योरीज़ ज़रूर हैं. जब मां के गर्भ में एक से ज़्यादा बच्चे पल रहे होते हैं, जैसे जुड़वां बच्चे या ट्रिपलेट. तब इस डेवलपमेंट के दौरान कुछ केसेज में एक भ्रूण दूसरे बच्चे के अंदर बढ़ने लगता है. ये केवल एक थ्योरी है. डेवलपमेंट के दौरान जो सेल्स बच्चे के अंदर चले गए, वो भ्रूण के रूप में बच्चे के अंदर बनने लगते हैं. बच्चे के पेट के अंदर जो बच्चा है, वो असल में उसका जुड़वां है. सेल्स किस तरह बच्चे के अंदर जाते हैं, इस पर कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है.

दूसरी थ्योरी कहती है कि ये हाइली डिफरेंशिएटेड टेराटोमा होता है. टेराटोमा को जर्म सेल्स ट्यूमर भी कहते हैं यानी एक ऐसा ट्यूमर जिसमें दांत, बाल वगैरह दिखते हैं. इस केस में ये सेल्स बच्चे के अंदर जाते हैं और एक भ्रूण का फॉर्म लेते हैं. ये जुड़वां बच्चा अपने ही भाई या बहन के पेट में पलता है.

लक्षण

जब बच्चा पैदा हो जाता है तो पेल्विस यानी पेडू के हिस्से में सूजन रहती है, एक लंप रहता है. पेशाब आना बंद हो जाता है. बहुत दर्द होता है. इन लक्षणों के बाद डॉक्टर जांच करते हैं, जिससे इसका पता चलता है. 2015 में हांग कांग में कुछ ऐसा ही केस सामने आया था. जांच में पता चला कि बच्चे के पेट में बच्चा है.

Fetus in Fetu: Rare case reported in 40-day-old baby in Bihar
डेवलपमेंट के दौरान जो सेल्स बच्चे के अंदर चले गए, वो भ्रूण के रूप में बच्चे के अंदर बनने लगता है

2018-2019 के आसपास भी ऐसा एक केस सामने आया था. अगर पैदा हुए बच्चे को पेट या पेट के नीचे सूजन हो. बहुत दर्द हो. पेशाब रुक जाए. ऐसे लक्षण आने पर फीटस इन फीटू की जांच हों क्योंकि ऐसा हो सकता है.

फीटस इन फीटू क्या होता है डॉक्टर सबीता ने ये समझा दिया. अब आप में से बहुत लोगों के मन में ये सवाल होगा कि ऐसे में बच्चे और भ्रूण का क्या होता है. अव्वल तो अगर एक छोटे से बच्चे के शरीर में भ्रूण होगा, तो आप समझ सकते हैं इससे उसकी सेहत पर किस तरह का असर पड़ रहा होगा. बच्चा कितना ज़्यादा दर्द में होगा. इसलिए सर्जरी की मदद से इस भ्रूण को बच्चे के शरीर से निकाल दिया जाता है. अब सवाल आता है कि जो ये भ्रूण है, उसका क्या होता है? देखिए, ये भ्रूण इतना डेवलप नहीं हुआ होता है, कि ये सरवाइव कर सके. ये बच्चे के शरीर में पल नहीं हो रहा होता है, इसलिए ये जीवित नहीं रहता है. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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