गर्भाशय से बाहर प्रेग्नेंसी कैसे हो जाती है?
ये जानलेवा भी हो सकता है.

(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
एक नॉर्मल प्रेग्नेंसी गर्भाशय के अंदर होती है. गर्भ के अंदर बच्चा ठहरता है. लेकिन कई बार प्रेग्नेंसी गर्भ के बाहर हो जाती है. इसे कहते हैं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी. महिलाओं को पता भी नहीं चलता कि उनकी प्रेग्नेंसी नॉर्मल नहीं है. जब सेहत ज़्यादा बिगड़ने लगती है और भयानक दर्द होने लगता है, तब जाकर जांच की जाती है. उसमें पता चलता है कि बच्चा गर्भ के अंदर नहीं बाहर पल रहा है.
ऐसा ही कुछ हुआ है Lallantop की व्यूअर अनामिका के साथ. उनको ज़रा भी अंदाज़ा नहीं हुआ कि प्रेग्नेंसी में कुछ गड़बड़ है. एक रात अचानक बर्दाश्त के बाहर दर्द होने लगा. जब वो अस्पातल गईं, उनकी जांच हुई तब जाकर पता चला. इसलिए अनामिका चाहती हैं कि हम अपने शो पर इस तरह की प्रेग्नेंसी के बारे में बात करें, ताकि दूसरी औरतों को भी मदद मिल सके. तो चलिए डॉक्टर्स से जानते हैं कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या होती है और कैसे पता करें आपके साथ तो ऐसा नहीं हो रहा है.
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या होती है?ये हमें बताया डॉक्टर सुरभि सिद्धार्थ ने.
-आमतौर पर प्रेग्नेंसी गर्भाशय के अंदर होती है
-लेकिन कभी-कभी प्रेग्नेंसी गर्भाशय के बाहर भी हो सकती है
-इसको एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहा जाता है
-क्योंकि गर्भाशय के बाहर प्रेग्नेंसी होना नॉर्मल नहीं है
-इसलिए जानना ज़रूरी है कि जो प्रेग्नेंसी हुई है वो ट्यूब में तो नहीं है
-एक्टोपिक प्रेग्नेंसी ट्यूब में भी हो सकती है
-सर्विक्स यानी गर्भाशय के मुंह पर भी हो सकती है
-ओवरी में भी हो सकती है
-बहुत कम केसेस में एब्डोमिनल कैविटी में भी हो सकती है
-अगर प्रेग्नेंसी इन जगहों में हुई है तो ग्रोथ ठीक नहीं होती
-सेहत से लेकर जान का भी ख़तरा होता है
कारण-कारण कुछ भी हो सकता है
-जैसे माइल्ड इन्फेक्शन
-बचपन में पेट में टीबी
-कभी-कभी बिना कारण भी इस तरह की प्रेग्नेंसी हो सकती है
-ये रिपीट भी हो सकती है
-इसका जींस से कोई लेना देना नहीं है
-आपके खान-पान का इस तरह की प्रेग्नेंसी पर कोई असर नहीं पड़ता है
-कई बार ट्यूब्स की क्वालिटी अच्छी नहीं होती
-जिसके कारण इस तरह की प्रेग्नेंसी हो जाती है
प्रेग्नेंसी के बाद क्या ज़रूर चेक करें?-प्रेगनेंट होने के बाद ये ज़रूर चेक करें प्रेग्नेंसी सही जगह है या नहीं
-जैसे ही पीरियड मिस हो प्रेग्नेंसी टेस्ट करें
-सीरम बीटा एचसीजी ( Serum Beta-hCG) ब्लड टेस्ट करें
-दर्द हो रहा है तो डॉक्टर से मिलें
-सोनोग्राफी से ही पता चल सकता है कि प्रेग्नेंसी की जगह कौन सी है
-अगर प्रेग्नेंसी गर्भाशय के बाहर है तो उसका इलाज किया जाता है
इलाज-अगर बीटा एचसीजी ( Serum Beta-hCG) लेवल 2000 के आसपास है या प्रेग्नेंसी का साइज़ कम है
-तो दवाइयों से इसका इलाज किया जा सकता है
-इसके लिए अस्पताल में एडमिट होना ज़रूरी है
-क्योंकि इस तरह की प्रेग्नेंसी कभी भी फट सकती है
-यानी वो ट्यूब कभी भी फट सकते हैं
-जिसके कारण अंदर ही अंडर कभी भी ब्लीडिंग हो सकती है
-कई बार रात में भयानक दर्द होने का चांस होता है
-ऐसे में इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड कर के पेशेंट को एडमिट करते हैं
-पल्स, बीपी अगर स्टेबल है तो ऑपरेशन भी कर सकते हैं
-ऐसे में ऑपरेशन या तो लेप्रोस्कोपिक करते हैं
-यानी दूरबीन से ऑपरेशन करते है
-ट्यूब को बचाने की कोशिश करते हैं
-लेकिन ब्लीडिंग अगर ज़्यादा है तो उस साइड का ट्यूब कट भी करना पड़ता है
-कुछ पेशेंट्स का बहुत लो ब्लड प्रेशर होता है
-बहुत ज़्यादा दर्द होता है
-चक्कर आ रहा होता है
-ऐसी कंडीशन में अगर पीरियड मिस हुआ है, बीटा एचसीजी पॉजिटिव है तो दूरबीन से ऑपरेशन करने का समय नहीं मिलता
-ऐसे में डायरेक्ट पेट खोलकर ऑपरेशन करना पड़ता है
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी मां के लिए ख़तरनाक यहां तक कि जानलेवा भी हो सकती है. इसलिए प्रेग्नेंसी का पता चलते ही जो टेस्ट बताए गए हैं, वो ज़रूर करवाएं. ताकि समय रहते इलाज हो सके.
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